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Sunday, June 19, 2016

लुप्त हो रहे हैं कला प्रेमी बंगाली दर्शक: जॉय सेनगुप्ता


कोलकाता: जाने माने अभिनेता जॉय सेनगुप्ता को इस बात का अफसोस है कि बंगाली दर्शक सिर्फ भावनात्मक पृष्ठभूमि वाली फिल्मों तक की सिमट कर रह गए हैं। गोविंद निहलानी की ‘हजार चौरासी की मां’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके जॉय ने कोलकाता में बातचीत में कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि मध्य वर्गीय बंगाली दर्शक इस वर्ग की भावना को प्रदर्शित करने वाली भावनाओं से ओतप्रोत, बीते दिनों की याद दिलातीं और सिर्फ अच्छी अच्छी बातें करतीं खुशनुमा एहसास से भरी एक ही तरह की फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि बंगाली सिनेमा में किसी एक शैली की फिल्म की सफलता कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन ‘आशा जाओर माझे’ जैसी फिल्मों को आखिर दर्शक उसी तरह से क्यों नहीं स्वीकार रहे हैं। जॉय का मानना है कि बंगाली फिल्म उद्योग में बदलाव की बयार लाने वाली फिल्मों को अनदेखा किया जा रहा है।

प. बंगाल को कट्टरपंथियों के लिए पनाहगाह नहीं बनने दिया जाए: भाजपा


सिलीगुड़ी (प.बंगाल): भाजपा ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश से निकाले गए जमात जैसे कट्टरपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं को पश्चिम बंगाल में शरण मिल रही है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को देखना चाहिए कि राज्य इन तत्वों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बन जाए। पार्टी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘यह अधिवेशन मांग करता है कि पश्चिम बंगाल को आतंकवादी और कट्टरपंथी संगठनों के लिए पनाहगाह नहीं बनने देना चाहिए। धर्म के आधार पर तुष्टीकरण की राजनीति रकनी चाहिए।’’

पार्टी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश से निकले कट्टरपंथी जमात कार्यकर्ताओं को कुछ राजनीतिक दलों की वोट बैंक की राजनीति के लिए पश्चिम बंगाल में शरण मिल रही है। इसमें कहा गया, ‘‘खगरागढ़ और कालियाचक की घटनाएं उदाहरण हैं। हम इस धर्म आधारित अलगाववादी और हिंदू विरोधी राजनीति की निंदा करते हैं।’’ पार्टी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ चरमपंथी ताकतों द्वारा फैलाये जा रहे आतंकवाद को लेकर वहां की सरकार द्वारा उठाये कुछ सकारात्मक कदमों को समर्थन जताया। पार्टी ने कहा, ‘‘कट्टरपंथी संगठन जमात और उसका समर्थन करने वाले दलों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ आतंक फैला रखा है। यह बैठक इसकी कड़ी निंदा करती है।’’ प्रस्ताव में कहा गया कि जमात जैसे संगठनों को पूरी तरह समाप्त करना होगा और केवल दोषियों को दंडित करने से शांति नहीं लौटेगी। इसमें कहा गया, ‘‘बांग्लादेश में विश्वास और सुरक्षा का माहौल बनाना होगा।’’

