बीजेपी के 40 साल: अटल-आडवाणी से शाह-नड्डा तक ऐसे 11 नेताओं ने संभाली पार्टी की कमान


देश की सत्ता पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काबिज भारतीय जनता पार्टी आज अपना 40वां स्थापना दिवस मना रही है. 80 के दशक में आज ही के दिन यानी 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी का गठन हुआ और एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पहला लोकसभा चुनाव 1984 में लड़ा तो पार्टी के खाते में महज दो सीटें ही आई थी. इसके बावजूद बीजेपी नेताओं ने हिम्मत नहीं हारी. अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण अडवाणी से होते हुए आज पार्टी नरेंद्र मोदी की अगुवाई तक पहुंच गई है और मौजूदा समय में पार्टी की कमान जेपी नड्डा के हाथों में है.

अटल बिहारी वाजपेयी को 1980 में बीजेपी का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. यहां से जो सफर शुरू हुआ वो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया, लेकिन पार्टी ने अपने एजेंडे को नहीं छोड़ा. संघर्ष के दौर से निकल कर बीजेपी आज सत्ता के शिखर पर है. एक समय में इस बीजेपी को 'ब्राह्मण-बनिया-राजपूतों की पार्टी' कहा जाता था, लेकिन अटल युग और अब नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इसने अपने जनाधार को काफी बढ़ाया है.

देश की तमाम पिछड़ी, अन्य पिछड़ी और दलित जातियां बीजेपी का मजबूत वोटबैंक बन चुकी हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्य पिछड़ी जाति से आते हैं. इन 40 सालों के सफर में बीजेपी के 11 नेताओं ने पार्टी की कमान संभाली है, जिनमें दक्षिण से लेकर उत्तर तक नेता और ब्राह्मण से लेकर दलित समुदाय तक के हाथों में पार्टी की कमान रही है.

जनसंघ से बीजेपी का सफर

बीजेपी तो 1980 में बनी लेकिन इससे पहले ही 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर भारतीय जनसंघ बनाया था. 1952 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ को सिर्फ 3 सीटें मिलीं. इसके बाद जनसंघ का संघर्ष चलता रहा और जब देश में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो जनसंघ ने कांग्रेस के विरोध में आवाज बुलंद कर दी, जिसके बाद जनसंघ के कई नेताओं को जेल जाना पड़ा. आपातकाल के बाद जनसंघ का रूप बदला और इन्होंने अन्य पार्टियों के साथ मिलकर जनता पार्टी का गठन किया गया.

जनता पार्टी 1977 में सत्ता पर काबिज हुई और मोरारजी देसाई पीएम बने. हालांकि, दो साल में ही देसाई को हटना पड़ा. इसके बाद जनसंघ के लोगों ने जनता पार्टी से अलग होकर 1980 में बीजेपी का गठन किया. अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजयाराजे सिधिंया, सिकंदर बख्त जैसे तमाम नेता इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल थे.

अटल बिहारी वाजपेयी

साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनी तो उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के अध्यक्ष बने. 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी पहली बार चुनाव लड़ी लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति कांग्रेस को मिली और इसके चलते पार्टी को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल सका. इस चुनाव में बीजेपी के खाते में महज दो सीटें आई, लेकिन इस हार से बीजेपी को रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा. 1986 तक बीजेपी के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी रहे और जिसके बाद पार्टी की कमान कट्टर छवि के माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी को सौंपी गई.

लालकृष्ण आडवाणी

1986 में लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के नए अध्यक्ष बन गए. बीजेपी की कमान अब लालकृष्ण आडवाणी के हाथों में थी. उन्होंने बीजेपी को हिंदुत्व के रास्ते पर ले जाने का फैसला किया. इसके बाद रास्ता खुद ब खुद बनता चला गया. पालमपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में 1988 में अयोध्या मुद्दे को पार्टी के एजेंडे में शामिल किया गया. 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 2 से बढ़कर 85 सीटों पर पहुंच गई. इस तरह वो देश की दूसरे नंबर की पार्टी बन गई.

आडवाणी तीन बार बीजेपी के अध्यक्ष रहे, पहली बार 1986 से 1991 तक तो दूसरी बार साल 1993 में आडवाणी एक बार फिर बीजेपी के अध्यक्ष बने और 1998 तक इस पद पर रहे. साल 2004 में इंडिया शाइनिंग के बुरी तरह फेल होने के बाद एक बार फिर से बीजेपी की कमान लालकृष्ण आडवाणी के हाथों में सौंपी गई लेकिन जिन्ना प्रकरण के चलते उन्हें 2006 में पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मुरली मनोहर जोशी

आडवाणी ने पहली बार 1991 में बीजेपी के अध्यक्ष का पद छोड़ा तो पार्टी की कमान मुरली मनोहर जोशी ने संभाली. 1991 का चुनाव बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर लड़ा और उसने 120 सीटें जीत लीं. बीजेपी इस बात को समझ गई थी कि सत्ता की संजीवनी चाहिए तो राम के नाम के साथ-साथ राष्ट्रवाद की राह पर भी चलना होगा. मुरली मनोहर जोशी पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्हीं के नेतृत्व में दिसंबर 1991 में तिरंगा यात्रा निकली जिसका मकसद 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना था. बीजेपी को इससे ताकत मिली.

