GST फर्जीवाड़े और फर्जी बिलिंग पर सरकार सख्त, बढ़ सकता है ई-बिल का दायरा

जीएसटी फर्जीवाड़े और फर्जी बिलिंग पर रोक के लिए सरकार की सख्ती बढ़ती जा रही है। इस दिशा में सरकार ई-बिल या ई-इनवॉयसिंग के दायरे को बढ़ा सकती है। कारोबारियों पर पूरी निगाह रखने के लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) का इस्तेमाल भी बढ़ाने जा रही है। इस वर्ष पहली जनवरी से 100 करोड़ से अधिक के कारोबार करने वालों के लिए ई-बिल अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार इस सीमा को घटा सकती है, ताकि अधिक से अधिक कारोबारियों को ई-बिल के दायरे में लाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस सीमा को 50 करोड़ तक कर सकती है। नए वित्त वर्ष में इसे लागू करने के लिए घोषणा की जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक धीरे-धीरे इस सीमा को पांच करोड़ तक लाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से जीएसटी बिल में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।

सोमवार को भी अप्रत्यक्ष कर के अधिकारियों ने 82 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) फर्जीवाड़े के मामले में पूर्वी दिल्ली से अरविंद कुमार नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसने 541 करोड़ के फर्जी बिल जेनरेट किए थे।

ई-बिल का फायदा यह है कि इसे 24 घंटे के अंदर में ही रद्द किया जा सकता है। ई-बिल को पिछली तारीख में जनरेट नहीं जा सकता है और एक बार बिल जनरेट हो जाने पर उसकी राशि भी कम नहीं की जा सकती। सामान्य बिल को पिछली तारीख में जनरेट किया जा सकता है और उसकी राशि भी कम की जा सकती है।

सीबीआइसी सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी फर्जीवाड़े पर रोक के लिए अभी और सख्ती बढ़ाई जाएगी। इसके तहत ही हाल ही में प्रतिमाह 50 लाख से अधिक के कारोबार पर एक फीसद जीएसटी नकद में देने का नियम लागू किया गया है। सूत्रों के मुताबिक फर्जीवाड़ा करने वाले कारोबारियों को गिरफ्तार करने का पूरा दबाव है।

वैसे भी जीएसटी कानून में पांच करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े में लिप्त कारोबारी को गिरफ्तार करने का प्रविधान है। पिछले दो महीनों से जीएसटी फर्जीवाड़े के खिलाफ जो अभियान चलाया जा रहा है उसका फायदा सरकार को दिखने लगा है। दिसंबर महीने में 1.15 लाख करोड़ का जीएसटी कलेक्शन रहा जो आगे भी कायम रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अभी आयकर रिटर्न से जीएसटी रिटर्न को जोड़ने से जीएसटी चोरी पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक एआइ के इस्तेमाल से जीएसटी में पंजीकृत कारोबारियों की सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

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