भारत की प्रगति से उसके पड़ोसियों को लाभ होना चाहिए: मोदी


कोलंबो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाफना में श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के साथ संयुक्त रूप से एक स्टेडियम का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत का पूरी तरह मानना है कि उसकी आर्थिक प्रगति से पड़ोसियों को लाभ होना चाहिए। इस स्टेडियम का नवीनीकरण भारत की ओर से कराया गया है। भारत का उसके सहयोग के लिए धन्यवाद करते हुए सिरिसेना ने कहा कि कभी-कभार गलत समझ और व्याख्याएं हो सकती हैं, लेकिन श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने सिरिसेना के साथ दुरईअप्पा स्टेडियम का उद्घाटन किया। इस स्टेडियम का नाम जाफना के पूर्व मेयर दिवंगत अलफ्रेड थम्बीराजा दुरईअप्पा के नाम पर रखा गया है। यह स्टेडियम 1997 में अनुपयोगी हो गया था। अब भारत सरकार ने सात करोड़ रूपये की लागत से इस स्टेडियम का नवीनीकरण कराया है। इसे ‘ऐतिहासिक दिन’ करार देते हुए मोदी ने विश्वास दिलाया कि श्रीलंका के अपने नागरिकों के लिए प्रगति और समृद्धि का रास्ता तैयार करने के क्रम में भारत उसके साथ खड़ा रहेगा। इस मौके पर नयी दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए मोदी ने कहा, ‘‘भारत आर्थिक रूप से समृद्ध श्रीलंका देखने का इरादा रखता है। एक ऐसा श्रीलंका जहां पूरे देश में उसके लोगों के बीच एकता और अखंडता, शांति, सद्भाव, सुरक्षा और समान अवसर तथा स्वाभिमान हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंध दोनों सरकारों के दायरे तक सीमित नहीं हैं। वे हमारे इतिहास, संस्कृति, भाषा, कला और भूगोल के समृद्ध संपर्क रिपीट संपर्क से जुड़े हैं। भारत का यह पूरी तरह मानना है कि उसकी आर्थिक प्रगति से उसके पड़ोसियों को लाभ होना चाहिए।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि संचार के आधुनिक उपकरणों के कारण भारत के 125 करोड़ लोग और श्रीलंका की मित्रवत जनता ‘इस जश्न में शामिल हुई’ है।

मोदी ने कहा, ‘‘करीब 20 वर्षों के इंतजार के बाद एक बार फिर से आपके उत्साह और वाहवाही से दुरईअप्पा स्टेडियम की आत्मा जागृत हो जाएगी। यद्यपि हम वहां हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली में बैठे हैं, पर हम जाफना में जीवंतता की नब्ज और बदलाव के माहौल को महसूस कर सकते हैं।’’ इस नवीनीकृत स्टेडियम में बैठने की क्षमता 1850 की है। इससे जाफना में खेल को प्रोत्साहित करने और युवाओं के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘दुरईअप्पा स्टेडियम सिर्फ ईंट और गारे की बात नहीं है। यह आशावाद और आर्थिक विकास का प्रतीक है। जाफना के युवाओं के समृद्ध एवं स्वस्थ भविष्य का क्षेत्र है। यह हिंसा की विरासत को त्यागने और आर्थिक विकास की राह पकड़ने की आपकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।’’सिरिसेना ने श्रीलंका के विकास में सहयोग के लिए भारत सरकार का धन्यवाद किया। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं इस स्टेडियम को सुलह के केंद्र के तौर पर देखता हूं क्योंकि स्टेडियम में आप जाति, नस्ल, धर्म या किसी अंतर का अहसास नहीं करते। खेल और खेल के मैदान सुलह के प्रतीक होते हैं। यह सुलह का प्रतीक है।’’ मोदी ने कहा कि इस स्टेडियम का काम सफलतापूर्वक संपन्न होना इसका संकेत है कि श्रीलंका अतीत को पीछे छोड़ चुका है और समृद्ध भविष्य का वादा करते हुए दिख रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘दुरईअप्पा स्टेडियम हमारे सहयोग की भावना का द्योतक है। निश्चित तौर पर श्रीलंका के विकास के लिए भारत का सहयोग हमारी मित्रता का एक संकल्प है। यह आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी और आपकी जरूरतें ही इसका भरोसा है जिस पर आप निर्भर कर सकते हैं। यही हमारे वर्तमान और हमारे भविष्य के संदर्भ में हमारे संबंधों को प्रासंगिक बनाता है।''

