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Tuesday, May 17, 2016

दुनिया का पहला रोबो वकील, चौबीसों घंटे देगा कानूनी सलाह


वाशिंगटन: अमेरिका की एक लॉ फर्म 'बेकर होसटेटलर' ने दुनिया का पहला आर्टिफीशियल इंटेलीजेंट लॉयर (कृत्रिम लेकिन बुद्धिमान वकील) नियुक्त किया है। यह रोबोट विधि अनुसंधान से जुड़ी विभिन्न टीमों को अपनी सहायता प्रदान करेगा।

'रॉस' (आरओएसएस) नाम के इस रोबोट का निर्माण आईबीएम की वॉटसन काग्निटिव कंप्यूटर पर आधारित है। अनुसंधान से संबंधित अपने सवाल वकील 'रॉस' से पूछ सकेंगे।

इसके बाद यह रोबोट कानूनों का अवलोकन करेगा, उनसे साक्ष्य इकट्ठे करेगा, निष्कर्ष निकालेगा और उसके बाद साक्ष्य आधारित सबसे सटीक उत्तर देगा।

'रॉस' अपने उपयोगकर्ताओं को अदालत के ऐसे निर्णयों के बारे में चौबीसों घंटे सूचित करता रहेगा जो उनके मामलों को प्रभावित कर सकते हैं।

यह ऐसा प्रोग्राम है जो उपयोगकर्ता वकीलों से लगातार सीखता रहता है और बदले में उन्हें हर बार बेहतर परिणाम उपलब्ध कराता है।

'बेकर होसटेटलर' रॉस के उपयोग का लाइसेंस दिवालियापन, पुनर्संरचना और कर्जदाताओं के अधिकार से जुड़ी टीम को देगी।

मुख्य सूचना अधिकारी बॉब क्रेग ने बताया, 'बेकर होसटेटलर में हम मानते हैं कि काग्निटिव कंप्यूटिंग और मशीन से सीखने के अन्य तरीकों से हम अपने मुवक्किलों को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सुधार सकते हैं।

राहुल को हुआ बुखार, मोदी ने पूछा हालचाल


नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बीमार हैं। उन्हें बुखार हो गया है। उनकी हालत की जानकारी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता जताते हुुए उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘माननीय प्रधानमंत्री से पता चला कि राहुल गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वे उनके स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित थे। माननीय प्रधानमंत्री की चिंता के मद्देनजर मैंने उनके (राहुल) स्वास्थ्य के बारे में पता किया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।’ राहुल ने पिछले हफ्ते पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल का अपना दो दिवसीय दौरा यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि वह तेज बुखार से पीड़ित हैं। 

Sunday, May 15, 2016

केरल में एक सप्ताह की देरी से पहुंचेगा मानसून


इस बार हालांकि अच्छी मानसूनी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। लेकिन मौसम विभाग ने कहा कि मानसून की केरल में एंट्री में देरी हो सकती है। केरल में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि एक जून है। लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि बार सात जून को मानसून केरल पहुंचेगा। इस भविष्यवाणी में चार दिन की मॉडलीय त्रुटि हो सकती है। यानी मानसून तीन जून को भी आ सकता है और 11 जून तक विलंबित भी हो सकता है।

मौसम विभाग ने रविवार को मानूसन का पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा कि बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से अंडमान सागर में मानसून के सक्रिय होने की स्थितियां बन रही हैं। वहां बारिश हो रही है तथा एक निम्न दबाव का क्षेत्र भी बना हुआ है। अब 17 मई तक वहां मानसून सक्रिय हो जाएगा। लेकिन केरल में प्रवेश यह सात जून को करेगा।

