तारापीठ होटल अग्निकांड में दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे गंभीर सवाल


कोलकाता: बीरभूम के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारापीठ स्थित होटल ‘विदेशिनी’ में हुए भीषण अग्निकांड में नौ लोगों की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ होटल प्रबंधन की लापरवाही तक सीमित नहीं हैं। इस हादसे ने पश्चिम बंगाल सरकार के दमकल विभाग की कार्यप्रणाली और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस होटल को अग्नि सुरक्षा संबंधी मंजूरी कैसे मिली और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को ऐसी गंभीर खामियां क्यों नजर नहीं आईं?

सोमवार तड़के लगी आग ने देखते ही देखते होटल के भीतर भयावह रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोगों ने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की तो सामने आग की लपटें थीं। कुछ लोग जान बचाने के लिए कमरे बंद कर अंदर ही फंसे रहे। बताया गया कि कई कमरों में खिड़कियां भी नहीं थीं। होटल के पीछे सुरक्षित रास्ता मौजूद होने की बात सामने आई है, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण अंधेरे में कई लोग उस रास्ते को तलाश नहीं सके।

इस घटना के बाद दमकल विभाग द्वारा किए जाने वाले अग्नि सुरक्षा निरीक्षण की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। दमकल विभाग के पूर्व अधिकारी उदय नारायण अधिकारी का कहना है कि राज्य में आग की बड़ी घटनाओं के बाद कई जांच समितियां बनती हैं, लेकिन उनकी सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जाता। उनका मानना है कि किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय नियमित रूप से इमारतों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी इलाके में सीमित संख्या में दमकल स्टेशन हैं और आग लगने पर बचाव कार्य करने वाले अधिकारी ही अग्नि सुरक्षा निरीक्षण भी करते हैं, तो नियमित और प्रभावी निगरानी किस तरह संभव होगी। उनके अनुसार, कई बार निरीक्षण और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर रह जाता है। उन्होंने कुछ मामलों में पैसे लेकर अनुकूल रिपोर्ट दिए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया है।

दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि नियमों के अनुसार संबंधित संस्थान को सूचना देकर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया जाता है। उनका आरोप है कि कई बार निरीक्षण से पहले ही संस्थान अपनी व्यवस्था को कागजों और मौके पर दुरुस्त दिखाने की तैयारी कर लेते हैं। बाद में स्थिति बदल जाती है और आपात स्थिति में वही सुरक्षा व्यवस्था नाकाम साबित होती है।

तारापीठ की घटना में अब जांच का विषय है कि होटल में अग्नि सुरक्षा के लिए स्वीकृत व्यवस्था वास्तव में मौजूद थी या नहीं। क्या आपातकालीन निकास पर्याप्त थे? क्या पीछे का दरवाजा खुला था? क्या कमरों में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था थी? क्या आग लगने की स्थिति में लोगों को बाहर निकालने के लिए जरूरी संकेत और प्रकाश व्यवस्था मौजूद थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने त्रासदी को और गहरा कर दिया है। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। बताया गया है कि परिवार होटल की ऊपरी मंजिल पर ठहरा हुआ था और आग लगने के बाद नीचे उतरने की कोशिश के दौरान आग की चपेट में आया।

पुलिस ने होटल मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों तथा नियमों के पालन की जांच की जा रही है। होटल से 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि सात लोगों का इलाज रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहा है।

जिला प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि होटल में अग्नि सुरक्षा मैनेजमेंट को लेकर दमकल विभाग की भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। हालांकि इस होटल को ममता बनर्जी के जमाने में ही फायर सेफ्टी लाइसेंस मिला था। होटल मालिक का तत्कालीन तृणमूल नेता अणुव्रत मंडल के साथ भी करीबी संबंध होने की बात भी सामने आई है।

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