मोदी और सिरिसेना नवीनीकृत स्टेडियम में पहले बड़े आयोजन..दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह के साक्षी बने जहां हजारों विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति सिरिसेना, उत्तरी प्रांत के मुख्यमंत्री सीवी विग्नेश्वरन और स्टेडियम में मौजूद अन्य शीर्ष श्रीलंकाई मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ ‘सूर्य नमस्कार’ किया। दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले मोदी ने कहा कि श्रीलंका ‘‘2014 में इस संदर्भ में लाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का सबसे पहले समर्थन करने वाले देशों में शामिल था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और आज, हमने जाफना, इस दुरईअप्पा स्टेडियम से आगाज के तौर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का शुभारंभ मनाया।’’ मोदी ने कहा कि इस समारोह के दौरान किया गया सूर्य नमस्कार विश्व को प्रकृति के साथ समग्र स्वास्थ्य, सौहर्दापूर्ण एवं सतत जीवन जीने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि दुरईअप्पा स्टेडियम ‘‘हमारी स्थाई मित्रता के एक और प्रतीक के रूप में’’ खड़ा होगा। अपने पिछले साल के जाफना दौरे को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ऐतिहासिक दिन था क्योंकि यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली जाफना यात्रा थी। श्रीलंकाई नेतृत्व की सराहना करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘मैं इस परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए आपके (सिरिसेना) अद्भुत नेतृत्व और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, गवर्नर तथा उत्तरी प्रांत के मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी करता हूं।''

Saturday, June 18, 2016

ऐतिहासिक दिन! भारतीय वायुसेना में पहली बार शामिल हुईं 3 महिला फाइटर पायलट

नई दिल्ली: आसमान में हिंदुस्तान की बेटियां शनिवार को इतिहास रच दिया है. देश की तीन अफसर बेटियां पहली बार वायुसेना में बतौर फाइटर प्लेन पायलट कमीशन हो गई हैं. भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि में राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार भी भागीदार बना है, क्योंकि मोहना सिंह, अवनी चतुर्वेदी और भावना कंठ इन्हीं राज्यों से ताल्लुक रखती हैं.
हैदराबाद के हकीमपेट में स्थि‍त एयर फ़ोर्स एकेडमी में शनिवार सुबह पासिंग आउट परेड की शुरुआत हुई. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर भी अकादमी पहुंचे. उन्होंने पासिंग आउट परेड का निरीक्षण किया. जिसके बाद देश के नभ को सुरक्षि‍त रखने का जिम्मा तीनों महिला पायलटों को सौंप दिया गया.
दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल से अध्ययन करने वाली मोहना सिंह के पिता भी भारतीय वायुसेना में हैं. जबकि भावना ने एमएस कॉलेज बेंगलुरु से बीई इलेक्ट्र‍िकल और अवनी चतुर्वेदी ने राजस्थान के टॉक जिले में वनस्थली विद्यापीठ से कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की है.
अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह ने मार्च में ही लड़ाकू विमान उड़ाने की योग्यता हासिल कर ली थी. इसके बाद उन्हें युद्धक विमान उड़ाने का गहन प्रशिक्षण दिया गया. यह पहला मौका होगा जब  भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान की कॉकपिट में कोई महिला बैठेगी. वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं. 1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का ऐलान किया गया था. अब इनकी एक साल की एडवांस ट्रेनिंग कर्नाटक के बीदर में होगी. भावना सिंह कहती हैं, 'मेरा बचपन का सपना था कि मैं लड़ाकू विमान की पायलट बनूं. जहां चाह होती है, वहां राह होती है. महिला और पुरुष में कोई अंतर नहीं होता है. दोनों में एक ही तरह की हुनर, क्षमता क्षमता होती है कोई भी खास अंतर नहीं होता है.
मोहना कहती हैं, 'मैं तो ट्रांसपोर्ट विमान उड़ाना चाहती थी, लेकिन मेरे ट्रेनर ने मुझे लड़ाकू विमान के लिए प्रेरित किया. लड़ाकू विमानों का करतब और उनकी तेजी की वजह से मैं यहां पर हूं.
अवनी का कहना है कि हर किसी का सपना होता है कि वो उड़ान भरें. अगर आप आसमान की ओर देखते हैं तो पंछी की तरह उड़ने का मन करता है. वह कहती हैं, 'आवाज की स्पीड में उड़ना एक सपना होता है और अगर ये मौका मिलता है तो एक सपना पूरे होने के सरीखा है.'

