Corona Effect: दुर्गा पूजा के पंडाल में प्रसाद व भोग के वितरण की अनुमति नहीं; पढ़ें-डिटेल्स गाइडलाइंस

 

वर्तमान में कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। अभी सबसे अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। दुर्गा पूजा को लेकर राज्य सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों का हमें पालन कराना है। पूजा समितियों को लगातार बैठक कर निर्देशों से अवगत कराया जा चुका है। यह कहना है उपायुक्त कुलदीप चौधरी का। बुधवार को न्याय सदन के सभागार में डीसी जिला व प्रखंड के अधिकारियों के साथ दुर्गा पूजा को लेकर बैठक करने के दौरान यह आदेश दिए। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सौहाद्र्रपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की डीसी ने लोगों से अपील की। बताया कि कोरोना संक्रमण का प्रसार नहीं हो इसी उद्देश्य से इस वर्ष पंडाल में प्रसाद व भोग के वितरण की अनुमति नहीं दी गई है। इस पर जिला प्रशासन का कोई प्रतिबंध नहीं है। बताया कि राज्य सरकार का इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश है कि पंडाल में या उसके आसपास कोई सामुदायिक आयोजन या भीड़ एकत्रित कर भोग का वितरण नहीं किया जाना है। पूजा समितियों को 18 वर्ष से ऊपर के वालंटियर रखने का निर्देश दिया गया है । कोविड वैक्सीन का डोज लेने वाले ही वालंटियर का काम करेंगे।


यह है सरकार की ओर से निर्देश


दुर्गा पूजा विशेष रूप से बनाए गए छोटे पंडालों मंडपों में की जा सकती है। बगैर लोगों के भागीदारी के अनुष्ठान किया जाए।

कंटेनमेंट जोन के बाहर पूजा पंडाल के निर्माण की अनुमति है।

दुर्गा पूजा पंडाल को सभी तरफ से बैरिकेङ्क्षडग किया जाएगा। आगंतुकों के प्रवेश को रोकने के लिए तीन तरफ से इसे कवर किया जाएगा । भक्त बैरिकेड्स के बाहर दूर से ही दर्शन कर सकते हैं।

पंडाल या मंडप का निर्माण किसी विषय पर नहीं किया जाएगा।

पूजा पंडाल या मंडप के आसपास के क्षेत्र में प्रकाश से कोई सजावट नहीं की जाएगी। सुरक्षा और सुरक्षा के उद्देश्य से आवश्यक प्रकाश व्यवस्था की अनुमति है।

पूजा पंडाल या मंडप में और उसके आसपास कोई स्वागत द्वार या तोरण द्वार नहीं बनाया जाएगा।

प्रतिमा स्थापना स्थल को छोड़कर शेष पंडाल का स्थान खुला रहेगा।

मूर्ति का आकार पांच फीट से अधिक नहीं होना चाहिए।

ध्वनि विस्तारक / माईक का उपयोग ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुपालन में मंत्र/पाठ/आरती के सीधा प्रसारण के लिए अनुमति दी जा सकती है। सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के माध्यम से टेप,आडियो,डिजिटल रिकॉर्डिंग का कोई प्रसारण नहीं किया जाएगा।

पूजा पंडाल में उपस्थित रहने वाले सभी पूजा समिति के सदस्यों के अलावा पुजारी व स्वयंसेवक यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें कम से कम एक टीका लग गया है।

इस अवसर पर कोई मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा।

दुर्गा पूजा पंडाल या मंडप में और उसके आसपास कोई भी फूड स्टाल नहीं खोला जाएगा।

एक समय में दुर्गा पूजा पंडाल या मंडप में आयोजक, पुजारी और सहयोगी स्टाफ को मिलाकर 25 से अधिक व्यक्ति उपस्थित नहीं होंगे।

विसर्जन जुलूस नहीं होगा। मूर्तियों को इस प्रयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा अनुमोदित स्थान पर विसर्जित किया जाएगा।

कोई संगीतमय या कोई अन्य मनोरंजन व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं होगा।

कोई सामुदायिक भोज, प्रसाद या भोग वितरण समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा । प्रसाद की होम डिलीवरी पर कोई रोक नहीं है।

आयोजक या पूजा समितियों की ओर से किसी भी प्रकार का कोई आमंत्रण जारी नहीं किया जाएगा।

पंडाल या मंडप के उद्घाटन के लिए कोई सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजित नहीं किया जाएगा।

पंडाल निर्माण के लिए किसी भी तरह की सड़क जाम नहीं किया जाएगा।

किसी भी सार्वजनिक स्थान पर गरबा,डांडिया कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा।

सार्वजनिक स्थान पर रावण का पुतला नहीं जलाना चाहिए। इससे भारी भीड़ उमड़ती है।

सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य है ।

पंडाल में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को उपस्थित नहीं होना चाहिए।

सार्वजनिक स्थानों पर न्यूनतम छह फीट की दूरी बनाये रखना जरूरी है।

पूजा पंडाल या मंडप में उपस्थित होने वाले व्यक्ति केद्र, राज्य सरकार व जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए सोशल डिस्टेंङ्क्षसग, मास्क के उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वच्छता के सभी प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन करेंगे।

पूजा का आयोजन करने वाले पूजा कमिटि सदस्यों एवं आयोजन में शामिल अन्य व्यक्तियों को जिला प्रशासन या सक्षम अधिकारी की ओर से लगाई गई किसी भी अन्य शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

नियम तोडऩे वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जा सकती है। इसके अलावे आइपीसी की धारा 188 व अन्य के कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।