गंगा नदी की तलहटी में मिट्टी जमने से लांच सेवा पर पड़ सकता है असर


युवा शक्ति संवाददाता
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कोलकाता/हावड़ा ः गंगा नदी भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण व पवित्र नदी है। यह भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर (कि॰मी॰) की दूरी तय करती हुई उत्तराखण्ड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है। देश की प्राकृतिक सम्पदा ही नहीं, जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100 फीट अर्थात 31 मी. की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में पवित्र नदी भी मानी जाती है लेकिन इन दिनों बंगाल में यह नदी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। लॉकडाउन में भले ही गंगा नदी गंदगी से मुक्त हो गई है लेकिन नदी में कई बरसों से मिट्टी की कटाई नहीं होने के कारण सबसे बुरा असर लांच सेवा पर पड़ रहा है। इसे चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस कारण भाटे के समय पानी कम होने के कारण लांच सेवा को चालू करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

हुगली नदी जलपथ समवाय समिति के मेंटेनेंस इंजीनियर का कहना है कि पिछले काफी वर्षों से गंगा के नीचे जमीन तलहटी से मिट्टी की कटाई नहीं होने के कारण हावड़ा चांदपाल घाट, रामकृष्णापुर घाट, शिवपुर घाट के नजदीक काफी मिट्टी जम गई है। उन्होंने एक कारण और भी बताया कि विद्यासागर सेतु बनने के बाद गंगा में ज्वार आने पर जो बहाव होता है जिसके घूमने के कारण बार- बार लांच सेवा के लिए बनाई गई जेटी को क्षति पहुंचा रहा है। बाउरिया व शिवपुर सहित कई जगहों पर काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ महीनों से शिवपुर लांच घाट की सर्विस गैंगवे टूट जाने के कारण बंद है। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट को बार- बार चिट्ठी देने के बावजूद अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है जिससे आने वाले समय में लांच सेवा पर काफी असर पड़ सकता है, कभी भी कोई दुर्घटना घट सकती है।

 वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। सफ़ाई की अनेक परियोजनाओं के क्रम में नवम्बर,2008 में भारत सरकार द्वारा इसे भारत की राष्ट्रीय नदी तथा प्रयागराज और हल्दिया के बीच 1600 किलोमीटर गंगा नदी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है।

क्या कहना है पोर्ट ट्रस्ट चेयरमैन का ः कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन विनीत कुमार ने बताया कि गंगा नदी में मिट्टी के कटाई का काम समय- समय पर की जाती है। मूलतः जिस रास्ते से बड़े- बड़े जहाजों का आवागमन होता है उस रास्ते पर मिट्टी की कटाई की जाती है। उन्होंने बताया कि कोलकाता से वाराणसी के लिए कार्गो सेवा जल्द शुरू किए जाने के आदेश के बाद इस मार्ग पर काम के लिए भी टेंडर जारी कर दी गई है और काम जारी है। आने वाले समय में जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। आज भी इस समय में भी गंगा नदी में मिट्टी की कटाई का काम चल रहा है कई जगहों पर।

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