पांच पैरामीटर-मौसम विभाग के अनुसार पांच पैरामीटरों को आधार बनाकर भविष्यवाणी की गई है। इनमें एक उत्तर-पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान, दूसरा दक्षिण भारत में हो रही मानसून पूर्व बारिश, तीसरा दक्षिणी चीन सागर में उत्पन्न होने वाला विकीरण, चौथा अंडमान सागर में निचले क्षोभमंडल (जमीन से वायुमंडल में चार मील की ऊंचाई की परत) की हवाओं का रुख तथा पांचवा हिन्द महासागर में ऊपरी क्षोभमंडलीय हवाओं के रुख को आधार बनाया गया है।

संबंध नहीं-मौसम विभाग ने साफ किया है कि मानसून के अंडमान सागर में पहुंचने, केरल में देरी से आने तथा कुल मानसूनी बारिश होने का आपस में कोई संबंध नहीं है। मतलब यह हुआ कि बंगाल की खाड़ी में मानसून देर से भी सक्रिय होता है तो केरल में जल्दी पहुंच सकता है। केरल में जल्दी पहुंचने के बावजूद अच्छी बारिश की कोई गारंटी नहीं।

सिर्फ एक बार गलत-मौसम विभाग ने कहा कि वह 2005 से मानसून के केरल पहुंचने की भविष्यवाणी कर रहा है। तथा पिछले 11 सालों में सिर्फ एक बार ही उसकी भविष्यवाणी गलत साबित हुई है। बाकी सालों में सटीक निकली है। सामान्य से ज्यादा बारिश होगी-मौसम विभाग ने पिछले महीने भविष्यवाणी की थी कि इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से ज्यादा होगी।

106 फीसदी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। दो साल से सूखे की मार झेल रहे देश ने इससे राहत की सांस ली है। लेकिन मानसून की दस्तक में देरी से क्या असर पड़ेगा, अभी कहना मुश्किल है। अगले दो-तीन दिन गर्मी भरे-इस बीच मौसम विभाग ने कहा कि अगले दो-तीन दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी का दौर जारी रहेगा। तापमान में एक से दो डिग्री की और बढ़ोत्तरी हो सकती है। अभी दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिमी राज्यों में पारा सामान्य से तीन-पांच डिग्री तक अधिक चल रहा है।

भारतीय मुक्केबाजी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है : मैरीकोम


नयी दिल्ली : विश्व चैम्पियनशिप में लंबे समय तक दबदबा बनाने वाली एमसी मैरीकोम का मानना है कि इस बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में वह नुकसान की स्थिति में होंगी और इस स्टार भारतीय मुक्केबाज ने अपनी संभवत: अंतिम विश्व चैम्पियनशिप में इसकी भरपाई आक्रामकता को दोगुना करके करने का वादा किया है.

विश्व चैम्पियनशिप का आयोजन कजाखस्तान के अस्ताना में 19 से 27 मई किया जाएगा. मैरीकोम ने चैम्पियनशिप के लिए रवाना होने से पूर्व अपनी तैयारियों और लक्ष्य को लेकर पीटीआई से बात की. इस टूर्नामेंट के जरिये मैरीकोम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकती है.

ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मैरीकोम ने कहा, ‘‘देखते हैं यह विश्व चैम्पियनशिप कैसी रहती है. मैं टूर्नामेंट की एंबेसडर में शामिल हूं इसलिए उम्मीद करती हूं कि यह मेरे लिए फायदे की स्थिति होगी. मुझे नुकसान की स्थिति से भी कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं चाहे क्वालीफाई करुं या नहीं, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करुंगी.'' मणिपुर की यह मुक्केबाज नुकसान की स्थिति रैफरी और जजों के बीच भारतीय प्रतिनिधित्व नहीं होने के संदर्भ में कह रही थी क्योंकि देश में कोई राष्ट्रीय महासंघ नहीं है.

मैरीकोम ने कहा, ‘‘बेशक कोई प्रतिनिधित्व नहीं है और यह बात दिमाग में आती है. अगर हम अच्छा प्रदर्शन करते है. तो भी हार सकते हैं क्योंकि हमारा पक्ष रखने के लिए कोई अधिकारी नहीं है. कभी कभी हमें काफी डर लगता है कि कौन हमारा समर्थन करेगा. जिन देशों में उचित महासंघ हैं उन्हें जब लगता है कि कुछ अनुचित हुआ है तो वे कड़ा विरोध करते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते.

