चीन से दोस्ती निभाने में मशगूल रहा नेपाल, WHO ने किया आगाह तो लगाई आवाजाही पर रोक


चीन से शुरू हुई कोरोना वायरस की महामारी दुनिया के कई देशों तक पांव पसार चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद कई देशों ने चीन से आवाजाही पर रोक लगा दी थी, लेकिन नेपाल दोस्ती निभाता रहा. चीन और जापान से लोगों की आवाजाही धड़ल्ले से जारी रही.

कोरोना वायरस से पीड़ित लोग जब धड़ाधड़ अस्पताल में भर्ती होने लगे और WHO ने नेपाल को उच्च जोखिम वाला देश बताया, तब नेपाल सरकार की नींद खुली. नेपाल सरकार ने अब वह कदम उठाया, जो दुनिया के तमाम देश पहले ही उठा चुके हैं. अब नेपाल ने कोरोना वायरस से प्रभावित चीन और जापान समेत अन्य देशों से आने वाले यात्रियों के लिए वीजा ऑन अराइवल सेवा बंद कर दी है. सरकार ने काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सहित देश के सभी एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की अनिवार्य जांच का भी आदेश दिया है. चीन, जापान कोरिया सहित अन्य‌ कोरोना प्रभावित देशों से आए नागरिकों को 14 दिन की अनिवार्य निगरानी में रखने का भी निर्देश जारी किया गया है.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार ने WHO की अपील के बाद यह कदम उठाया. इस निर्णय की घोषणा ओली कैबिनेट की मीटिंग के बाद की गई. इसके साथ ही सरकार ने चीन और जापान से विमानों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी. इसके लिए हालांकि विमान कंपनियों को सात मार्च तक का समय दिया गया है. कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने अपने नागरिकों से किसी तरह की सभा, सेमिनार, भोज या भीड़ वाले कार्यक्रमों का आयोजन नहीं करने की अपील की है.

गौरतलब है कि नेपाल में एक दिन पहले ही रविवार को पहली बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका के कारण एक ही दिन आठ लोगों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था. इनमें से दो चीन से और दो जापान से लौटे नेपाली नागरिक हैं, जबकि चार चीनी नागरिक हैं. हालांकि किसी के भी बारे में व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा रही है. इसके बाद हरकत में आई सरकार ने आनन-फानन में कैबिनेट की मीटिंग कर यह निर्णय लिया.

चीन की खुशामद कर रही थी ओली सरकार

बता दें कि ओली सरकार के आने के बाद नेपाल और चीन की दोस्ती काफी घनिष्ठ हुई है. चीन में कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद जब दुनिया के तमाम देश आवाजाही रोक रहे थे, तब नेपाल सरकार को लगता था कि उसके ऐसा करने से कहीं पड़ोसी देश के साथ संबंधों पर नकारात्मक असर न पड़ जाए. नेपाल ने चीन से दोस्ती निभाने के फेर में अपने नागरिकों की जिंदगी दांव पर लगा दी. अब, जब कोरोना के संदिग्ध मामले सामने आए और WHO ने चेताया, तब नेपाल सरकार की नींद खुली. गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण चीन में अब तक दो हजार से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है.