Thursday, June 16, 2016

व्हाइट हाउस में दलाई लामा से मिलेंगे बराक ओबामा


वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा चीन के विरोध को नजरअंदाज करते हुए व्हाइट हाउस में दलाई लामा से मुलाकात करेंगे। ओबामा के इस कदम के कारण निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता (रिपीट) आध्यात्मिक नेता को अलगाववादी मानने वाले चीन की त्योरियां चढ़ सकती हैं। राष्ट्रपति के मंगलवार को जारी कार्यक्रम के अनुसार ओबामा बुधवार सुबह व्हाइट हाउस में दलाई लामा से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात व्हाइट हाउस के ‘मैप रूप’ में होगी जिसमें प्रेस को आने की अनुमति नहीं होगी। तिब्बती आध्यात्मिक नेता इस समय अमेरिका की यात्रा पर हैं। तिब्बती आध्यात्मिक नेता जब कभी अमेरिकी राजधानी में होते हैं तो अमेरिका के राष्ट्रपति आम तौर पर उनसे मुलाकात करते हैं। इससे पूर्व व्हाइट हाउस ने कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति दलाई लामा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेता होने के कारण उनसे मुलाकात करते हैं। हालांकि अमेरिका का मानना है कि तिब्बत चीन का अभिन्न हिस्सा है लेकिन दलाई लामा की अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ हर मुलाकात बीजिंग को नाराज कर देती है। शीर्ष डेमोक्रेटिक नेता नैंसी पेलोसी ने कहा, ‘‘तिब्बतियों एवं विश्व भर के लोगों के लिए सम्मानजक होने के कारण परम पूजनीय हमें हमारी बड़ी जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं कि हम मानवाधिकारों की रक्षा करने, समानता को प्रोत्साहित करने एवं पर्यावरण की रक्षा करने के लिए काम करें।''


नैंसी ने कहा, ‘‘तिब्बत में तिब्बतियों की संख्या को कमजोर करने की चीन की हर प्रकार की कोशिश वास्तव में बहुत गलत होगी। बहुत सीधे स्पष्ट रूप से गलत होगी। फिर से, यह अंत:करण को चुनौती देना होगा।’’ उन्होंने ओबामा के दलाई लामा से मुलाकात करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता की अमेरिका के साथ मित्रता एवं अमेरिका में दोनों पार्टियों के नेताओं की ओर से उन्हें मिलने वाला सम्मान ‘‘तिब्बती स्वायत्ता के न्यायसंगत होने के प्रति हमारे दृढ़ सम्मान को दर्शाता है।’’ नैंसी ने कहा, ‘‘आजादी पसंद लोग यदि तिब्बत में दमन के खिलाफ बात नहीं करते हैं तो हमें विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।’’ सीनेटरों बॉब कॉर्कर एवं बेन कार्डिन ने दलाई लामा और तिब्बती सरकार के निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांग्ये से मुलाकात की।कॉर्कर ने कहा, ‘‘जब हमारा देश तेजी से अस्थिर एवं अनिश्चित बन रही दुनिया के साथ संघषर्रत है तो ऐसे में हमें उनका वह सार्वभौमिक संदेश प्रेरणा देता है जो हमारे अंदर गहराई से बसे कई मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।’’ कॉर्कर ने कहा कि उन्होंने अमेरिका और तिब्बत के लोगों के लिए महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा की। कॉर्डिन ने कहा, ‘‘मैं अमेरिका की विदेश नीति एवं हमारे विदेशी साझीदारों एवं सहयोगियों के कार्य में मूलभूत मानवाधिकारों की रक्षा करने एवं उन्हें ऊंचा उठाने की महत्ता पर बल देता रहा हूं, ऐसे में दलाई लामा मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत एवं मार्गदर्शक हैं।’’ नैंसी ने सदन में बोलते हुए दलाई लामा से मुलाकात करने के ओबामा के निर्णय का स्वागत किया।