कोई हमारा समर्थन करने के लिए नहीं है.'' उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय मुक्केबाजी सबसे अपने मुश्किल दौर से गुजर रही है. अब तक सिर्फ एक लड़के (शिव थापा) ने क्वालीफाई किया है. यह सारी कहानी बयां करता है. एक और क्वालीफायर (पुरुषों के लिए) बचा है लेकिन यह देखना होगा कि इससे कितने और मुक्केबाज क्वालीफाई करते हैं. पिछली बार आठ मुक्केबाजों ने ओलंपिक में हिस्सा लिया था.'' मैरीकोम को अगर ओलंपिक में क्वालीफाई करना है तो उन्हें विश्व चैम्पियनशिप में कम से कम सेमीफाइनल में जगह बनानी होगी.

रघुराम राजन ने कहा- भारत में भ्रष्टाचार में कमी आयी


लंदन: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि उन्होंने पाया कि भारत में अपना आयकर रिटर्न भरना अमेरिका की तुलना में कहीं आसान है। उन्होंने शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में एक संवाद में यह बात कही। ‘मैंने पाया कि मेरे लिए भारत में आयकर रिटर्न दाखिल करना अमेरिका में अपना आयकर दाखिल करने से अधिक आसान है।’ भारत में भ्रष्टाचार संबंधी एक सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में इसमें बहुत कमी आई है। उन्होंने इसके लिए रेलवे टिकटिंग व कर विभाग का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रौद्योगिकी ने मदद की है। उदाहरण के लिए हमने आटोमेटेड रेलवे टिकटिंग शुरू की और वहां भ्रष्टाचार में बहुत कमी आई। अब दलाल सारी टिकटों पर कब्जा कर उन्हें अलग से नहीं बेचते। आयकर विभाग का भी आटोमेशन किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘आपको अपना धन वापस पाने के लिए आयकर निरीक्षक के पास नहीं जाना पड़ता। मैंने पाया कि मेरे लिए भारत में आयकर रिटर्न दाखिल करना अमेरिका में आयकर दाखिल करने से अधिक आसान है।’

राजन ने कहा कि भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज तेज हुई है। ‘‘हमारे पास स्वतंत्र मीडिया है जो कि इस तरह की घटनाओं को उजागर करने का प्रयास करता है। हमारे पास ऐसी जनता है जो कि भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी है। मेरा मानना है कि सरकार ने आवंटन और ठेकों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिये कई कदम उठाये हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह पिछले कुछ सालों की प्रक्रिया है। मुझे लगता है कि हम पहले से काफी बेहतर स्थिति में हैं। इस तरह बड़े पैमाने पर जो भ्रष्टाचार था उसमें कमी आई है। क्या भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो गया है? सही मायनों में नहीं। इस दिशा में अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।’'

भारतीयों में टकरावों के प्रबंधन की जन्मजात क्षमता: मोदी


निनोरा: खुद के रास्ते को दूसरों के रास्ते से सही मानने के भाव को पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि और आतंकवाद जैसी भीषण समस्याओं की जड़ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत अंतर्द्वंद्व से जुड़े वैश्विक मसलों को हल करने में प्रतिनिधि भूमिका निभा सकता है, क्योंकि इस मुल्क के लोगों में टकरावों के प्रबंधन की जन्मजात क्षमता है। मोदी ने उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ मेले की पृष्ठभूमि में प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय विचार महाकुंभ’ के समापन समारोह में कहा, ‘दुनिया पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि और आतंकवाद की दो भीषण समस्याओं से जूझ रही है। इन समस्याओं के मूल में यह भाव है कि मेरा रास्ता तेरे रास्ते से सही है। यही भाव और विस्तारवाद दुनिया को टकराव के रास्ते पर धकेलता जा रहा है।’


