उन्नाव केस : दोनों लड़कियों का जहर मिला खाना खाने से हुई मौत, शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान


उन्नावः दिल्ली में किसानों के आंदोलन में आज देश भर की ट्रेनों को रोकने का फैसला था। यह टीवी चैनल की सुर्खियां बनते-बनते रह गई। उत्तर प्रदेश की राजधानी से बमुश्किल 30 किलोमीटर की दूरी पर दो दलित बच्चियों का शव मिलने से उत्तर प्रदेश की राजनीति फिलहाल गरमा गई है। बुधवार देर शाम तीन नाबालिग दलित लड़कियां उन्नाव के असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गांव के एक खेत में बेहोशी की हालत में मिलीं थीं। इनमें दो की मौत हो चुकी थी, जबकि एक को सीएचसी से जिला अस्पताल और उसके बाद कानपुर रीजेंसी अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के 12 घंटे बाद भी उसकी हालत गंभीर है। उसे बैग और ट्यूब वेंटिलेशन पर रखा गया है। अस्पताल की चाइल्ड केयर यूनिट उसका गहनता से इलाज कर रही है।

उन्नाव की दोनों किशोरियों का पोस्टमार्टम हो चुका है। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों का कहना है कि दोनों किशोरियों की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। दोनों ने मौत से करीब 6 घंटे पहले खाना खाया था। दोनों के पेट में 100 से लेकर 80 ग्राम तक खाना मिला है। खाने में जहर होने की वजह से मौत हो गई। मृृत लड़कियों के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला है। मृत पाई गई दोनों लड़कियों के पोस्टमार्टम के लिए प्रशासन ने चार डॉक्टरों का पैनल बनाया था। 

मामले के खुलासे के लिए रात भर पुलिस का एक्शन जारी रहा। पुलिस ने मामले में चार युवकों को उठा लिया। उनसे पूछताछ चल रही है। उठाए गए चारों युवक बाबूरहा के बगल के गांव के हैं। देर रात तक पुलिस असोहा के बाबूरहा गांव में ही डटी रही। इस दौरान करीब 2:30 बजे पुलिस पीड़ित परिवार को लेकर थाने पहुंची जहां एडीजी एसएन सावंत और आईजी लक्ष्मी सिंह ने उनसे घटना के बारे में पूछताछ की। लोगों ने इस केस की एकमात्र गवाह बची किशोरी को बचाने की गुहार लगाते हुए उसे तुरंत दिल्ली एम्स में शिफ्ट करने की मांग की। कई लोग रात भर सोशल मीडिया पर #Save_Unnao_Ki_Beti  हैशटैग चलाते रहे।

हजारों लोगों ने इस बारे में ट्वीट कर पीड़िता की जान को खतरे की आशंका जाहिर की। प्रियंका गांधी, सुभाषिनी अली सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार पर हमले तेज कर दिए। एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि लड़कियों की किसी से दोस्ती तो नहीं थी। मामले का खुलासा करने के लिए पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। मौके पर और पीड़िता के घर अभी भी पुलिस फोर्स तैनात है। 

इस बीच मृत पाई गई एक किशोरी की मां का बड़ा बयान आया है। गुरुवार को उन्होंने बताया है कि तीनों लड़कियां खेत में अचेत मिली थीं, उनके हाथ-पैर बंधे नहीं थे। मां के इस बयान पर एसपी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है। सभी के बयान ले लिए गए हैं। घटना के खुलासे के लिए टीम गठित की गई है जो हर पहलुओं का निरीक्षण करेगी।  उधर, परिवार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। 

घटना के अगले दिन गुरुवार को प्रशासन की ओर से कब्र खोदने के लिए जेसीबी मशीन मंगाई गई तो ग्रामीणों और सपा के लोगों ने पुरजोर विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि पीड़ित परिवार को नौकरी, मुआवजा और हत्यारों की तलाश जब तक नहीं होगी वह किशोरियों का शव दफनाने नहीं देंगे। विरोध के बाद प्रशासन ने जेसीबी गांव से बाहर खड़ी करा दी। इसको देख कर लग रहा है कि उन्नाव में हाथरस केस जैसे बर्ताव किए जाने की आशंका थी।