From Kolkata to Sardarshahar, the Ashish Soni case has raised serious questions about relationships, betrayal and social accountability
Ten Years of Trust, Financial Exploitation and a Shocking Family Pattern
दस साल का भरोसा, आर्थिक शोषण और चौंकाने वाला पारिवारिक पैटर्न
युवा शक्ति, कोलकाता | सरदारशहर
करीब दस वर्ष पहले आशीष सोनी एक बालिग युवक के रूप में अविनाश कसेरा के कोलकाता स्थित कार्यालय में काम करने आया और जल्द ही उनका गहरा विश्वास हासिल कर लिया। धीरे-धीरे यह रिश्ता नियोक्ता-कर्मचारी की सीमा से आगे बढ़कर निजी, भावनात्मक और शारीरिक संबंध में बदल गया।
यह संबंध दस वर्षों से अधिक चला। आशीष सोनी दिन के लगभग 16 से 18 घंटे तक पीड़ित के साथ या संपर्क में रहता था और दोनों 100 से अधिक बार भारत के अलग-अलग शहरों में व्यापारिक, निजी व मनोरंजन यात्राओं पर साथ गए। इस लंबे संबंध से जुड़े बड़ी संख्या में संदेश, तस्वीरें, निजी वीडियो, बातचीत, यात्रा रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल और दस्तावेज़ी रिकॉर्ड मौजूद हैं।
समय के साथ आशीष सोनी ने पीड़ित की आर्थिक और सामाजिक जिंदगी में भी गहरी जगह बना ली। अलग-अलग जरूरतों और परिस्थितियों के नाम पर लगातार पैसे लिए गए, भविष्य में साथ रहने का भरोसा दिया गया और संबंध को स्थायी बताया गया। स्थिति यहां तक पहुंची कि भगवान की प्रतिमा पर हाथ रखकर साथ न छोड़ने और भविष्य में साथ रहने की कसमें तक खाई गईं, जिनके भरोसे पीड़ित वर्षों तक उसकी आर्थिक मदद करता रहा।
इसी बीच आशीष सोनी ने सितंबर 2026 में अपनी शादी की तैयारी शुरू कर दी। शादी की बात आगे बढ़ने के बावजूद उसने लड़की और उसके परिवार की पहचान पीड़ित से छिपाए रखी।
पीड़ित की गैरमौजूदगी में आशीष सोनी और उसके पिता कैलाश चंद सोनी सरदारशहर के एक सोनी परिवार की लड़की के परिवार को पीड़ित का कार्यालय, व्यावसायिक व्यवस्था दिखाने पहुंचे। पूरी व्यवस्था को इस तरह सामने रखा गया कि वास्तविक स्वामित्व और पृष्ठभूमि स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।
इसी दौरान आशीष सोनी लगातार यह कहता रहा कि लड़की का परिवार बहुत कमजोर है और यदि सच्चाई सामने भी आ गई तो वे कुछ नहीं कर पाएंगे। जैसे-जैसे शादी की बात अंतिम चरण में पहुंची, मामला एक टूटते रिश्ते से निकलकर गंभीर विश्वासघात और अपराध की तरफ बढ़ने लगा।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि आशीष सोनी के पिता कैलाश चंद सोनी और मां लीला सोनी इस लगभग दस वर्ष पुराने निजी संबंध और लगातार हुए आर्थिक लेन-देन की जानकारी लंबे समय से रखते थे। इसके बावजूद परिवार आशीष के साथ खड़ा रहा और वर्षों से मिल रही आर्थिक सुविधाओं का लाभ परिवार तक पहुंचता रहा।
शादी की बात अंतिम होते ही परिस्थितियां अचानक बदल गईं। आशीष सोनी ने कहा कि यदि पुराने संबंध और पूरी सच्चाई लड़की के परिवार या दूसरे लोगों के सामने लाई गई तो वह आत्महत्या कर उसका पूरा दोष पीड़ित पर डाल देगा।
इसके बाद स्थिति और गंभीर हुई। आशीष सोनी, उसका बाप कैलाश सोनी, उसकी मां लीला सोनी और उसका छोटा भाई हेमंत सोनी मिलकर पीड़ित को डराने, चुप कराने और रास्ते से हटाने की योजना बना रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े संदेश, रिकॉर्डिंग और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड ने मामले को एक निजी विवाद से कहीं आगे पहुंचा दिया।
इसके बाद आशीष सोनी ने गुपचुप तरीके से मार्च 2026 में उसी सरदारशहर के सोनी परिवार की लड़की से विवाह कर लिया। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि आशीष सोनी शारीरिक रूप से पूर्णतः सक्षम नहीं है और वह इसके उपचार के लिए दवाइयाँ भी लिया करता था।
दस साल का रिश्ता, फिर धमकी और अपराध की कहानी
दस वर्षों से अधिक के प्रतिबद्ध और शारीरिक संबंध, लगातार आर्थिक लाभ, भविष्य के वादे, भगवान के सामने कसमें, छिपाई गई शादी की तैयारी और बाद की धमकियों ने मामले को गंभीर बना दिया। आर्थिक लेन-देन, फ़र्ज़ी दस्तावेज़, दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ और धमकियों के मुद्दे पुलिस तक पहुंचे।
10 मार्च 2026 को फूलबागान पुलिस स्टेशन में FIR/Case No. 46 of 2026 दर्ज हुआ। इसके बाद आशीष सोनी और हेमंत सोनी ने 21 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सियालदह की अदालत में आत्मसमर्पण किया और बाद में ज़मानत पर रिहा किए गए।
अपराध का ‘पारिवारिक इतिहास और आशीष सोनी भी उसी रास्ते पर?
