लालू यादव के पैर में आ गई थी मोच, रावण वध का उद्घाटन करने से पहले गांधी मैदान में भड़क गए थे

दुर्गापूजा के मौके पर राजधानी में रावण-वध कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1955 में आरंभ हुई थी। पहली बार रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद का पुतला पटना के गांधी मैदान में जला था। देश की आजादी के बाद पाकिस्तान से पलायन कर पटना आए पंजाबी समुदाय के लोगों ने रावण वध कार्यक्रम की शुरुआत की थी। पाकिस्‍तान से यहां आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने इन परिवारों को बसाने के लिए राजधानी में सरकार की ओर से जमीन मुहैया कराई थी व सहयोग राशि दी थी। यहां बसने के बाद समुदाय के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर एक हजार रुपए जमा करने के बाद पहली बार आयोजन को पूर्ण किया था।

लाहौर से आए लोगों ने रामलीला में लिया बढ़-चढ़ कर भाग

दशहरा कमेटी के संस्थापक सदस्य टीआर गांधी बताते हैं कि देश के बंटवारे के बाद पंजाब को दो हिस्सों में बांटा गया था। एक हिस्सा पाकिस्तान में था। देश के आजाद होने के बाद कुछ लोग 1947 में पटना शरणार्थी बनकर आए थे। इन्हीं लोगों में लाहौर से बख्शी राम गांधी भी पटना आए थे। वे लाहौर में होने वाली रामलीला कमेटी के सचिव हुआ करते थे। उन्होंने 1954 में दशहरा कमेटी का गठन किया था।

1954 में पहली बार गांधी मैदान में हुआ रावण वध

बैद्यनाथ आयुर्वेद के मालिक दुर्गा प्रसाद शर्मा कमेटी के अध्यक्ष बने थे। होटल चाणक्य के मालिक पीके कोचर, उनके बड़े भाई ओम प्रकाश कोचर, बख्शी राम गांधी के छोटे भाई मोहन लाल गांधी, डब्लूडी सचदेवा, टीआर मेहता, रामनाथ साहनी, जवाहर लाल पासी, आरके मल्होत्रा आदि कमेटी के सदस्य बने। सारे कमेटी के सदस्यों ने मिलकर गांधी मैदान में पहली बार रावण-वध का आयोजन किया था। इसमें मुख्य अतिथि बिहार के तत्कालीन राज्यपाल आरआर दिवाकर थे। कई वर्षों तक मुख्य अतिथि राज्यपाल हुआ करते थे।

1990 में आए थे लालू यादव

1990 में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद आए थे। कार्यक्रम उद्घाटन के पहले ही लालू प्रसाद यादव का पैर गड्ढे में जाने के कारण मोच आ गई थी। हालांकि, वे रावण वध कार्यक्रम में थोड़ी देर के लिए शामिल रहे थे। इसके बाद उन्होंने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि आयोजन में गड़बड़ी न हो इसका ख्याल आगे से रखा जाए।

गया के मुस्लिम कारीगर ने बनाया था पुतला

रावण वध को लेकर पुतला बनाने का कार्य गया के कारीगर मोहम्मद जमाल मियां ने किया था। उन्होंने पहली बार 50 फीट का रावण, 40 फीट का कुंभकर्ण और 30 फीट का मेघनाथ का पुतला बनाया था। प्रतिवर्ष शहर में होने वाले रावण वध कार्यक्रम के लिए पुतले का निर्माण गया के कारीगरों द्वारा होता रहा। वहीं पुतले में पटाखे लगाने का कार्य इलाही बख्श का रहा था। वे कई वर्षों से कमेटी से जुड़ अपने दायित्व को निभाने में लगे हैं।