तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न और पार्टी कोष पर अधिकार को लेकर चल रहे विवाद में शीघ्र निर्णय की मांग करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि मामले को लंबा समय बीत चुका है और आयोग को इस पर जल्द फैसला करना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर टूट हुई थी। पार्टी के कई विधायक बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए। वहीं, तृणमूल के अधिकांश सांसद नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया का रुख कर गए, जबकि राज्यसभा के तीन सदस्य सीधे भाजपा में शामिल हो गए।
बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी के चुनाव चिह्न और कोष पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों के बीच विवाद शुरू हो गया। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को जुलाई के अंतिम सप्ताह तक अपने-अपने दस्तावेज और दावे के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
ममता गुट की ओर से सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने आवश्यक दस्तावेज आयोग के समक्ष जमा किए थे। दूसरी ओर, ऋतब्रत खेमे ने दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। इस पर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए सवाल किया था कि दूसरे पक्ष को अतिरिक्त समय क्यों दिया जा रहा है।
इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा और पूरी प्रक्रिया कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूरी की जाएगी।
माना जा रहा था कि 15 अगस्त तक तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न और पार्टी कोष से जुड़े इस विवाद का निपटारा हो जाएगा। हालांकि, अगस्त समाप्त होने के बावजूद चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब ममता बनर्जी ने एक बार फिर आयोग को पत्र लिखकर मामले में शीघ्र फैसला करने की मांग की है।

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