बढ़ती कीमत के चलते बंगाल में अब सड़े-कटे आलू की मांग में भारी वृद्धि


कोरोना महामारी के समय में बंगाल में जिस प्रकार आलू की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, इसके कारण यहां कई जगह लोग अब सड़ा- कटा आलू खरीदने को मजबूर हैं। हुगली जिले के सिंगुर तथा इसके आसपास के अंचल में रहने वाले साधारण लोग कम दाम में कटे हुए आलू खरीदकर ही अपनी सब्जी में शामिल करना शुरू कर दिया है। लिहाजा खुदरा बाजार में कटे हुए आलू की खरीदारी इन दिनों खूब हो रही है।

सिंगुर के थोक आलू व्यवसायियों का कहना है कि इन दिनों कटे हुए आलू की बिक्री काफी हो रही है। मालूम हो कि हुगली जिले के विभिन्न इलाके के कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू को व्यवसायी सिंगुर के रतनपुर मोड़ स्थित आलू के थोक बाज़ार में बेचने के लिए लाते हैं। कोल्ड स्टोरेज में रखे जो आलू सड़- गल जाता है, आलू बेचने वाले उसके खराब हिस्से को काटकर निकाल दे रहे हैं और उसी आलू को दो भागों में काट कर कम दामों पर बाज़ारों में बेच रहे हैं।

आलू विक्रेताओं का कहना है कि प्रति किलोग्राम आलू की कीमत बढ़ने के कारण दैनिक मजदूरी करने वाले लोग कटे हुए आलू की खरीदारी कर रहे हैं।दरअसल, हुगली जिले में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। रतनपुर थोक आलू बाजार से राज्य के विभिन्न जिले तथा अन्य राज्यों में आलू की आपूर्ति की जाती है। आलू के थोक व्यवसायी समीर धर का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार आलू की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, इसके चलते कोरोना संकट के समय साधारण लोगों को आलू की खरीदारी करने में दिक्कतें हो रही है। इसके कारण सिंगुर तथा इसके आस पास के इलाके में रहने वाले लोग कटा हुआ आलू खरीदने पर मजबूर हैं।

देखा जा रहा है कि इन दिनों सब्जी मंडियों में प्रति किलो आलू की कीमत 33 से 35 रुपये है। बताया गया कि होटल व्यवसायी भी कटा हुआ आलू का इस्तेमाल कर रहे हैं। 50 किलो फ्रेश आलू के बोरे का दाम जहां 1350 से 1400 रुपये है, वहीं कटा हुआ आलू के बोरे की कीमत करीब एक हजार रुपये पड़ रहा है। ऐसे में इसी से ज्यादातर लोग काम चला रहे हैं।

बताते चलें कि आलू की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पिछले दिनों खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वरिष्ठ अधिकारियों को इसपर कड़ी नजर रखे का निर्देश दिया था। इसके बाद भी आलू की कीमतें कम नहीं हो रही है। 

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