प्रधानमंत्री राहत कोष में 70 करोड़ देने का संकल्प,अपात स्थिति में एआईएससीएसटीआरईए ने बढ़ाए सहायता के हाथ


युवाशक्ति टीम
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कोलकाता :  दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर जारी है. भारत भी इस महामारी से अछूता नहीं है। कई लोगों को इस संक्रमण ने अपना शिकार बनाया है जबकि कई इससे पीड़ित हैं. लोग  दहशत में जी रहे हैं। इस महामारी से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल डिस्टेंस बनाए रखने की देशवासियों से अपील की है. महामारी से दूर रहने के लिए लोग प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते हुए अपने घरों में बंद हैं. वे सरकारी सुझावों के अनुसार एहतियात बरत रहे हैं. आज देश एक गंभीर समस्या से गुजर रहा है. ऐसे में ऑल इंडिया शेड्यूल्ड केस्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स रेलवे एंप्लाइज एसोसिएशन (एआईएससीएसटीआरईए) ने अपनी मानवीय जिम्मेवारियों को समझते हुए सरकार के माध्यम से आमजन की सहायता का हाथ बढ़ाया है. 

इसके तहत एसोसिएशन की केंद्रीय कार्यकारी कमेटी ने रेलवे के विभिन्न विभागों में कार्यरत  प्रत्येक सदस्य के मासिक वेतन से एक-एक दिन की पारिश्रमिक की कटौती कर प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का निर्णय लिया है. इसके लिए एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे प्रत्येक जोलन रेलवे एवं उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधक को इस कार्य में सहयोग करने का निर्देश जारी करें. ऑल इंडिया शेड्यूल्ड केस्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स रेलवे एंप्लाइज एसोसिएशन के पूर्वी जोन के महासचिव समीर कुमार दास ने बताया कि भारतीय रेल में एसोसिएशन के लगभग 3.50 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं. 

सभी सदस्यों से इस आपात स्थिति में मदद के लिए अपनी एक-एक दिन की सैलरी को प्रधानमंत्री राहत कोष में स्वेच्छा से जमा कराने का आग्रह किया गया है. इसके लिए एसोसिएशन की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. इन सभी सदस्यों के योगदान से प्रधानमंत्री राहत कोष में लगभग 70 करोड़ की सहायता राशि जमा हो सकती है। समीर कुमार दास का कहना है कि इस आपात स्थिति में देश के सभी बड़े मंदिरों की तरफ से मदद करनी चाहिए. पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत सहित पूरे देश में ऐसे मंदिर हैं जिनकी दान राशि से सरकारों को काफी हद तक मदद की जा सकती है,  जिसका लाभ देश की जनता को मिलेगा. ऐसा होने से राज्य सरकार को न तो केंद्र से सहायता राशि मांगने की जरूरत पड़ेगी और न ही केंद्र सरकार को विश्व बैंक से मदद राशि मांगने की जरूरत पड़ेगी. 

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉक डाउन कर देशवासियों की कोरोना से रक्षा करना चाहते हैं. इसके साथ ही सरकार स्वास्थ्य सहित अन्य सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की भरसक कोशिश में लगी हुई है. समीर कुमार दास का कहना है कि अपात स्थिति में विभिन्न मंदिरों से भी सहायता की जानी चाहिए. उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस विषय पर ध्यान देंगे. उन्होंने कश्मीर समस्या का हल निकाल कर अहम काम किया है. अब वे देश के नागरिकों को कोरोना से रक्षा करने के प्रयास में जुट गए हैं. हर नागरिक को अपने प्रधानमंत्री पर गर्व है. हम सबको इस आपात की घड़ी में सहायता का हाथ बढ़ाना चाहिए. सिर्फ बड़े मंदिरों या संस्थानों की ही बात नहीं है बल्कि स्थानीय स्तर पर भी समृद्ध लोगों को गरीब दिहाड़ी मजदूरों की मदद के लिए आगे आने की आवश्यकता है.