झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव जरूरी : सरयू


पूर्वी सिंहभूम: स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में डीबीएमएस हाई स्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षक का उत्थान’ कार्यक्रम में झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर गंभीर मंथन हुआ। उद्घाटन सत्र में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि राज्य में शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था को मजबूत किए बिना नई शिक्षा नीति का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। 

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर, 41 प्रतिशत में पुस्तकालय, 60 प्रतिशत के पास जमीन, 33 प्रतिशत में बाउंड्री और 75 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड की सुविधा नहीं है। कई विद्यालयों में शौचालय, बेंच-डेस्क और पर्याप्त शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर भी उन्होंने चिंता जताई।

मौके पर कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने शिक्षा को देश के विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों को तकनीक, एआई और मशीन लर्निंग से जुड़ने की सलाह दी। नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने गुरु-शिष्य संवाद मजबूत करने पर जोर दिया। एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक गौतम सूत्रधर ने शिक्षा को रोजगार से जोड़ने और आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की बात कही। सोनादेवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाने की जरूरत बताई।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षकों की कमी और समय पर वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की। युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित किया जाएगा। 

कार्यक्रम में डॉ अशोक कुमार सिंह, शशि भूषण दुबे, अंजनी कुमार, मनोज कुमार, डॉ. अमर कुमार सिंह सहित अन्य ने भी विचार रखे। कार्यक्रम से पहले सरयू राय ने स्वर्णरेखा नदी में डूब रही युवती को बचाने वाले जामू शेख और हादसे के बाद मदद के लिए लगातार फोन करने वाले शुभम को सम्मानित किया। मौके पर पवन सिंह, नवनीत सिंह, अमृता मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, प्रेम सक्सेना, प्रवीण सिंह सहित अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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