बंगाल में क्यों कम मिल रहे कोरोना के केस, केंद्रीय टेस्टिंग लैब ने बताई वजह


पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप है कि वो केंद्रीय टेस्टिंग लैब को कम कोरोना टेस्टिंग सैंपल भेज रही है. अब तक पश्चिम बंगाल ने मात्र 2523 सैंपल ही टेस्ट के लिए भेजे हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटरिक डिजीज, पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डॉ. शांता दत्ता ने यह बात कही है.

पश्चिम बंगाल में अब तक 95 कोरोना संक्रमित केस ही मिले हैं. लेकिन असल वजह वायरस का कम फैलना नहीं है, बल्कि लोगों का टेस्ट कम होना है. पश्चिम बंगाल कोरोना टेस्टिंग के मामले में देश का सबसे सुस्त राज्य है. अब तक पश्चिम बंगाल ने मात्र 2523 सैंपल ही टेस्ट के लिए भेजे हैं. जबकि यह घनी आबादी वाला राज्य है. यहां की कुल आबादी नौ करोड़ से भी अधिक है.

डॉ. शांता दत्ता ने 'आजतक' से बात करते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी कमी है. पिछले हफ्ते हमें प्रत्येक दिन के हिसाब से बीस सैंपल भी नहीं मिले थे. कितने लोगों का सैंपल भेजा जाएगा, यह राज्य सरकार निर्धारित करेगी. इसलिए अगर सरकार और ज्यादा टेस्ट सैंपल भेजती है तो हम ज्यादा लोगों की जांच कर पाएंगे.

डॉ. दत्ता ने कहा कि शुरुआत में टेस्ट के लिए सिर्फ हमारा ही केंद्र था. तब हम लोगों को प्रत्येक दिन 90-100 सैंपल मिलते थे. लेकिन अब टेस्ट के लिए और भी कई केंद्र बन गए हैं. उस हिसाब से देखें तो अब हमारे पास कम सैंपल आ रहे हैं. सभी सेंटर्स पर कोरोना टेस्ट के लिए स्टाफ को हमने ही ट्रेंड किया है. इसलिए राज्य सरकार जहां भी चाहे सैंपल भेज सकती है.

बता दें, कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटरिक डिजीज, कोरोना टेस्टिंग के लिए प्रदेश का नोडल सेंटर है. ICMR यानी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद जो भी टेस्ट किट भेजता है, यहीं पर स्टोर होता है. फिर बाद में मांग के हिसाब से कार्यालय किट रिलीज करता है.

वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के टेस्टिंग सैंपल कम भेजने वाले आरोप को लेकर डॉ. दत्ता ने कहा, 'ICMR ने हमें अब तक 42,500 किट्स भेजे हैं. हमारे पास टेस्टिंग किट की कोई कमी नहीं है. हम लोग पश्चिमी बंगाल के लिए डिपो या वॉरहाउस हैं. हम लोगों को अब तक तीन बार में 42,500 किट्स मिले हैं. पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के अलावा हमने ओडिशा और पोर्ट ब्लेयर को भी किट भेजे हैं. अभी भी हमारे पास 27,000 टेस्ट किट स्टॉक में है.'

क्यों जरूरी है टेस्टिंग?

कोरोना वायरस के प्रसार पर नियंत्रण के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू है ताकि लोगों के बीच इस महामारी का संक्रमण न हो. लेकिन क्या सिर्फ लॉकडाउन कर देने से इस महामारी से छुटकारा मिल जाएगा? जवाब है नहीं. दरअसल लॉकडाउन के पीछे सरकार का असल उद्देश्य लोगों के आवागमन को रोकना था. जिससे कि जो जहां है वहीं रुक जाए और ज्यादा लोगों के बीच यह वायरस ना फैले.

वहीं राज्य सरकारों से उम्मीद यह थी कि लॉकडाउन के दौरान वह कोरोना संक्रमित लोगों और इलाकों को चिन्हित करके उन्हें अलग करेंगे जिससे वायरस संक्रमित लोगों का इलाज कर अन्य लोगों के बीच इसे फैलने से रोका जा सके.