फेरी वालों के संगठन ने कहा- ‘पीएम स्वनिधि’‘ योजना से सूदखोर महाजनों पर निर्भरता घटेगी


खोमचे, रेहड़ी लगाने वालों के संगठन का मानना है कि ‘पीएम स्वनिधि’ योजना से उनकी काफी ऊंचा ब्याज वसूलने वाले महाजनों पर निर्भरता कम हो सकेगी। यह योजना हाल में पेश की गई है। इसके तहत कोविड-19 लॉकडाउन के बाद अपना कारोबार या कामकाज फिर शुरू करने के इच्छुक रेहड़ी-पटरी वालों को 10,000 रुपये का बैंक कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है।

राष्ट्रीय हॉकर्स महासंघ (एनएचएफ) ने गुरुवार को कहा कि उसने बैंकों के सहयोग से ‘बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट’ की एक प्रतिबद्ध टीम तैयार की है। इससे एक भी ऋण खाते को गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) नहीं बनने दिया जाएगा। एनएचएफ के सचिव शक्तिमान घोष ने कहा, ‘‘हमारे पास इस योजना का इस्तेमाल कर रहेड़ी पटरी के जरिये कारोबार करने वालों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का अवसर है।

हम व्यावहारिक विचार के साथ ऋण का भुगतान सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं।’’ घोष ने कहा कि हमारा मिशन ऐसे छोटे कारोबारियों को सूदखोरों के चंगुल से निकालने का है। ये लोग 100 से लेकर 300 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने बुधवार को कहा था कि इस योजना को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

इस योजना के तहत अब तक एक लाख लोगों को कर्ज मंजूर किया जा चुका है। अब तक इस योजना के तहत कर्ज लेने के लिए पांच लाख आवेदन मिले हैं। योजना के तहत फेरीवाले, रेहड़ी पटरी, खोमचा लगाने वालों को 10,000 रुपये तक का कामकाजी पूंजी रिण मिल सकता है। यह राशि सालभर में मासिक किस्तों में लौटानी होगी। घोष ने कहा कि हमारी सिफारिश के मुताबिक इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल में एक लाख कारोबारी सहित देशभर में 20 लाख छोटे कारोबारियों को कर्ज वितरित किया जायेगा। योजना राज्य में जल्द शुरू होने की उम्मीद है। 

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