धोखाधड़ी आशीष सोनी के लिए नई बात नहीं है, बल्कि उसके परिवार का पुराना पेशा रहा है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, आशीष के पिता कैलाश चंद सोनी एकाधिक बार हवालात की सैर कर चुका है । साल 2023 में बांसद्रोणी पुलिस ने 15 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी, सोने की चोरी और दस्तावेजों की जालसाजी (धारा 420/467/468/471) के मामले में गिरफ्तार किया था और लगभग एक माह वो हवालात में बंद था। पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए अब बेटे आशीष सोनी ने भी अपने नियोक्ता के साथ वैसी ही घिनौनी साज़िश रची है।
यह केवल एक टूटे रिश्ते की कहानी नहीं
इस पूरे मामले का एक बड़ा सामाजिक और कानूनी पहलू भी है। भारत में लंबे समय तक भारतीय दंड संहिता की धारा 377 का इस्तेमाल दो बालिग व्यक्तियों के बीच सहमति से बने निजी समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने के लिए किया जाता था।
6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट किया कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच सहमति से बना निजी समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि किसी व्यक्ति का यौन रुझान या उसका निजी सहमति वाला संबंध अपने आप में अपराधिता का आधार नहीं बन सकता।
लेकिन भारत में समलैंगिक संबंधों को अभी विवाह जैसी पूरी कानूनी मान्यता और अधिकार नहीं मिले हैं। लंबे रिश्तों में पैसा, भावनात्मक जुड़ाव, निजी जीवन और भविष्य के वादे जुड़े हों तो यह कमी और गंभीर हो जाती है।
दुनिया के कई बड़े देश इससे आगे बढ़ चुके हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड और थाईलैंड सहित 50 से अधिक देशों में समलैंगिक विवाह या उसके समान कानूनी मान्यता मौजूद है।
रिश्ता छोड़ना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन वर्षों तक किसी के विश्वास, पैसे और भावनाओं का फायदा उठाना अलग बात है।
अब फैसला साक्ष्यों का
दस वर्षों से अधिक का शारीरिक संबंध, सैकड़ों यात्राएं, लगातार आर्थिक मदद, भविष्य के वादे, संदेश, तस्वीरें, अंतरंग निजी वीडियो, बातचीत, यात्रा रिकॉर्ड और बाद में सामने आई पूरे परिवार की पीड़ित को जान से मारने की आपराधिक साज़िश—इन सबने मामले को गंभीर कानूनी और सामाजिक सवाल बना दिया है।
अब जांच पैसों के लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज़, संदेश, रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि आर्थिक शोषण, धोखाधड़ी, धमकी या दबाव साबित होते हैं, तो कानून को मजबूती से कार्रवाई करनी होगी। क्योंकि आत्मीयता और विश्वास किसी को दूसरे की जिंदगी, भावनाओं और आर्थिक संसाधनों से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं देते। ऐसे मामलों को गंभीरता से न लेने पर और लोग भी भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं।
मार्च 2026 में मामला सामने आने के बाद यह प्रकरण कोलकाता से सरदारशहर तक चर्चा का विषय बन गया। कई समाचार पत्रों और ऑनलाइन पोर्टलों ने इसे प्रमुखता से उठाया, जबकि मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। समाज के अनेक जिम्मेदार लोगों ने आशीष सोनी और उसके परिवार के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित के लिए न्याय की मांग की।


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