एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य!


भारत की राजधानी दिल्ली में 9 और 10 दिसंबर 2023 को विश्व स्तरीय यानी कि वर्ल्ड क्लास 18 वां जी-20 सम्मेलन होने जा रहा है। जानकारी देना चाहूंगा कि ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (जी-20) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। यह सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर वैश्विक संरचना और अधिशासन निर्धारित करने तथा उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।भारत 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी-20 की अध्यक्षता करेगा। उल्लेखनीय है कि जी-20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। 

हाल फिलहाल जानकारी देना चाहूंगा कि जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सहित विश्व के कई बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष लगभग 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली पहुंचेंगे।चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग आ रहे हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों और पुतिन की जगह विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रहे हैं। हालांकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसमें शामिल नहीं होंगे। इस सम्मेलन में बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष ही नहीं अपितु बहुत से देशों के शासनाध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों के साथ-साथ आमंत्रित सदस्य भी हिस्सा लेंगे। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि जी-20 वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत से अधिक और वैश्विक जनसंख्या का लगभग दो तिहाई प्रतिनिधित्व करने वाले देशों का संगठन है। यह 19 देशों और यूरोपीय संघ से मिलकर बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (जी-20) में 19 देश (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं।

जानकारी देना चाहूंगा कि भारत इस समय जी-20 का अध्यक्ष है। दूसरे शब्दों में हम यह बात कह सकते हैं कि वर्तमान में इसके चेयरमैन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। जानकारी देना चाहूंगा कि जी-20 पहले वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों का संगठन था। इसका गठन एशिया में आए वित्तीय संकट के बाद हुआ। इसका पहला सम्मेलन 1999 के दिसंबर महीने में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हुआ। दुनिया भर में 2008 में आई मंदी के बाद जी-20 को शीर्ष नेताओं के संगठन में बदल दिया गया था। बहरहाल, जी-G20 का लोगो और थीम की यदि हम बात करें तो जी -20 का लोगो राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों- केसरिया, सफेद और हरे और नीले रंग से प्रेरणा लेता है। यह पृथ्वी ग्रह को भारत के राष्ट्रीय फूल कमल से जोड़ता है, जो चुनौतियों के बीच विकास को दर्शाता है। जी-20 लोगो के नीचे देवनागरी लिपि में 'भारत' लिखा हुआ है। जी-20 की थीम वसुधैव कुटुंबकम या एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य है।बहरहाल,चूंकि इस सम्मेलन में बड़े बड़े राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष हमारे देश में पहुंच रहे हैं तो इसे देखते हुए पूरी दिल्ली हाई अलर्ट पर होगी। 

बताया जा रहा है इस सम्मेलन हेतु सुरक्षा के लिए तकरीबन 1.30 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा।दिल्ली में आयोजित होने जा रहे इस जी-20 बड़े ग्लोबल इवेंट के मामले में सरकार द्वारा शानदार व्यवस्थाएं की जा रही हैं।हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस मुख्य रूप से प्रमुख नोडल एजेंसी है,  लेकिन बताया जा रहा है और सभी अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी सुरक्षा में तैनात किया गया है। मीडिया के हवाले से बताया जा रहा है कि सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के रक्षकों की पचास टीमें तैयार की गई हैं जिसमें लगभग 1000 जवान शामिल होंगे। इसके अलावा 300 बुलेटप्रुफ वाहनों को भी तैयार किया जा रहा है। यह भी जानकारी मिल रही है कि इस सम्मेलन के दौरान ट्रैफिक पुलिस नई ड्रैस में नजर आएगी। बताया जा रहा है कि यह शिखर सम्मेलन दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है जिस पर 2700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 

इतना ही नहीं, दिल्ली को सुंदर बनाने के लिए भी लगभग 4064 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा, यह भी बताया जा रहा है और मेहमानों के लिए आठ देशों से 1 लाख फलदार पौधे मंगवाकर सौंदर्य बढ़ाया गया है। सवा सौ फव्वारे व 70 बड़ी मूर्तियां लगाई गई हैं। एयरपोर्ट से प्रगति मैदान की सड़कों पर सुंदरता दिखाने के लिए 22 करोड़ की धनराशि खर्च की गई हैं। इस संबंध में गौरतलब है कि जी 20 शिखर सम्मेलन को देखते हुए एमसीडी ने महिपालपुर चौराहा, शहीदी पार्क और पीवीआर अनुपम बाजार को चमकाने का काम किया है। इसके साथ ही भीकाजी कामा प्लेस, सफदरजंग, नौरोज नगर और साउथ एक्सटेंशन जैसे प्रमुख फ्लाईओवरों के साथ सबवे, फुट ओवर ब्रिज और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ने वाले सड़कों का भी सौदर्यीकरण किया गया है। इन क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों को प्रदर्शित करने वाली थीम आधारित पेंटिंग प्रमुखता से प्रदर्शित की गई है।

राष्ट्राध्यक्षों के लिए थ्री लेयर सेक्युरिटी(तीन परत सुरक्षा ) होगी और शिखर सम्मेलन की जगह पर 4 हजार जवान सादी वर्दी में तैनात रहेंगे। बहरहाल यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इन देशों का महत्व यह है कि दुनिया की कुल आबादी में 60 प्रतिशत, कुल जी.डी.पी. में 80 प्रतिशत और कुल व्यापार में 75 प्रतिशत के प्रतिनिधि ये देश हैं। यदि ये सभी देश एक साथ मिलकर साथ चलने का फैसला कर लेते हैं तो दुनिया की आर्थिकता का रुख बदला जा सकता है। इस इवेंट का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में हो रहा है। इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी संख्या में बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष और 14 अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख एक साथ भारत में नहीं आए हैं। बहरहाल कहना ग़लत नहीं होगा कि जी-20 शिखर सम्मेलन को भारत और चीन के तनावपूर्ण संबंधों के बीच आयोजित किया जा रहा है। हाल ही में चीन ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना हिस्सा बताते हुए एक मानचित्र जारी किया था। इसके अलावा, बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी फोकस रहेगा। इस युद्ध के चलते भारत के रिश्ते भी पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण हैं।

(आर्टिकल का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।)

- सुनील कुमार महला

(फ्रीलांस राइटर,कालमिस्ट व युवा साहित्यकार)

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