उन्होंने कहा, ‘दुनिया टकरावों के समाधान के लिये बड़े-बड़े सेमिनार कर रही है। लेकिन उसे इनका हल नहीं मिल रहा है। लेकिन हम भारतीयों में टकरावों के प्रबंधन की जन्मजात क्षमता होती है। हम विश्व को रास्ता दिखा सकते हैं। हम हठवादिता से बंधे लोग नहीं हैं, हम अपने दर्शन की परंपराओं से बंधे लोग हैं।’ प्रधानमंत्री ने मिसाल देते हुए कहा, ‘हम भगवान राम की पूजा करते हैं जिन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया था, वहीं हम भक्त प्रहलाद की भी पूजा करते हैं जिन्होंने अपने पिता के आदेश का अनादर किया था।’

मोदी ने अमेरिका में राष्ट्रपति पद के जारी चुनावों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘हम परिवार नाम की संस्था में सदियों से भरोसा करते आ रहे हैं। लेकिन दुनिया अब जाकर इस संस्था के महत्व को समझ रही है। दुनिया के समृद्ध देशों के नेता जब चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो वे प्रचार के दौरान एक बात बार-बार कहते हैं कि उनके देश में पारिवारिक मूल्यों को फिर से स्थापित किया जायेगा।’ प्रधानमंत्री ने सिंहस्थ कुंभ मेला 2016 के 51 सूत्रीय घोषणापत्र को जारी भी किया। इस मौके पर श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना भी मौजूद थे। मोदी ने कुंभ मेले के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, ‘कुंभ मेले में बगैर किसी औपचारिक न्योते के दुनिया भर से इतने लोग हर दिन जुटते हैं, जितनी यूरोप के किसी देश की जनसंख्या होती है। यह मेला प्रबंधन की बड़ी परिघटना है। कुंभ मेले को केस स्टडी की तरह दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिये।’ उन्होंने हालांकि इस बात पर चिंता जतायी कि लगातार प्रचार के जरिये नगा साधुओं को ‘कुंभ की एकमात्र पहचान’ बना दिया गया है।

मोदी ने कहा, ‘हमें भारत की ब्रांडिंग उस जुबान में करनी चाहिये, जिसे दुनिया अच्छी तरह समझती है।’ उन्होंने सभी 13 अखाड़ों के प्रमुखों और हिंदुओं के अन्य पंथ संप्रदायों के धर्मगुरुओं से अपील की कि वे वर्ष में एक सप्ताह तक वृक्षारोपण, नदियों के संरक्षण, बेटियों की शिक्षा और नारी के सम्मान जैसे विषयों पर वैज्ञानिक तरीके से विचार मंथन करें। मोदी ने यह भी कहा, ‘हमें समय के बदलाव को स्वीकारते हुए उन परंपराओं को छोड़ना होगा, जो अब चलन से बाहर हो चुकी हैं। परंपराओं के नाम पर अवैज्ञानिक चीजों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिये। हमें अपने भीतर झांककर व्यवस्थाओं को आधुनिक करने और नयी ऊंचाइयों को छूने की आवश्यकता है। बदलाव को आने दिया जाना चाहिये और इसे स्वीकार किया जाना चाहिये।'