कुशाभाऊ ठाकरे

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी 1998 में 13 महीने की सरकार बनाने में कामयाब रही. इसी दौर में बीजेपी में पितृ पुरुष कहे जाने वाले कुशाभाऊ ठाकरे की पार्टी अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी हुई थी. मध्यप्रदेश में बीजेपी को मजबूत बनाने में कुशाभाऊ ठाकरे का बड़ा योगदान भी माना जाता है, लेकिन महज दो साल ही पार्टी के अध्यक्ष रहे.

बंगारू लक्ष्मण

कुशाभाऊ ठाकरे के बाद बीजेपी की कमान साल 2000 में आंध्र प्रदेश से आने वाले बंगारू लक्ष्मण को सौंपी गई. बंगारू लक्ष्मण दलित समुदाय से आते थे. हालांकि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण तहलका कांड में फंसने के बाद उन्हें पार्टी की कमान छोड़नी पड़ी. इस तरह महज एक साल ही वो बीजेपी के अध्यक्ष रह सके.

जेना कृष्णमूर्ति

बीजेपी के अध्यक्ष पद से बंगारू लक्ष्मण के हटने के बाद जेना कृष्णमूर्ति को 2001 में पार्टी की कमान सौंपी गई. और वो 2002 तक इस पद पर रहे.

वेंकैया नायडू

जेना कृष्णमूर्ती के बाद बीजेपी की कमान 2002 में वेंकैया नायडू को सौंपी गई थी. नायडू छात्र जीवन से बीजेपी में आए थे और 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे. नायडू के नेतृत्व में ही 2004 का लोकसभा चुनाव लड़ा गया था, जिसमें बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद नायडू ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह लालकृष्ण आडवाणी ने फिर पार्टी की कमान संभाली.

राजनाथ सिंह

लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना प्रकरण के बाद 2006 में बीजेपी अध्यक्ष छोड़ा तो पार्टी की कमान राजनाथ सिंह को सौंपी गई. राजनाथ सिंह तीन साल तक बीजेपी के अध्यक्ष रहे और उन्हीं के नेतृत्व में 2009 का लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें बीजेपी के पीएम पद का चेहरा लालकृष्ण आडवाणी थे. राजनाथ और आडवाणी की जोड़ी पूरी तरह से फेल रही. 2009 में बीजेपी की करारी हार के बाद राजनाथ सिंह की पार्टी अध्यक्ष पद से विदाई हुई.

नितिन गडकरी

राजनाथ सिंह के बाद बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर नितिन गडकरी की ताजपोशी हुई. 2009 में गडकरी पार्टी के अध्यक्ष चुने गए. उन्होंने बीजेपी छोड़कर जाने वाले कई नेताओं की घर वापसी कराई. इतना ही नहीं पार्टी का ग्राफ बढ़ाने के लिए हरसंभव कोशिश की, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले 2013 में उनसे कमान लेकर राजनाथ सिंह को सौंपी गई.

अमित शाह

नरेंद्र मोदी को पीएम का चेहरा घोषित कर दिया गया था और पार्टी में महासचिव के पद पर अमित शाह विराजमान हो चुके थे. यहीं से बीजेपी में मोदी युग की शुरुआत हुई. मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने वो कर दिखाया, जो अभी तक नहीं हुआ था. बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई तो राजनाथ सिंह 2014 में गृहमंत्री बने. पार्टी की कमान अमित शाह को सौंपी गई. अमित शाह पांच साल तक पार्टी के अध्यक्ष रहे और उन्होंने बीजेपी को नई ऊंचाई दी. कभी दो सांसदों वाली बीजेपी आज 18 राज्यों और केंद्र में दूसरी बार सत्ता पर पूर्णबहुमत के साथ काबिज है.

जेपी नड्डा

केंद्र में दूसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 में सरकार बनी तो अमित शाह गृहमंत्री बने. ऐसे में शाह ने बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को 17 जून 2019 को सौंपी. इस साल जनवरी में तीन साल के लिए पूर्णकालिक अध्यक्ष बना दिया गया है. कुशल रणनीतिकार होने के साथ ही नड्डा पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के विश्वासपात्र भी माने जाते हैं. कठिन से कठिन कामों को सूझबूझ और सरलता से सुलझाने में माहिर नड्डा के सामने अब पार्टी को नई बुलंदी पर ले जाने की चुनौती है.