राष्‍ट्रपति कोविंद आज प्रेसीडेंशियल ट्रेन से करेंगे सफर, 18 साल बाद इंडियन प्रेसीडेंट कर रहे इसमें यात्रा, जानें इस स्‍पेशल ट्रेन की खासियत


आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रेसीडेंशियल ट्रेन से कानपुर पहुंचेंगे। जहां राष्ट्रपति का स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। जिसके बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल सर्किट हाउस जाएंगे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ। पहली बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिन के प्रवास पर कानपुर आ रहे है। इस दौरान वो अपने पैतृक गांव परौंख भी जाएंगे।

प्रेसीडेंशियल ट्रेन कानपुर आते समय 15-15 मिनट के लिए उनके गृह जनपद के झींझक और रूरा रेलवे स्टेशनों पर भी रुकेगी। राष्ट्रपति 27 जून को अपने पैतृक गांव परौंख जाएंगे, जहां वह परिवार, दोस्तों और ग्रामीणों से मिलेंगे। 29 जून को राष्ट्रपति कोविंद दिल्ली के लिए रवाना हों जाएंगे।

18 साल बाद ऐसा मौका आया है जब प्रेसीडेंशियल ट्रेन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले इस ट्रेन का इस्तेमाल 2006 में किया गया था। तब भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम दिल्ली से देहरादून गए थे। अब्दुल कलाम इंडियन मिलिट्री अकेडमी में सेना के पासिंग आउट परेड में शामिल होने गए थे। प्रेसीडेंशियल ट्रेन का इस्तेमाल 87 बार किया जा चुका है।

इस बार प्रेसीडेंशियल ट्रेन में महाराजा एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे भी होंगे। महाराजा एक्सप्रेस भारतीय रेल मंत्रालय की लक्जरी टूरिस्ट ट्रेन है। महाराजा एक्सप्रेस अक्टूबर से मार्च तक चलती है। इसलिए इस ट्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही इस ट्रेन में कुछ और भी डिब्बे जोड़े जाएंगे। ट्रेन को राजसी सफर नाम से भी जाना जाता है। जो किेसी पांच सितारा होटर से कम नहीं है।

पहली बार इस ट्रेन का सफर सन् 1950 मे दिल्ली से कुरुक्षेत्र जाने के लिए भारत के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने किेया था। राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी ने 1997 में इस ट्रेन का इस्तेमाल किया था। उसके बाद राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने 26 साल बाद इस ट्रेन से सफर किया। राष्ट्रपति के इस ट्रेन को प्रेसीडेंशियल सैलून भी कहा जाता है।

प्रेसीडेंशियल सैलून आधुनिक सुविधावों से लैस है। इस सैलून में बुलेट प्रूफ विंडो, जीपीआरएस, सेटेलाइट बेस्ट कम्युनिकेशन सिस्टम, इंटरनेट के लिए वाई-फाई की सुविधा, कांफ्रेंस रूम आदि की भी सुविधाएं हैं।