आप विधायक मुद्दा: पासवान ने केजरीवाल पर तंज कसा


बेंगलूरू: आप के 21 विधायकों से संबंधित लाभ का पद मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चुटकी लेते हुए केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के सहयोगी रामविलास पासवान ने उन्हें ‘महान’ करार दिया, जो कुछ भी कर सकते हैं। पासवान ने कहा, ''केजरीवाल महान हैं। वह कुछ भी कर सकते हैं। वह 21 को 42 दिखा सकते हैं। हम सब मुख्यमंत्री के तौर पर उनके काम करने के तरीके से वाफिक हैं। उन्होंने इंडिया गेट पर धरना दिया था और प्रदर्शन के दौरान रेल भवन के पास रात गुजारी थी।’’

लाभ के पद के नियम से आप के 21 विधायकों को बचाने वाले एक विधयेक को राष्ट्रपति ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इससे बड़ा विवाद हो गया है और केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है जबकि भाजपा और कांग्रेस ने संबंधित विधायकों को तुरंत अयोग्य करार देने की मांग की है।फिलहाल चुनाव आयोग आप के 21 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिकाओं का अध्ययन कर रहा है।

अमेरिका ने अफगानिस्तान व पाक से शांति की अपील की


वाशिंगटन: अमेरिका ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान से अपील की है कि वे सीमा पार गोलीबारी के बाद पैदा हुए तनाव को कम करें। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, ‘‘मैं आपको बता सकता हूं कि हम सभी तनाव की स्थिति को बहुत नजदीक से देख रहे हैं। हम दोनों पक्षों के अधिकारियों के साथ संपर्क में हूं।’’ उनसे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए हालिया तनाव के बारे में पूछा गया था। सीमापार गोलीबारी में अफगान सीमा गार्ड का एक जवान मारा गया जबकि पाकिस्ततान के दो सैनिक और एक वरिष्ठ अधिकारी तथा नौ नागरिक घायल हो गए।

किर्बी ने कहा, ‘‘हम तनाव को खत्म करने के लिए शांति का आग्रह कर रहे हैं। हम निश्चित तौर पर झड़पें नहीं देखना चाहते। हम हिंसा नहीं देखना चाहते हैं। हम इससे खराब स्थिति नहीं देखना चाहते।’’ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि रिचर्ड ओलसन ने पिछले दिनों दोनों देशों का दौरा किया।

प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति अलासेन ने सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया


अबिदजन: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति अलासेन उवातारा ने कोत दिव्वार का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया। प्रणब यहां अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का यहां हवाई अड्डे पर शानदार स्वागत किया गया। प्रणब मुखर्जी मंगलवार शाम को वहां के राष्ट्रपति उवातारा की ओर से राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुए जहां उन्हें ग्रांड क्रास नेशनल आर्डर आफ द रिपब्लिक आफ कोत दिव्वार प्रदान किया गया। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव वेणु राजमणि ने कहा कि यह प्रणब मुखर्जी को प्रदान किया गया ऐसा पहला सम्मान है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुखर्जी को कई तरह की मानद उपाधि प्राप्त हुई है। पर यह किसी देश द्वारा दिया गया ऐसा पहला सम्मान है। भोज में अपने संबोधन में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि ऐसा सही समझा जाता है कि भारत और कोत दिव्वार के बीच सद्भावना दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी की मोहताज नहीं है और दीर्घकालीन मित्रता और फलदायक सहयोग ने इस दूरी को अप्रासंगिक बना दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘महोदय, मैं नेशनल आर्डर आफ द रिपब्लिक आफ कोत दिव्वार प्रदान करने के आपके भाव से काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसे हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच दीर्घकालीन आपसी मित्रता के प्रतीक के तौर पर देखता हूं।''