Saturday, May 14, 2016

उप्र चुनावों में कांग्रेस की कमान संभाल सकती हैं प्रियंका


उत्तर प्रदेश में संगम तीरे बसे इलाहाबाद की जितनी धार्मिक मान्यता है। उतनी ही इसकी अपनी सियासी पहचान है। बात चाहें देश की आजादी की हो या फिर सियासत की, दोनों ही जगह इलाहाबाद के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इलाहाबाद ने कई क्रांतिकारियों और राजनेताओं को जन्म दिया है। कांग्रेस के इलाहाबाद से रिश्ते काफी पुराने हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पहचान भले ही कश्मीरी पंडित की थी, लेकिन उनकी कर्मभूमि इलाहाबाद ही रही। नेहरू ने यहां से सियासत शुरू की तो उनकी इकलौती बेटी इंदिरा गांधी को भी इलाहाबाद खूब रास आया। इलाहाबाद आज भी सियासी कारणों से पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। जब भी लोकसभा/विधानसभा का चुनाव आता है यहां राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो जाती हैं। तेजी का यह दौर राहुल गांधी की विफलता के बाद कुछ ज्यादा ही मुखर होकर सामने आ रहा है। यहां से प्रियंका गांधी के समर्थन में आवाजें उठती हैं तो दबी जुबान से यहां के कांग्रेसी आलाकमान को यह अहसास कराने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं कि राहुल गांधी यूपी की सियासत में वह मुकाम हासिल नहीं कर पा रहे हैं जिसकी कांग्रेस को दरकार है। यहां के कांग्रेसी प्रियंका गांधी में उनकी तेजतर्रार दादी इंदिरा गांधी की झलक देखते हैं। 'प्रियंका नहीं आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है।' के यहां नारे लगाये जाते हैं।

अदने से अदना और बड़े से बड़ा कांग्रेसी भी जानता है कि इलाहाबाद ऐसा शहर है, जिससे गांधी परिवार कभी दूरी नहीं बना सका। भले ही इलाहाबाद की दोनों संसदीय सीटों (इलाहाबाद−फूलपुर) पर 1984 के बाद से कांग्रेस का खाता नहीं खुला हो, लेकिन यहां नेहरू−इंदिरा को चाहने वालों की कमी नहीं है। इसमें कांग्रेसी भी हैं ओर आमजन भीं। यह लोग लगातार इस प्रयास में रहते हैं कि किसी तरह से प्रियंका गांधी को यहां से चुनाव लड़ा दिया जाये। कोशिशें हर बार हुईं, लेकिन लगता है इस बार यह कोशिश परवान चढ़ सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व यदि 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी इलाहाबाद की किसी विधानसभा सीट से किस्मत आजमाते हुए नजर आयें तो किसी को आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए। प्रियंका को मैदान में उतारने की योजना राहुल के रणनीतिकार बना रहे हैं।

कांग्रेसी गलियारों में चर्चा तो यह भी है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी यूपी की सियासत में अहम किरदार निभाने को कहा जा सकता है। वह यूपी चुनाव में कांग्रेस की प्रभारी बन सकती हैं। प्रियंका गांधी, शीला दीक्षित और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी की तिकड़ी के सहारे कांग्रेस आलाकमान भाजपा को महिलाओं के मुद्दे पर बैकफुट पर धकेलना चाहती है। पीएम मोदी जिस तरह से महिलाओं के हितों के लिये काम कर रहे हैं, उससे कांग्रेस ही नहीं बसपा और समाजवादी नेतृत्व भी परेशान है। सपा के पास महिला नेतृत्व का अभाव है। इसलिये वह ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नहीं दिखता है, लेकिन बसपा और कांग्रेस लगातार भाजपा की हवा निकलाने की कोशिश कर रही हैं।

यूपी की राजनीति में प्रियंका गांधी का आगमन हो रहा है, यह बात इसलिये और भी दावे के साथ कही जा सकती हे क्योंकि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी अचानक इलाहाबाद को लेकर काफी गंभीर हो गई हैं। सोनिया एक महीने के अंदर इलाहाबाद के दो बार चक्कर लगा चुकी हैं। सोनिया की दोनों ही यात्राएं गोपनीय रखने की कोशिश की गई थी। पहली यात्रा के दौरान तो उनकी कुछ कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात हो भी गई दूसरी यात्रा के दौरान वह किसी से नहीं मिलीं। सोनिया के इलाहाबाद दौरे को राजनीतिक पंडित प्रियंका से जोड़ कर देख रहे हैं। आने वाले समय में भी सोनिया की कई यात्राओं की बात कही जा रही है।

