बीजेपी ने बिहारी नेताओं के कंधे पर सौंपी उत्तर बंगाल में फतह की जिम्मेदारी


पटना/कोलकाताः पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 बीजेपी और ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए नाक की लड़ाई बन चुकी है। एक तरफ जहां ममता बनर्जी ने तीसरी बार बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए एड़ी चोटी एक कर रखा है। वहीं बीजेपी ने भी पहली बार बंगाल में सरकार बनाने को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। 2016 में 3 विधानसभा सीटों पर विजय हासिल करने वाली बीजेपी इस बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही है। दरअसल, बीजेपी ने बंगाल को 5 जोन में बांट कर उत्तर प्रदेश, उड़ीसा झारखंड हिमाचल और उत्तराखंड के साथ बिहार बीजेपी के कार्यकर्ताओं को भी जोन की जिम्मेवारी सौंपी है।

आठ चरण में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए 27 अप्रैल को पहले चरण में 35 सीटों पर वोटिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 294 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल में इस बार बीजेपी में सरकार बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। वहीं पिछले 10 साल से बंगाल पर राज कर रही ममता बनर्जी भी अपना किला बचाने के लिए व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार में लगी हैं। बताया जाता है कि इस बार पश्चिम बंगाल में उसी की सरकार बनेगी जो उत्तर बंगाल को फतह करेगा।

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तर बंगाल के 57 सीटों की जिम्मेवारी बिहार के नेताओं को सौंपी है। बताया जाता है कि इस चुनाव में जिस पार्टी ने भी उत्तर बंगाल पर अपनी पकड़ बना ली, पश्चिम बंगाल में उस पार्टी के लिए सरकार बनाने की राह आसान हो जाएगी। यही वजह है कि बीजेपी ने उत्तर बंगाल के क्षेत्र को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए बिहार के सह संगठन महामंत्री रत्नाकर को यह महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन महामंत्री के साथ बिहार बीजेपी के नेता और पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल को भी कोआर्डिनेशन के लिए साथ में लगाया है।

दरअसल, उत्तर बंगाल में अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर मालदा को मिलाकर 9 जिले हैं। इन 9 जिलों में विधानसभा की 57 सीट हैं। वहीं अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, रायगंज, बालूरघाट, उत्तर मालदा और दक्षिण मालदा मिलाकर लोकसभा की 8 सीटें मौजूद हैं। बता दें कि 2019 लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र के 8 में से 7 लोकसभा सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी।

उत्तर बंगाल का क्षेत्रफल बंगाल की राजधानी कोलकाता से काफी दूर स्थित है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसकी सीमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से लगती है। वहीं सिक्किम, आसाम, बिहार, झारखंड से भी इसकी सीमा जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि इस क्षेत्र में आजादी के बाद से अब तक कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है। यहां के रहने वाले लोग आज भी विकास की की राह देख रहे हैं। उत्तर बंगाल में बिहार के संगठन महामंत्री के साथ के साथ कोआर्डिनेशन के कार्य में लगे प्रेम रंजन पटेल ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि स्थानीय लोग इस बार लोकसभा की तरह विधानसभा में भी बीजेपी को मौका देकर बंगाल में परिवर्तन लाने का मन बना चुके हैं।

बिहार को मिले उत्तर बंगाल की जिम्मेवारी में कोआर्डिनेशन का काम देख रहे प्रेम रंजन पटेल ने बताया कि उत्तर बंगाल के लोग परिवर्तन का मन बना चुके हैं। प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि बंगाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही बंगाल को पाकिस्तान में शामिल होने से रोकने का काम किया था। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही थे जिन्होंने कश्मीर में धारा 370 लगाए जाने के बाद तत्कालीन जवाहरलाल नेहरू की सरकार से इस्तीफा देकर 370 हटाने के लिए लड़ाई शुरू की थी और कश्मीर के लिए अपनी जान दे दी थी।

प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती के लोग बंगाल में बीजेपी की सरकार बनाने के लिए तैयार बैठे हैं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा करने का काम किया है। यह बात पश्चिम बंगाल की जनता भली-भांति जानती है। प्रेम रंजन पटेल ने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी 200 से ज्यादा सीटें जीतेगी जिसमें उत्तर बंगाल के 57 सीटों में से 45 से अधिक सीटें शामिल होगी।