लॉकडाउन से छिन गया रोजगार, बिहार निवासी युवक ने नहर में कूदकर दी जान


कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में दो महीने से अधिक समय तक लॉकडाउन लागू रहा. लॉकडाउन में व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ गईं, तो बड़ी तादाद में लोगों को रोजी-रोजगार से हाथ धोना पड़ा. सरकारें हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाने का दावा कर रही हैं, लेकिन ऐसा धरातल पर हो नहीं पा रहा. इसके परिणामस्वरूप हृदय विदारक घटनाएं सामने आ रही हैं.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिहार के बेगूसराय के निवासी 28 साल के एक युवक ने नहर में छलांग लगाकर जान दे दी. युवक के इस आत्मघाती कदम के पीछे कर्ज का बोझ और लॉकडाउन से रोजगार का चौपट होने को वजह बताया जा रहा है. युवक का शव हरियाणा के फरीदाबाद में नहर से निकाला गया है. पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए कहा है कि इस मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की जा रही है.

जानकारी के मुताबिक बिहार के बेगूसराय का निवासी 28 साल का रूपेश तिवारी परिवार के साथ दिल्ली के मीठापुर में रहता था. परिजनों के मुताबिक वह सफदरजंग अस्पताल के करीब खाने और कपड़े की रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करता था. वह लाखों रुपये के कर्ज में भी था. लॉकडाउन लागू हुआ तो उसका धंधा चौपट हो गया.

कर्ज चुकाने तो दूर, रूपेश के लिए परिवार चलाना भी मुश्किल हो रहा था. वह अचानक घर से निकला और पड़ोसी को फोन कर नहर में कूदकर जान देने की बात कही. पड़ोसी ने तुरंत ही यह बात रूपेश के परिजनों को बताई. परिजन दौड़े-भागे नहर किनारे पहुंचे, उसकी काफी तलाश भी की, लेकिन वह नहीं मिला. अब उसका शव फरीदाबाद में नहर से निकाला गया है. मृतक रूपेश की तीन साल और डेढ़ साल की दो बेटियां हैं.

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