वैसे, यह बात भूलनी नहीं चाहिए कि बुरे समय में इलाहाबाद से कई बार कांग्रेस ने खोई हुई ताकत हासिल की है। अतीत पर नजर दौड़ाई जाये तो इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से अलग होने के पश्चात जब फूलपुर को संसदीय क्षेत्र का दर्जा हासिल हुआ तो 1957 में यहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चुनाव लड़ा था। 1962 में भी नेहरू यहां से चुनाव जीते। नेहरू के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित और वीपी सिंह ने भी यहां से चुनावों में जीत हासिल करके कांग्रेस का मान बढ़ाया था। 1984 के बाद से कांग्रेस को यहां से जीत हासिल नहीं हो पाई। नेहरू ने जब इलाहाबाद की फूलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा तो उन्हीं वर्षों (1957−1962) में इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से नेहरू के सबसे करीबी लाल बहादुर शास्त्री चुनाव जीतते रहे। इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, दिग्गज कांग्रेस नेता हेमवती नंदन बहुगुणा और 1984 में अभिनेता से नेता बने अमिताभ बच्चन भी चुनाव जीत कर शोहरत हासिल कर चुके हैं। बाद में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र, रेवती रमण सिंह और भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को भी यहां से जीत हासिल करने का सौभाग्य हासिल हुआ। कांग्रेस से अलग होने के पश्चात 1988 में वीपी सिंह यहां हुए उप−चुनाव में उतरे और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की।

इलाहाबाद से इंदिरा गांधी चुनाव भले ही नहीं लड़ी थीं, लेकिन उनका लगाव हमेशा ही इस जिले से बना रहा। यही बात राजीव गांधी के साथ भी जुड़ी थी। हालांकि पिछले तीन दशकों से कांग्रेस के परिवार या उसका वफादार उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण यहां से कांग्रेस का प्रभाव काफी कम हो गया है। हाल ही में इलाहाबाद पहुंचीं सोनिया गांधी से स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रियंका को यहां से चुनाव लड़ाने की मांग की थी। तब सोनिया गांधी ने इस पर विचार करने का आश्वासन भी दिया था। यह माना जा रहा है कि नवंबर के मध्य तक इस बात की औपचारिक घोषणा कर दी जायेगी। नवंबर इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी माह 14 नवंबर को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का और 19 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्मदिन होता है। नेहरू−इंदिरा गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान प्रियंका के नाम पर मुहर लग सकती है। प्रियंका के नाम की घोषणा नवंबर में एक और वजह यह है कि कांग्रेस चाहती है कि प्रियंका के नाम की घोषणा जितनी देरी से होगी, उतना उनके नाम का क्रेज बना रहेगा।

प्रियंका को यूपी की सियासत में उतारने और उन्हें इलाहाबाद से चुनाव लड़ाने के पीछे की वजह प्रशांत किशोर बताये जाते हैं। इस क्षेत्र में कांग्रेस की संभावनाएं प्रबल हैं। यहां की जनता का आज भी नेहरू परिवार से भावनात्मक लगाव है। 2012 के विधानसभा चुनाव के समय भी कांग्रेस इलाहाबाद से एक सीट निकालने में सफल रही थी। बात आगे बढ़ाई जाये तो यह अहसास सबको है कि उत्तर प्रदेश और नेहरू गांधी परिवार का रिश्ता पुराना है। इस परिवार को यूपी से जितना मिला, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। अगर देश की सियासत में इस परिवार का चार पीढ़ियों से सिक्का चला तो यूपी और उसमें भी खासकर इलाहाबाद, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। यूपी में इस परिवार की सियासत का परचम फहरा तो पूरे देश में इसका प्रभाव देखने को मिला। दिल्ली की सत्ता यूपी के रास्ते से होकर गुजरती है। यह बात नेहरू−गांधी परिवार से बेहतर कौन जान सकता है। यूपी में कांग्रेस कमजोर हुई तो दिल्ली से भी उखड़ गई। कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में ऐसी दुर्दशा बस एक बार इमरजेंसी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में देखने को मिली थी। तब और कारण थे, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कमजोर है तो उसकी वजह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का कमजोर पड़ना है।

