बंगाल में दिवाली-काली पूजा पर नहीं जलेंगे पटाखे, हाई कोर्ट ने विसर्जन के दौरान जुलूस की भी इजाजत नहीं दी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर काली पूजा, जगद्धात्री पूजा और छठ पर पटाखों के इस्तेमाल और बिक्री पर गुरुवार को प्रतिबंध लगा दिया। न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी और अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। काली पूजा 15 नवंबर को है।

अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिबंध जगद्धात्री पूजा, छठ और कार्तिक पूजा के दौरान भी लागू रहेगा। अदालत ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान लागू होने वाले दिशानिर्देश जैसे पंडालों में प्रवेश पर रोक आदि, काली पूजा के दौरान भी लागू होंगे। पीठ ने दुर्गा पूजा पर अदालत की ओर से निर्देशित दिशानिर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार की सराहना की।

कोर्ट का आदेश, काली पूजा के दौरान मानदंड सुनिश्चित करें

अदालत ने पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि काली पूजा के दौरान मानदंडों को सख्ती से लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि 300 वर्ग मीटर तक के क्षेत्र में काली पूजा पंडालों में 15 लोगों की अनुमति होगी और बड़े पंडालों में 45 व्यक्तियों की अनुमति होगी। पीठ ने विसर्जन के दौरान जुलूस की भी अनुमति नहीं दी। राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए काली पूजा और दिवाली के दौरान पटाखों को नहीं जलाने की लोगों से मंगलवार को अपील की थी।

मुख्य सचिव बोले, बिना पटाखे दिवाली और काली पूजा मनाएं

मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय ने कहा था, ‘हर किसी के सहयोग से, हम बिना पटाखों के काली पूजा और दिवाली त्योहारों को मनाना चाहते हैं। प्रशासन लोगों से पटाखों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील करता है।’ पटाखा निर्माताओं के एक संघ ने पहले ही 53,000 से अधिक की संख्या में प्रत्येक लाइसेंस प्राप्त पटाखा डीलरों के लिए दो लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है।


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