पानी की दो बूंद के लिए तरस रहे हैं सांतरागाछी के लोग


युवा शक्ति संवाददाता
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हावड़ा : गरमी का मौसम आते ही दक्षिण हावड़ा के सांतरागाछी के लोगों में पानी को लेकर भय व्याप्त हो जाता है। यहां के लोगों को पानी की दो बूंद को लिए तरसना पड़ता है। नहाना तो दूर की बात पीने तक का लिए उन्हें पानी नसीब नहीं होता। यह एक दिन की बात नहीं है। वर्षों से लोग इस हकीकत का सामना कर रहे हैं। चुनाव आते है चले जाते हैं। विभिन्न दलों के उम्मीदवार आते है, पानी देने का वादा करते हैं, वोट मांगते है और जीत कर फिर कभी इस अंचल की ओर नहीं ताकते हैं जिसके कारण सांतरागाछी के लोगों को आज तक पीने के लिए पानी नहीं मिल सका है। हां, इतना जरूर है कि तृणमूल के शासनकाल में यहां के कुछ अंचलों में पद्दपुकुर जल परियोजना के द्वारा पानी देने की कोशिश की जा रही है लेकिन पानी की धार इतनी पतली है कि सभी लोगों को पानी नहीं मिल पाता। लेकिन जैसे ही गर्मी का मौसम आता है उस अंचल में लगाये गये इक्का-दुक्का चापाकलों का जल स्तर काफी नीचे चला जाता है।  

स्थानीय महिला पूर्णिमा दास का आरोप है कि जहां पेयजल की पाइप लगाई गई है वहां गंदा पानी आता है जिसे मुंह से नहीं लगाया जा सकता।
स्थानीय व्यक्ति प्रदीप देबू का कहना है कि सांतरागाछी इलाके में पानी की बिक्री जोरो पर है। कारण, इस इलाके में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पेयजल व्यापारी इसका लाभ उठाते हैं। लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन का ध्यान कई बार इस ओर आकृष्ट किया गया है लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

इस मुद्दे पर बात करने पर हावड़ा नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि सांतरागाछी के अधिकतर इलाके ग्रामीण हावड़ा के क्षेत्र में आते हैं, वहां की व्यवस्था हावड़ा नगर निगम के हाथ में नहीं है। 

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