सीबीएसई बोर्ड की एग्जाम फीस माफ करने की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए ये निर्देश


सीबीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं के 30 लाख बच्चों की एग्जाम फीस माफ कराने से जुड़ी जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को 2 हफ्ते में विचार करने के निर्देश दिए हैं. देशभर में सीबीएसई की एग्जाम फीस को माफ करने को लेकर लगाई गई जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रिप्रेजेंटेशन के तौर पर लेने के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं.

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस याचिका पर 2 हफ्ते में कोई फैसला ले ले. सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एग्जाम फीस को जमा करने की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर तय की गई है. दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में इस याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सोशल जुरिस्ट की तरफ़ से पेश हुए वकील अशोक अग्रवाल ने कहा के प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा रहे अभिभावकों की स्थिति इतनी खराब है कि वो बच्चों की फ़ीस भरने में भी असमर्थ हैं. 

दिल्ली सरकार ने रखी ये दलील

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट से कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से तकरीबन 100 करोड़ रुपये की राशि मांगी है ताकि इन छात्रों की एग्जाम फीस को माफ किया जा सके. लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से अभी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है. दिल्ली में प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं की कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या तीन लाख के आसपास है.  


इस याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि 10वीं और 12वीं के छात्रों की सत्र 2020-21 की एग्जाम फीस को माफ कर दिया जाए. याचिका में कहा गया है कि कोरोना महामारी और उसके बाद में लॉकडाउन के चलते ज्यादातर अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब है. लेकिन उसके बावजूद सीबीएसई ने एग्जाम फीस को तीन गुना बढ़ा दिया है.

याचिका में ज्यादा फीस मांगने की शिकायत

जनहित याचिका में बताया गया है कि कक्षा 10वीं के छात्रों से इस साल सीबीएसई एग्जाम फीस 1500 बढ़ाकर 1800 रुपये मांगी जा रही है जबकि कक्षा 12वीं के छात्रों से 1500 से बढ़ाकर फीस 2500 रुपये मांगी जा रही है.

जनहित याचिका लगाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया है कि 2 साल पहले सीबीएसई ने एग्जाम फीस को 300 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया था. पिछले साल भी सीबीएसई ने एग्जाम फीस को 500 रुपये से तीन गुना बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया था. ऐसे में याचिका में सीबीएसई पर यह सवाल खड़ा किया गया है कि एग्जाम फीस जब पिछले साल ही 3 गुना बढ़ा दी गई है तो इस साल कोरोना और लॉकडाउन में फीस बढ़ाना कैसे तर्कसंगत है. 

याचिका में बताया गया है कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाले अभिभावकों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वो अपने दैनिक खर्चे भी नहीं उठा पा रहे हैं. अलग-अलग जगहों से स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों ने अशोक अग्रवाल को पत्र लिखे हैं और बताया है कि वह स्कूलों की फीस भरने तक में सक्षम नहीं हैं. ऐसी स्थिति में एग्जाम फीस का एक और अतिरिक्त बोझ अभिभावकों पर डालना इस वक्त ठीक नहीं होगा.

पूरी तरह से माफ हो एग्जाम फीस

याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई के पास पहले से ही फंड की कोई कमी नहीं है. ऐसे में एग्जाम फ़ीस को इस साल पूरी तरह से माफ करके पिछले सालों में सीबीएसई द्वारा इकट्ठे किए गए सरप्लस फंड को इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसके अलावा सीबीएसई इस खर्चे को केंद्र सरकार के माध्यम से पीएम केयर्स फंड से भी मांग सकती है.

इसके अलावा दिल्ली में सरकारी स्कूलों के मार्च से ही बंद होने के कारण इस बार बहुत सारी मदों में खर्च होने वाला दिल्ली सरकार का पैसा बच गया है. मसलन टीचर ट्रेनिंग से लेकर मिड-डे-मील, स्पोर्ट्स पर ख़र्च होने वाले पैसे से लेकर बच्चों की ड्रेस का पैसा इस साल पूरी तरह से बच गया है. ऐसे में इस पैसे का इस्तेमाल दिल्ली सरकार सीबीएसई को एग्जाम फीस के तौर पर देकर कर सकती है.


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