जेल से बाहर आएंगे आनंद मोहन, उपचुनाव में क्या महागठबंधन को मिलेगा फायदा

पटना : पूर्व सांसद आनंद मोहन आज जेल से बाहर आएंगे. गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णय्या हत्याकांड मामले में फिलहाल उम्र कैद की सजा काट रहे हैं और आज उनके जेल से बाहर आने की खबर सामने आ रही है. दरअसल आनंद मोहन को 15 दिनों के पैरोल पर बाहर आने की अनुमति मिली है. आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और उनके बेटे चेतन आनंद फिलहाल आरजेडी में है. चेतन आनंद आरजेडी के विधायक हैं. आनंद मोहन लंबे अरसे से जेल में बंद है और उनको रिहा करने की मांग समर्थकों की तरफ से लगातार उठती रही है. आनंद मोहन की रिहाई ऐसे वक्त में हो रही है जब बिहार की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं


राजपूत बिरादरी से आने वाले आनंद मोहन को लेकर उनके समर्थक लंबे अरसे से रिहाई की मांग करते रहे हैं. उनका कहना है कि आनंद मोहन राजनीतिक द्वेष के शिकार रहे हैं. उनके खिलाफ मामला खत्म होना चाहिए और उनकी रिहाई होनी चाहिए. आपको बता दें कि साल 1994 में मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन उस प्रोसेशन में शामिल थे, जिसमें छोटन शुक्ला की शव यात्रा निकाली गई थी. इस यात्रा के दौरान गोपालगंज के तत्कालीन डीएम की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में दोषी करार दिए गए और उन्हें उम्र कैद की सजा हुई. इसको लेकर नीतीश कुमार के ऊपर भी उनके समर्थक आरोप लगाते रहे कि वे नहीं चाहते हैं कि आनंद मोहन जेल से बाहर आए, लेकिन बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद इस बात की उम्मीद बढ़ी. इस सब के बावजूद फिलहाल वे केवल पैरोल पर ही बाहर आ रहे हैं. उनके जेल से बाहर आने की खबर को लेकर उनके समर्थकों के बीच उत्साह है. चर्चा यह भी है कि जेडीयू के एक एमएलसी जो राजपूत जाति से आते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस बाबत आग्रह भी किया था खुद तेजस्वी यादव भी चाहते हैं कि उनके विधायक के पिता आनंद मोहन को लेकर नरमी बरती जाए, लेकिन आनंद मोहन की पैरोल पर रिहाई की टाइमिंग को लेकर सियासी जानकार की राय अलग है.

सियासी जानकार मानते हैं कि गोपालगंज और मोकामा विधानसभा उपचुनाव के बीच आनंद मोहन की रिहाई महागठबंधन के लिए एक बड़ा ट्रम्कार्ड हो सकता है. राजपूत जाति के वोटर फिलहाल महागठबंधन से ज्यादा बीजेपी की तरफ झुकाव देखे जा रहे हैं. ऐसे में गोपालगंज सीट और मोकामा में भी आनंद मोहन की रिहाई से एक बड़ा मैसेज जा सकता है. आनंद मोहन को पैरोल मिलने की खबर का कितना असर हो पाता है और उपचुनाव में महागठबंधन को इसका क्या फायदा मिल पाता है यह तो नतीजे बताएंगे, लेकिन फिलहाल आनंद मोहन के समर्थकों और उनके परिवार के लिए इससे अच्छी खबर हो नहीं सकती कि पूर्व सांसद 15 दिनों तक जेल से बाहर रहेंगे.