मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों को लेकर कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन में फंसा पेंच

बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भले ही माकपा नीत वाममोर्चा और कांग्रेस के बीच 193 सीटों पर समझौता हो गया हो, लेकिन मुर्शिदाबाद की 22 सीटों को लेकर दोनों के गठबंधन में पेंच फंस गया है। खबर है कि कांग्रेस का गढ़ रहे मुर्शिदाबाद की पार्टी इकाई जिले की 22 में चार से अधिक सीटें वाममोर्चा को देने को तैयार नहीं है और वामपंथी दल चार पर राजी नहीं हो रहे हैं। 

वाममोर्चा का कहना है कि उन्हें कम से कम 6 सीटें चाहिए। क्योंकि माकपा यहां 4 और सहयोगी दलों दो सीटों पर लड़ेगी। लेकिन कांग्रेस चार से अधिक सीटें देने को राजी नहीं है। खबर है कि कांग्रेस जलंगी, डोमकल, भगवानगोला और नवग्राम विधानसभा सीटें वाममोर्चा के लिए छोड़ने को तैयार है। परंतु, वाम नेतृत्व का कहना है कि उक्ता चार सीटों के अलावे भरतपुर और रघुनाथगंज भी उन्हें चाहिए।

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वाममोर्चा के बीच गठबंधन हुआ था, लेकिन मुर्शिदाबाद की भरतपुर और रघुनाथगंज सीट पर दोस्ताना मुकाबला हुआ था। इस बार ऐसी नौबत न आए, इसलिए दोनों पक्ष सीट बंटवारे को लेकर सतर्क है।

कांग्रेस पहले से ही अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व में हर ब्लॉक में जुलूस और रैलियां करके अपनी ताकत दिखा चुका है। उन्होंने कांग्रेस में नई ऊर्जा डालने की कोशिश की है। कुछ दिनों पहले इस बाबत वरिष्ठ माकपा नेता रामचंद्र डोम ने पार्टी की जिला समिति के साथ चर्चा की थी। जिसके बाद रामचंद्र ने कहा था कि राज्य नेतृत्व पूरी जानकारी दी गई है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने कहा कि गठबंधन के बारे में अभी भी बातचीत चल रही है। सही समय पर जानकारी मिल जाएगी।

दूसरी ओर तृणमूल जिला अध्यक्ष अबु ताहेर का कहना है कि वाम-कांग्रेस गठबंधन को लेकर वे चिंतित नहीं हैं। तृणमूल यहां हर सीट पर जीतेगी। उधर भाजपा जिला अध्यक्ष गौरी शंकर घोष ने कहा कि मुर्शिदाबाद में हमारा मजबूत संगठन है। पूरे राज्य में हम जिस तरह से चुनाव लड़ेंगे, उसी तरह से यहां भी लड़ेंगे। 2016 के विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद की 22 में से कांग्रेस को 14, वाममोर्चा को 4 और तृणमूल को 4 सीटे मिली थी। परंतु,कांग्रेस व वाममोर्चा के आधे से अधिक विधायक तृणमूल में शामिल हो गए।

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