दक्षिण अफ्रीका में मोदी का भव्य स्वागत करेंगे भारतीय


जोहानिसबर्ग: प्रवासी भारतीयों और दक्षिण अफ्रीकी भारतीय वंशजों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांस्कृतिक समूहों ने अगले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा के दौरान उनका भव्य स्वागत करने की योजना बनाई है। एसएवेलकम्समोदी समिति द्वारा आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम के तहत भारतीय और अफ्रीकी नृत्य व संगीत का एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित जाएगा। इस समिति द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, ''यह यात्रा दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच खास रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ बनेगी।’’

यह पहली बार है जब एक भारतीय प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। बयान में कहा गया है, ''दक्षिण अफ्रीका का भारत के साथ यह गहरा रिश्ता पांच पीढ़ियों से अधिक पुराना है और यह तब से है जब दो वैश्विक हस्तियों- महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला ने स्वतंत्रता एवं लोकतंत्र के नए आदशरें का जन्म दिया।’’ ''गांधी जी ने एक दशक पहले अंग्रेजों की भेदभाव की दमनकारी नीति के खिलाफ अपना सत्याग्रह अभियान दक्षिण अफ्रीका में शुरू किया और इसे भारत लेकर गए जिससे देश को आजादी मिली। मंडेला ने यह बात स्वीकार की थी कि कैसे गांधी के विचारों का उनके ऊपर प्रभाव पड़ा और दशकों बाद दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना हुई।''

Sunday, June 12, 2016

सड़कों पर बने सभी धार्मिक स्थलों को हटाया जाए: कोर्ट


लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि सार्वजनिक मार्गों पर और इनके किनारे बने धार्मिक ढांचों को हटाया जाए। उसने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि राजमार्गों, सड़कों, पैदल पथों और लेन सहित कई सभी सार्वजनिक मार्गों पर किसी धार्मिक ढांचे की इजाजत नहीं होगी तथा किसी तरह का उल्लंघन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की ओर से अदालती अवमानना किया जाना माना जाएगा।

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की लखनऊ पीठ ने कहा कि जनवरी, 2011 के बाद सार्वजनिक मार्गों पर बने धार्मिक ढांचों को हटाया जाएगा और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की ओर से दो महीने के भीतर राज्य सरकार को अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी। जो धार्मिक ढांचे इससे पहले बनाए गए हैं उनको किसी निजी भूखंड पर स्थानांतरित किया जाएगा अथवा छह महीने के भीतर हटाया जाएगा। उसने शुक्रवार को एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश पारित किया। लखनऊ के मोहल्ला डौडा खेड़ा में सरकारी जमीन पर मंदिर का निर्माण करके कथित तौर पर अतिक्रमण किए जाने के खिलाफ 19 स्थानीय लोगों ने यह रिट याचिका दायर की थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि हर नागरिक के पास स्वतंत्र आवाजाही का मौलिक अधिकार है और उल्लंघन करने वाले कुछ लोगों और सरकारी प्रशासन की उदासीनता की वजह से इसके हनन की इजाजत नहीं दी जा सकती। उसने राज्य सरकार से एक योजना तैयार करने के लिए कहा ताकि धार्मिक गतिविधियों की वजह से सार्वजनिक सड़कों का अवरूद्ध नहीं होना सुनिश्चित हो सके। अदालत ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव से कहा कि वह इस आदेश के संदर्भ में सभी जिला अधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और दूसरे संबंधित अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करें।