कभी गूंजती थी गोलियों की तड़तड़ाहट, आज महकते हैं केसर के फूल, जानिए गया के इस गांव की कहानी

केसर के गंध लेके पुरबा चलल रहे....। गीत की इस पंक्ति से केसर की खुशबू का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। अब केसर का यह गंध गया में भी बिखरने लगा है।  बाराचट्टी प्रखंड अंतर्गत दिवनिया पंचायत के चांदो गांव में अनुसूचित जाति परिवार से आने वाले कमल देव मांझी ने केसर की खेती कर एक नई शुरुआत की है। केसर के फूलों को देख राहगीर भी रुक जाते हैं। दूसरे जगह के किसान भी यहां पहुंचकर इसकी खेती की जानकारी लेने लगे हैं।  एक समय ऐसा था जब चांदो के जंगल में दिन हो या रात प्रतिबंधित नक्सली संगठन एवं पुलिस के बीच में जमकर मुठभेड़ होती थी। अगल-बगल के गांवों के लोग अपने घरों में दुबक जाते थे। लेकिन कमल देव मांझी ने केसर की खेती कर उसके खूबसूरत फूलों की खुशबू से जंगल को गुलजार बना दिया है।

चतरा के एक किसान से मिली खेती की प्रेरणा

कमल देव मांझी बताते हैं कि केसर की खेती से हमलोगों का कोई वास्‍ता नहीं था। इसके बारे में जानते तक नहीं थे। लेकिन संयोग से एक बार  झारखंड के चतरा जिले में अपने एक स्वजन के यहां गए हुए थे और केसर की खेती देखी। रिश्‍तेदार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह पलवल केसर है। इसकी खेती आप भी कीजिए। कमलदेव को उस किसान ने केसर का बीज उपलब्ध कराया। उसे लेकर अपने घर पहुंचे और इसकी खेती शुरू की। आज नतीजा सामने है।

ढाई कट्ठा जमीन में कर रहे केसर की खेती

कमल देव बताते हैं कि अपने घर के पीछे ढाई कट्ठा जमीन पर केसर की खेती किए हैं। बहुत अच्छी खेती हुई है उसके फूल को तोड़ कर घर में सुखाते हैं एवं उसे एक पैकेट में भरकर रख रहे हैं। परंतु दुख की बात यह है कि केसर का बाजार भाव क्या है इसकी जानकारी ही नहीं है। फिलहाल केसर के फूलों को तोड़कर कमल देव और उनकी पत्‍नी जयंती देवी सहेज कर रख रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसे बिक्री कर दो पैसे की आमदनी कर पाएंगे। 

कई मामलों में फायदेमंद है केसर

केसर पेट संबंधी बीमारियों के इलाज में बहुत फायदेमंद होता है। पेट में मरोड़, गैस, एसिडिटी आदि बीमारियों से परेशान रहने पर केसर से राहत मिलती है। इसका इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है केसर का उपयोग ब्यूटी प्रोडक्शन और मेडिसिन में भी लोग करते हैं। इसके सेहतमंद फायदों के बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है।