— अजय कुमार 

मालेगांव: एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दी


मुंबई: साल 2008 के मालेगांव धमाके के मामले में पूरा ‘यू-टर्न’ लेते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप हटा लिए हैं जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित सभी 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ सख्त मकोका कानून के तहत लगाए गए आरोप भी हटा लिए गए हैं। एनआईए ने दावा किया कि जांच के दौरान प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पांच अन्य के खिलाफ ‘‘पर्याप्त सबूत नहीं पाए गए।’’

एजेंसी ने कहा कि उसने आरोप-पत्र में कहा है कि ‘‘उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा चलाने लायक नहीं है।’’ 29 सितंबर 2008 को रमजान के दौरान मालेगांव में नमाज अदा कर निकल रहे लोगों के दोहरे बम धमाकों की चपेट में आ जाने से सात लोग मारे गए थे। मालेगांव धमाकों के मामले की छानबीन में कई उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। इस धमाके के लिए हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को जिम्मेदार माना जाता रहा है। इस मामले की शुरूआती जांच मुंबई एटीएस के संयुक्त आयुक्त हेमंत करकरे ने की थी। 26-11 के मुंबई आतंकवादी हमले में करकरे शहीद हो गए थे। साल 2011 में यह मामला एनआईए को सौंपे जाने से पहले एटीएस ने 16 लोगों पर मामला दर्ज किया था। लेकिन मुंबई की एक अदालत में 20 जनवरी 2009 और 21 अप्रैल 2011 को 14 आरोपियों के खिलाफ ही आरोप-पत्र दाखिल किए गए। पुरोहित और प्रज्ञा ने बंबई उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में कई अर्जियां दाखिल कर आरोप-पत्र और मकोका के तहत आरोप लगाए जाने को चुनौती दी थी। साध्वी के अलावा शिव नारायण कलसांगड़ा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा और धान सिंह चौधरी के खिलाफ दर्ज आरोप हटा दिए गए हैं।

Thursday, May 12, 2016

इरफान ने रिलीज किया ‘मदारी’ फिल्म का पहला पोस्टर


मुंबई। अभिनेता इरफान ने अपनी आने वाली सामाजिक-राजनीतिक फिल्म ‘मदारी’ का पहला आधिकारिक पोस्टर साझा किया। इस फिल्म का निर्देशन निशिकांत कामत ने किया है। पोस्टर में 49 वर्षीय अभिनेता का चेहरा गंभीर दिखाई दे रहा है। फिल्म की ‘टैग लाइन’ है ‘‘चुप रहिए.. देश सो रहा है’’। यह फिल्म कथित रूप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आधारित है। इसकी शूटिंग दिल्ली, राजस्थान, देहरादून, शिमला एवं मुंबई में की गई है।


इस फिल्म में जिमी शेरगिल भी भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म से अभिनेता नील नितिन मुकेश ने फिल्म निर्माता के रूप में शुरुआत की है। सिनेमाघरों में यह फिल्म 10 जून को दिखाई जाएगी।

हांगकांग में टी20 टूर्नामेंट खेलेंगे माइकल क्लार्क


हांगकांग। टी20 क्रिकेट में वापसी की कोशिश में जुटे आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क हांगकांग में टी20 क्रिकेट टूर्नामेंट खेलेंगे। क्लार्क 28 और 29 को होने वाले चार टीमों के इस टूर्नामेंट में खेलेंगे। आयोजकों की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा, ''मैं पहले कभी हांगकांग नहीं गया लेकिन इसके बारे में बहुत सुना है। मैं अपने साथी खिलाड़ियों से मिलने और यहां रहने का अनुभव पाने के लिये बेताब हूं।’’

पिछले साल अगस्त में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले क्लार्क 115 टेस्ट, 245 वनडे और 34 टी20 मैच खेल चुके हैं।