कोरोना संक्रमण Effect: शव फेंके जाने से गंगा में स्नान नहीं कर रहे लोग, 100 रुपये किलो भी नहीं खरीद रहे हैं मछलियां

उत्तर प्रदेश और बिहार में कथित रूप से कोरोना संक्रमण से मरे लोगों की लाशों को गंगा नदी में फेंकने की घटना के बाद से बंगाल में लोग इतने आतंकित हैं कि गंगा में स्नान करना छोड़ दिया है। कोरोना संक्रमण के भय से कई इलाकों में लोगों ने न केवल गंगा में स्नान करना ही बंद नहीं किया है, बल्कि गंगा नदी से निकलने वाली मछलियों से भी तौबा कर लिया है। जिसकी वजह से बंगाल में मछलियों की कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। गंगा नदी की मछलियां सामान्य तौर पर तीन सौ से छह सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकती थी, लेकिन अब हाल यह है कि 100 रुपये में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं है।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश व बिहार में कई जगहों पर गंगा नदी में भारी संख्या में उतराती हुई लाशें मिली है। इसके बाद कहा जाने लगा है कि वे सभी लाशें कोरोना से मरने वालों का है जिसे गंगा में फेंका गया है। इस के बाद से बंगाल के राज्य सचिवालय की ओर से मालदा समेत जिन जिलों से गंगा बिहार-झारखंड होते हुए बंगाल में प्रवेश करती हैं वहां के जिला प्रशासन को सतर्क किया गया था।

बंगाल में मालदा के मानिकचक से गंगा प्रवेश करती हैं। वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गंगा नदी से लाशें मिलने के पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि गंगा विशाक्त हो गई हैं।

कोरोना संक्रमण के भय से लोग बाजार में आने से कतरा रहे हैं। इस कारण बाजार में मछलियों की कीमत गिर रही हैं। कभी मछली की कीमत 600 रुपये प्रति किलो तक होती थी, अब लोग 100 रुपये में भी लेने को तैयार नहीं है। मालदा के मानिकचक घाट के पास हीरानंदपुर समेत कई बाजारों में मछली कारोबारियों की बिक्री पर बुरा असर पड़ा है। थोक बाजार का भी हाल बुरा है। दुकानदार और बड़े व्यापारी नहीं आ रहे हैं। शवों के उतारने के डर से मानिकचक के अधिकांश लोगों ने पहले ही गंगा में स्नान करना बंद कर दिया है। आजकल मानिकचक और पंचानन्दपुर गंगा घाट लगभग खाली है। गंगा में मछली पकड़ने के लिए मछुआरे बहुत कम जा रहे हैं।