नेपाल जलप्रलयः मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा का सुराग नहीं, खत्म हो रही लौटने की उम्मीद


कोलकाता: नेपाल में आई बाढ़ के बाद लापता हुईं पूर्व रेलमंत्री मुकुल राय की बहू शर्मिष्ठा राय भौमिक का 11 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है और अब उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी है। कांचरापाड़ा स्थित राय परिवार के घर में हर दिन एक ही सवाल गूंज रहा है - शर्मिष्ठा कब लौटेंगी?

शर्मिष्ठा 21 अगस्त को 32 लोगों के एक दल के साथ नेपाल घूमने गई थीं। वहां पहुंचने के बाद वह लगातार पति, बच्चों और मां से फोन तथा वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में थीं। परिवार के मुताबिक, बाढ़ के बाद अचानक उनसे संपर्क टूट गया। इसके बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

शर्मिष्ठा के 10 वर्षीय बेटे को अब भी मां के लौटने का इंतजार है। वह बार-बार पिता और बड़ी बहन से पूछता है कि मां की कोई खबर मिली या नहीं। 16 वर्षीय बेटी खुद को संभालते हुए छोटे भाई को भी संभाल रही है, लेकिन मां के बारे में पूछे जाने पर वह भी भावुक हो जाती है।

मां के लापता होने के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अब शुभ्रांशु राय और शर्मिष्ठा की मां संभाल रही हैं। बेटी के लापता होने की खबर मिलने के बाद शर्मिष्ठा की बुजुर्ग मां भी बेलघरिया स्थित अपना घर छोड़कर कांचरापाड़ा आ गई हैं। परिवार के करीबी लोग भी बच्चों की देखभाल में जुटे हैं।

राजनीतिक परिवार का हिस्सा होने के बावजूद शर्मिष्ठा खुद राजनीति की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करती थीं। परिवार, बच्चों और अपने कामकाज में ही उनका अधिकांश समय बीतता था। दोनों बच्चों की पढ़ाई, स्कूल और अन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी वह खुद संभालती थीं। परिवार के निजी स्कूल, पॉलीक्लिनिक और नेत्र जांच केंद्र से जुड़े कामकाज में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

मुकुल के बेटे शुभ्रांशु राय और शर्मिष्ठा की मुलाकात कल्याणी के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोस्ती आगे चलकर प्रेम में बदली और करीब 2009 में दोनों ने शादी कर ली। उनके दो बच्चे हैं, जो बैंडेल के एक निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ते हैं।

शर्मिष्ठा को घूमने का भी काफी शौक था। करीब डेढ़ साल पहले वह दोनों बच्चों के साथ लद्दाख घूमने गई थीं। नेपाल यात्रा के बाद भी उन्होंने बच्चों के साथ विदेश जाने की योजना बनाई थी। लेकिन नेपाल से लौटने से पहले ही उनका परिवार से संपर्क टूट गया।

अब 11 दिन बीत चुके हैं। घर में रोजमर्रा की गतिविधियां तो चल रही हैं, लेकिन शर्मिष्ठा की गैरमौजूदगी हर पल महसूस हो रही है। बच्चों की निगाहें मां के लौटने के इंतजार में हैं और परिवार अब भी किसी अच्छी खबर की उम्मीद लगाए बैठा है। मगर जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उस उम्मीद पर भी चिंता की परछाई गहराती जा रही है।पश्चिम बर्दवान: पश्चिम बंगाल सरकार की शहरी विकास मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और सभी प्रकार की अवैध गतिविधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न के साथ-साथ आम नागरिकों पर अत्याचार, राजनीतिक कारणों से लोगों को प्रताड़ित करना, जमीन और मकान पर अवैध कब्जा करना तथा विरोध करने वालों को कथित रूप से झूठे मामलों में फंसाने जैसी गतिविधियों को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रविवार को आसनसोल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेवा केंद्र के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अग्निमित्रा पाल ने कहा कि अत्याचार केवल महिलाओं के खिलाफ ही नहीं हुआ, बल्कि आम लोगों को भी विभिन्न कारणों से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने या अपने अधिकारों की मांग करने के कारण परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी की जमीन या मकान पर कब्जा किया गया और उसने इसका विरोध किया, तो उसे कथित तौर पर मामलों के जरिए दबाने का प्रयास किया गया।

मंत्री ने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति हर उस गतिविधि पर लागू होगी जो गैरकानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान कई अवैध कामों को व्यवस्था का हिस्सा बनाकर वैध स्वरूप देने का प्रयास किया गया।

बारानगर में अवैध इमारतों के मुद्दे का उल्लेख करते हुए अग्निमित्रा पाल ने कहा कि हाल के दिनों में कई अवैध इमारतों को गिराए जाने के बाद निर्माण व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए कम मंजिलों का नक्शा स्वीकृत कराया जाता था, जबकि बाद में कथित तौर पर अधिक मंजिलों का निर्माण कर दिया जाता था।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन के लिए चार मंजिल का नक्शा और उसी के अनुरूप नींव स्वीकृत है, लेकिन बाद में आठ मंजिल तक निर्माण किया जाता है, तो यह गंभीर मामला है। मंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसी अनियमितताओं के पीछे एक संगठित व्यवस्था काम करती रही है और निर्माणकर्ताओं से कथित तौर पर अतिरिक्त राशि वसूली जाती रही।

अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण जैसी गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कानून का पालन सुनिश्चित करना और आम लोगों को भय तथा अत्याचार से मुक्त वातावरण देना है।

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