बिहार चुनाव: महागठबंधन में अब सिर्फ आरजेडी-कांग्रेस, जानिए पिछले 3 चुनावों में क्या रही इनकी ताकत?

 बिहार चुनाव का बिगुल बज चुका है. नीतीश कुमार के 15 साल के शासन के खिलाफ दम ठोंक रहे महागठबंधन में सीटों का बंटवारा भी हो चुका है. 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में आरजेडी 144 सीटों पर जबकि कांग्रेस 70 और लेफ्ट के दल 29 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. यानी कि अब महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस ही प्रमुख दल बच गए हैं. तेजस्वी के चेहरे के साथ उतरे महागठबंधन को नीतीश की मजबूत शख्सियत के साथ ही एनडीए के ठोस जनाधार को भी चुनौती देनी होगी.

पहले जीतन राम मांझी की पार्टी हम, फिर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा और अब मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी पार्टी भी एक-एक कर महागठबंधन से अलग हो चुकी हैं. हालांकि, वामदलों का साथ महागठबंधन को मिला है लेकिन प्रदेश की सियासत में इनका कितना प्रभाव दिखेगा ये तो वक्त ही बताएगा?

कहां से चले थे, कहां पहुंच गए दोनों गठबंधन?

पिछले लोकसभा चुनाव के समय से ही महागठबंधन के साथ रहे हम, रालोसपा और वीआईपी पार्टी का अपने-अपने इलाके और समुदायों में जनाधार है. चुनाव से ठीक पहले सीटों के बंटवारे को लेकर नाराजगी सामने आई और ये तीनों दल अलग होते गए. जीतनराम मांझी जेडीयू के साथ चले गए, उपेंद्र कुशवाहा तेजस्वी के नेतृत्व को लेकर तैयार नहीं थे और आखिर तक सहमति की उम्मीद लगाए मुकेश सहनी भी आखिरकार शनिवार को महागठबंधन को अलविदा कहकर चले गए. दूसरी ओर एनडीए में भी कम रार नहीं है. जेडीयू और बीजेपी साथ हैं, जीतनराम मांझी की हम भी साथ आ चुकी है लेकिन एनडीए में पुरानी सहयोगी एलजेपी के नेता चिराग पासवान जेडीयू के खिलाफ बागी रुख अख्तियार किए हुए हैं.

2015 के चुनाव में दोनों दलों की क्या थी ताकत?

बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू-आरजेडी और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनाव लड़े थे जबकि दूसरी ओर बीजेपी-एलजेपी थी. इसमें आरजेडी को 243 सीटों में से 81 सीटों पर जीत मिली थी जबकि 18.4% वोट. वहीं कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली थी जबकि 6.7% वोट कांग्रेस को हासिल हुए थे. वहीं 4 वामपंथी दलों को मिलाकर 3 फीसदी तक वोट हासिल हुए थे.

दूसरी ओर नीतीश कुमार की जेडीयू ने 71 सीटें जीती जबकि 16.8 फीसदी वोट हासिल किए. जुलाई 2017 में जेडीयू ने आरजेडी का साथ छोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया. इस चुनाव में भी जेडीयू-बीजेपी साथ हैं. बीजेपी को 2015 के चुनाव में 53 सीटें मिली थीं जबकि 24.4 फीसदी वोट हासिल हुए. एलजेपी को 2 सीट और 4.8 फीसदी वोट हासिल हुए. वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हम को 1 सीट और 2.3 फीसदी वोट. रालोसपा को 2 सीट और 2.6 फीसदी वोट मिले थे.

2010 के चुनाव में क्या था सीन?

इससे पहले 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए के फेस थे. इस चुनाव में जेडीयू-बीजेपी एक साथ, जबकि आरजेडी और एलजेपी साथ मिलकर उतरे थे. जबकि कांग्रेस अलग उतरी थी. इस चुनाव में जेडीयू को 115 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. जबकि 22.58% वोट मिले थे. बीजेपी को 55 सीट और 16.49% वोट हासिल हुए थे. आरजेडी को 54 सीटें मिली थीं जबकि 18.84 फीसदी वोट मिले थे. कांग्रेस को 4 सीटों की जीत और 8.37% वोट मिले थे. वहीं एलजेपी को 3 सीटों की जीत और 6.74% वोट हासिल हुए थे.

2019 के लोकसभा चुनाव में कैसे बदल गए थे हालात?

ये तो बिहार के पिछले दो विधानसभा चुनावों के असल आंकड़े थे अब सबसे हालिया चुनाव यानी पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर विधानसभा वार इन पार्टियों के प्रदर्शन पर भी गौर कर लेते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में 40 सीटों में से एनडीए ने 39 सीटें जीती थीं. जबकि 53.25% फीसदी वोट हासिल किए थे. वहीं यूपीए को सिर्फ एक सीट और 30.76% फीसदी वोट हासिल हुए थे. एनडीए की ओर से बीजेपी को 17, जेडीयू को 16 और एलजेपी को 6 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. यूपीए की ओर से कांग्रेस को एक सीट मिली थी जबकि आरजेडी का खाता तक नहीं खुल सका था.

विधानसभा वार इन नतीजों को देखें तो 243 में से 96 विधानसभा सीटों पर बीजेपी, 92 पर जेडीयू को बढ़त मिली थी. 35 पर एलजेपी ने बढ़त हासिल की थी. जबकि आरजेडी को 9, कांग्रेस को 5, जीतनराम मांझी की HAM को दो और रालोसपा को एक सीट पर बढ़त मिली थी. हालांकि आरजेडी की अगुआई वाली यूपीए को 30 फीसदी से अधिक वोट हासिल हुए थे.

बिहार चुनाव का क्या है शेड्यूल?

कोरोना संकट के बीच हो रहे बिहार के चुनाव पर पूरे देश की नजर है. बिहार में तीन चरणों में मतदान होंगे. पहले चरण में 28 अक्टूबर को वोटिंग होगी, 3 नवंबर को दूसरे, 7 नवंबर को आखिरी चरण का मतदान होना है. जबकि 10 नवंबर को नतीजे आएंगे. 12 करोड़ से अधिक की आबादी वाले बिहार में इस बार 7 करोड़ 31 लाख मतदाता होंगे जो राज्य की अगली सरकार पर अपना जनादेश देंगे.


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