Dhanbad PMCH Rename News: काम नहीं नाम की राजनीति पर चढ़ा सियासी पारा, पक्ष-विपक्ष में बंटे राजनीतिक दल


पूर्व विधायक सह मासस नेता अरूप चटर्जी का कहना है कि रघुवर दास की सरकार बिनोद बिहारी महतो के नाम पर विश्वविद्यालय की घोषणा के साथ ही एके राय के नाम से पीएमसीएच का नामकरण करने जा रही थी। हालांकि राय साहब उस समय जीवित थे और यह भारतीय संस्कृति के अनुसार सही नहीं होता, इसलिए सरकार रुक गई। रघुवर उनसे काफी प्रभावित थे। मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल भी राय साहब से प्रभावित थे और नगर निगम से उनके नाम से पीएमसीएच करने का प्रस्ताव भी ला चुकी थी। बावजूद इसके यदि सरकार ने निर्मल महतो के नाम से पीएमसीएच का नामकरण किया है तो मुझे विरोध नहीं। बिनोद बिहारी महतो, एके राय और शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के अगुवा थे इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता यह तय है।

एके राय धनबाद की विभूति, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए : पूर्व मेयर 

इस मुद्दे पर मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल का कहना था कि एके राय धनबाद की विभूति थे। उन्हें सम्मान मिलना चाहिए था। उनके नाम पर पीएमसीएच की मांग सरकार से की जा चुकी थी। निगम भी यह प्रस्ताव पारित कर चुका था। राय साहब का नाम भंजानेवाला उनका कोई संतान भी यहां चुनाव मैदान में नहीं था कि सरकार के लिए घबराहट होती। बड़ी बात तो तब होती जब सरकार कोई नया संस्थान बनाकर उसे निर्मल महतो के नाम करती और बड़ी लकीर खींचती। पहले से तय योजना और घोषणा पर ही अपने लोगों के नाम चढ़ाने का कोई लाभ नहीं मिलने वाला। बावजूद इसके निर्मल महतो भी शहीद थे। हर शहीद का सम्मान होना चाहिए। उनके नाम से ही पीएमसीएच जुड़ा तो इसका विरोध नहीं करूंगा। 

सरकार के चाहने से राय का कद घटेगा न बढ़ेगा

माक्र्सवादी समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष हरि प्रसाद पप्पू ने पीएमसीएच के नामकरण पर कहा कि सरकार जिसके नाम करना चाहे करे। हमें कोई विरोध नहीं। सभी सम्मानित हैं। यह भी सही है कि एके राय एक विचार हैं। लाखों लोगों के दिलों में उनके विचार बसते हैं। वे किसी के चाहने नहीं चाहने से मिटनेवाले नहीं हैं। न ही किसी सरकार के किसी संस्थान से उनका नाम नहीं जोडऩे से उनका कद छोटा होने वाला है। अब कोई उनके विचार से भी डर रहे हैं तो उनके डर का कोई इलाज नहीं है। पीएमसीएच का नामकरण निर्मल महतो के नाम भी किया तो हमें आपत्ति नहीं लेकिन राय साहब से यहां के लोगों का जुड़ाव था। 

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