सरकार और किसानों के बीच आज 7वें राउंड की बातचीत, समाधान की उम्मीद


केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक महीने से अधिक समय से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संघों के नेताओं और सरकार के बीच आज अगले दौर की बातचीत होगी। यह दोनों पक्षों के बीच सातवें दौर की वार्ता होगी।केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने उम्मीद जताई है कि इस बातचीत से समाधान निकल जाएगा और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जल्द समाप्त होगा।

अब तक केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीच छह दौर की वार्ता हो चुकी है। हालांकि, कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीत जारी गतिरोध अबी तक समाप्त नहीं हो सका है। किसान संगठन सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को लगातार निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार का कहाना है कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। वहीं किसान संगठनों को डर है कि नए कानूनों से एमएसपी और मंडी की व्यवस्था कमजोर होगी।

30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों और केंद्र सरकार के बीच चार मुद्दों में से दो पर सहमति बन गई थी। दोनों पक्षों में प्रस्तावित बिजली कानून, पराली जलाने से संबंधित मुद्दों पर सहमति बनी। हालांकि, गतिरोध दो मुख्य मांगों पर अभी भी जारी है। वहीं, 2 जनवरी को लगभग 40 किसान संगठनों ने धमकी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान अपने ट्रैक्टर, ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के साथ 26 जनवरी को दिल्ली में मार्च करेंगे।

दूसरी तरफ आंदोलन के दौरान सोनीपत के सिंघु और बहादुरगढ़ (झज्जर) के टीकरी बार्डर पर रविवार को चार किसानों की जान चली गई। दोनों धरनास्थल पर दो-दो किसानों की जान गई है। इनमें से दो हरियाणा और दो पंजाब के निवासी थे। सिंघु बार्डर पर जिन दो किसानों की जान गई है, उनमें से एक सोनीपत के गांव गंगाना का 52 वर्षीय कुलबीर था और दूसरा पंजाब के संगरूर के गांव लिद्दड़ान का रहना वाला 45 वर्षीय शमशेर था। इन दोनों की मौत का कारण भी सर्दी से हार्ट अटैक बताया जा रहा है।


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