Jharkhand Lockdown: गरमाने लगी मंदिरों को अनलाक करने की राजनीति, हेमंत सरकार की सहयोगी कांग्रेस की यह मांग

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए झारखंड सरकार ने 22 अप्रैल से राज्य के सभी मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। इसके लेकर अब राजनीति होने लगी है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर और बाबा बासुकीनाथ मंदिर खोलने को लेकर आंदोलन हो रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंदिर खोलने की मांग की है। अब हेमंत सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस भी मंदिरों को खोलने की आवाज उठाने लगी है। यह आवाज धनबाद के उठी है। कांग्रेस के धनबाद जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह ने मंदिरों को खोलने की वकालत की है।

मंदिरों को खोलने बहुत जरूरी

सिंह ने कहा है कि झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ का बहुत ही प्राचीन और विशाल भोलेनाथ का मंदिर है। यहां हर दिन हजारों हजार की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करते हैं। श्रावण मास में तो लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। देश के कोने कोने से आकर बाबा का पूजा अर्चना करते हैं। पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से राज्य के सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। श्रद्धालु श्रद्धा सुमन अर्पित नहीं कर पा रहे हैं। देवघर जैसे बहुत सारे धार्मिक स्थल हैं, जहां श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। यहां श्रद्धालु नहीं पहुंच पा रहे हैं। मंदिरों का खुलना बहुत जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मंदिरों को खोलने के लिए तुरंत पहल करने की मांग की है।

देवघर के व्यवसाय पर संकट

उन्होंने कहा कि देवघर नगरी की बात करें तो लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यहां एक तरह से व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी बेहतर माहौल बन चुका है। मंदिर के चलते बड़ी संख्या में व्यवसायी वर्ग भी बसे हैं। इनकी रोजी-रोटी पर आफत आ गई है। अभी पिछले दिनों देवघर के पंडा और वहां की जनता ने धरना प्रदर्शन भी खोलने के लिए किया था। झारखंड में कोरोना अब थम सा गया है। ऐसी स्थिति में झारखंड सरकार को राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को श्रद्धालुओं के लिए खोल देना चाहिए, ताकि आस्था बनी रहे। श्रद्धा के पुरूप नियमित अर्पित होते रहें। बहुत सारे राज्यों में तो अब स्कूल भी खोल दिए गए हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस पर विलंब निर्णय लेना चाहिए और धार्मिक स्थलों को खोलने में छूट देनी चाहिए। यह सीधे तौर पर लोगों की आस्था और व्यवसाय से जुड़ा मामला है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कई छोटे-बड़े व्यापारियों का व्यवसाय लगभग चौपट हो चुका है। कोविड प्रोटोकाल के तहत मंदिर खोला जा सकता है। वैसे भी कोविड की पहली और दूसरी लहर ने लोगों को काफी जागरूक बना दिया है।