जीबीएम में हुआ “स्वच्छता ही सेवा- एक कदम स्वच्छता की ओर ” विषय पर वेबिनार-सह-क्विज का आयोजन


-स्वच्छता व्यक्ति विशेष की नहीं, सबकी जिम्मेदारी : राय मदन किशोर

-स्वच्छ समाज में ही लाया जा सकता है रामराज : प्रो अशरफ

सूरज कुमार

गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के रीजनल आउटरीच ब्यूरो के तत्वावधान में फील्ड आउटरीच ब्यूरो, गया द्वारा गौतम बुद्ध महिला (जीबीएम) कॉलेज, गया के साथ "स्वच्छता ही सेवा-एक कदम स्वच्छता की ओर" विषय पर एक वेबिनार सह क्विज का आयोजन गुरुवार को किया गया, जिसकी अध्यक्षता राय  मदन किशोर, भूतपूर्व अवर सचिव, बिहार सरकार ने की. अपने संबोधन में उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गाँधी ने गंदगी से आज़ादी की लड़ाई शुरू की थी, जो आज भी प्रेरक है। स्वच्छता किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। विषय प्रवेश करते हुए फील्ड आउटरीच ब्यूरो, गया के बुलंद इक़बाल ने मंत्रालय द्वारा स्वच्छता के लिए जागरूकता हेतु हो रहे प्रयासों की चर्चा की। वेबिनार के अतिथि वक्ता के रूप में जीबीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो• जावेद अशरफ ने स्वच्छता और स्वास्थ्य के मध्य स्थापित अन्योन्याश्रय संबंधों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक स्वच्छ समाज में ही 'रामराज' लाया जा सकता है। उनके अनुसार तन के साथ-साथ मन और आत्मा की शुद्धता भी अत्यंत ज़रूरी है। वेबिनार का संचालन कर रहीं जीबीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने स्वरचित कविता "स्वच्छ रहे अपना यह भारत, स्वच्छ रहे तन, मन, जीवन। अगर स्वच्छता होगी चहुंदिश, देश स्वर्ग जाएगा बन" के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने महात्मा गाँधी का दृष्टांत देते हुए स्वच्छता को ईश्वरत्व का प्रतीक व मानव जीवन की सर्वांगीण सफलता के लिए अत्यावश्यक बताया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु अधिक संख्या में पौधरोपण करने तथा जनसंख्या-वृद्धि पर नियंत्रण का भी सुझाव दिया।  


मानव द्वारा उत्पन्न कचरे के विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी गई। 

जीबएम कॉलेज में ही भौतिकी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिल्पी बनर्जी ने स्वच्छता की आवश्यकता पर बल देते हुए मानव द्वारा उत्पन्न कचरे के विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी तथा अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) हेतु 'रिड्यूस, रियूज तथा रिसाईकिल' के सूत्र पर भी प्रकाश डाला। डॉ बनर्जी ने कहा कि आधुनिक तकनीकी दौर में उत्पन्न ई- कचरे का पुनः उपयोग संभव नहीं है और इन्हें नष्ट भी नहीं किया जा सकता है। जीबीएम कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नगमा शादाब ने अपशिष्ट पदार्थों की विभिन्न अवस्थाओं का उल्लेख करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की चर्चा की। उनके अनुसार प्राकृतिक तौर पर नष्ट हो जानेवाले पदार्थों को कम्पोस्ट में बदला जा सकता है, किंतु बहुत आवश्यक है कि अपशिष्ट पदार्थों के उत्पादन को ही नियंत्रण में रखा जाये। मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर प्रीति शेखर ने  स्वच्छता के मनोवैज्ञनिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता को आवश्यक शर्तों में से एक बताया। वेबिनार में अपने विचार रखते हुए हिंदी चैनल  बिहार के ब्यूरो चीफ फैसल रहमानी ने स्वच्छता को आधा ईमान बताया। उन्होंने नागरिकों से स्वच्छता के अनुकूल व्यवहार अपनाने की अपील की तथा कहा कि विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट को नष्ट करने की प्रणाली भी स्वच्छ होनी चाहिए। वेब गोष्ठी में आरओबी, पटना के निदेशक विजय कुमार सहित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।  एफओबी भागलपुर के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अभिषेक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कौतूहल बढ़ा देने वाली क्विज प्रतियोगिता आयोजित हुई 

कार्यक्रम की अंतिम कड़ी के रूप में कौतूहल बढ़ा देने वाली क्विज प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस क्विज में प्रतिभागियों से 'स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता' से संबंधित एकउत्तरीय प्रश्न पूछे गये। प्रथम आने वाली छात्राओं में डॉली कुमारी, माही राज गुप्ता, मोनिका मेहता, दीक्षा, रिया, अर्पणा, अनुप्रिया, दिव्या मिश्रा, मनीषा तथा वैष्णवी आदि के नाम शामिल हैं। इन छात्राओं को फील्ड आउटरीच ब्यूरो, गया (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा स्वच्छता के प्रतीक स्वरूप डस्टबिन्स देकर पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य प्रो अशरफ ने सभी विजेता छात्राओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। क्विज प्रतियोगिता का संचालन डॉ प्रियदर्शनी ने किया।

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