झारखंड की स्वास्थ्य सेवा का सूरत-ए-हाल, नहीं मिला एम्बुलेंस तो मरीज को खाट पर पहुंचाया अस्पताल


झारखंड के सबसे पिछड़े इलाके संताल में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवा का असल चेहरा सामने आया है। विज्ञापनों में तत्पर दिखने वाली 108 एंबुलेंस सेवा की जमीनी हकीकत की तस्वीर रविवार को पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड में दिखी। 108 नंबर पर बार-बार डायल किया गया। एंबुलेंस जब नहीं पहुंचा तो परिजन खाट पर मरीज को रख सरकारी अस्पताल की तरफ निकल पड़े। करीब पांच किलोमीटर पैदल सफर करने के बाद मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे।

झारखंड सरकार की एंबुलेंस सेवा का लाभ समय पर लिट्टीपाड़ा के ग्रामीणों को नहीं  मिल रहा है। इसके कारण ग्रामीण मरीज को इलाज के लिए खटिया पर अस्पताल ले जाने को विवश हैं। वह भी तब जब सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संताल परगना क्षेत्र से ही आते हैं। उनकी पार्टी झामुमो का जनाधार संताल में ही है। यहां की स्वास्थ्य सेवा पर किसी का ध्यान नहीं है।

देश के सबसे निचले पायदान पर खड़ा लिट्टीपाड़ा प्रखंड के लिए ये कोई नई बात नहीं है। मरीजों को खाट पर अस्पताल ले जाने के मामले यहां आए दिन सुनने और देखने को मिलते हैं । रविवार को  प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा नवाडीह पंचायत के जोरडीहा गांव के 50 साल के बीमार टुयलो मुर्मू  को एम्बुलेंस के आभाव में उनके दो सगे संबंधियों ने खटिया से टांग कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लिट्टीपाड़ा पहुंचे । टुयलो मुर्मू की पत्नी सीता हेंब्रम ने बताई कि मेरे पति कई दिनों से बीमार रहने के काफी कमजोर हो गए हैं। जिससे वे चलने में असमर्थ हो गए। अस्पताल लाने हेतु 108 एम्बुलेंस को फोन किया गया पर, एम्बुलेंस नहीं आने के कारण ग्रामीणों के सहयोग से खटिया के सहारे उसे अस्पताल लाया गया ।

डॉ अरविंद कुशल एक्का ने बताया  पीड़ित टुयलो मुर्मू को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। कमजोरी के कारण शरीर काफी दुर्बल हो गया था। अस्पताल में बेहतर तरीके से इलाज किया जा रहा है। एम्बुलेंस नहीं मिलने के संबंध उन्होंने कुछ भी नहीं बताया।

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