भारतीय दवाओं की दुनियाभर में बढ़ रही मांग, मार्च का निर्यात आंकड़ा पूरे वित्त वर्ष के सभी महीनों में सर्वाधिक


देश से औषधियों का निर्यात पिछले वित्त वर्ष (2020-21) में 18 फीसद बढ़कर 24.44 अरब डॉलर यानी लगभग 1.76 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। उससे पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 20.58 अरब डॉलर (करीब 1.48 लाख करोड़ रुपये) मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था। भारतीय औषधि निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) के महानिदेशक उदय भास्कर ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस वर्ष मार्च में देश का फार्मा निर्यात 2.3 अरब डॉलर यानी लगभग 16,560 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा। बीते वित्त वर्ष के किसी भी महीने का यह सबसे अधिक निर्यात आंकड़ा है। परिषद के मुताबिक मार्च के आंकड़े प्रारंभिक हैं।

इस वर्ष मार्च के फार्मा निर्यात की विकास दर पिछले वर्ष समान महीने के मुकाबले 48.5 फीसद अधिक रही। मार्च, 2020 में फार्मा निर्यात 1.54 अरब डॉलर रहा था। यह विकास दर तब है जब दुनियाभर के फार्मा बाजार में गिरावट देखी गई है। उदय भास्कर के अपने बयान में कहा कि पिछले वर्ष मार्च में लॉकडाउन लागू होने से निर्यात पर असर पड़ा था। पिछले वर्ष वैश्विक औषधि बाजार में दो फीसद तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत वर्ष के दौरान भारत से औषधियों की मांग में तेज उछाल दिखा। इसकी मुख्य वजह यह थी कि भारत की दवाओं की गुणवत्ता और इनके मूल्य की व्यावहारिकता दुनियाभर के ग्राहकों के लिए बेहतर रही।

भास्कर ने बताया कि भारत से वैक्सीन के निर्यात में अच्छी वृद्धि होने की संभावना दिख रही है। इसी तरह भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआइ योजना से औषधि क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात बढ़ेगा। भारत की औषधियों के लिए निर्यात का सबसे बड़ा बाजार उत्तर अमेरिका है, जिसकी बीते वित्त वर्ष के दौरान हिस्सेदारी 34 फीसद रही। दक्षिण अफ्रीकी बाजारों में भारतीय दवाओं का निर्यात 28 फीसद और यूरोपीय बाजारों में 11 फीसद की दर से बढ़ा।

जहां तक देशों का सवाल है, तो निर्यात में सबसे ज्यादा 30 फीसद बढ़ोतरी कनाडा के बाजार में दर्ज की गई। मैक्सिको ने एक वर्ष पहले के मुकाबले बीते वित्त वर्ष के दौरान भारत से 21.4 फीसद अधिक दवाओं का आयात किया। वहीं, अमेरिका को भारत ने बीते वित्त वर्ष में एक वर्ष पहले के मुकाबले 12.6 फीसद अधिक दवाओं का निर्यात किया।