कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई के 'शहीद दिवस' पर इस बार राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। कोलकाता में महज ढाई किलोमीटर के दायरे में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों और प्रदेश कांग्रेस की अलग-अलग सभाएं आयोजित हो रही हैं। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही मंच तोड़फोड़, पोस्टर-बैनर फाड़ने, कार्यकर्ताओं को रोकने और वाहनों में तोड़फोड़ के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट बिरला तारामंडल के सामने 'शहीद स्मरण' कार्यक्रम कर रहा है, जबकि विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाला गुट मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के पास सभा आयोजित कर रहा है। वहीं प्रदेश कांग्रेस की सभा शहीद मीनार मैदान में हो रही है। ममता बनर्जी अपने कार्यक्रम के मंच के पास रात भर बैठी रहीं ताकि कोई मंच ना तोड़ सके।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी सभा को विफल करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और शहीद परिवारों को सभा में आने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंच को नुकसान पहुंचाया गया, पोस्टर-बैनर फाड़े गए और ध्वनि व्यवस्था की तारें काट दी गईं। ममता ने इन घटनाओं के लिए भाजपा पर आरोप लगाया और कहा कि यदि प्रशासन ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर वह स्वयं भी इस मामले में पक्षकार बनेंगी। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने भी एक्स पर आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों से कोलकाता आ रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के वाहनों को रोककर उनमें तोड़फोड़ की जा रही है।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस ने भी भाजपा पर अपने कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार, सोमवार रात दुर्गापुर के मुचीपाड़ा में कोलकाता आ रही कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बस में तोड़फोड़ की गई। पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर में भी इसी तरह की घटना होने का आरोप लगाया गया है।
इस बीच, मंगलवार सुबह मेयो रोड स्थित ऋतब्रत गुट की सभा में तृणमूल के कुछ कार्यकर्ता भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वे रास्ते में सभा स्थल देखने आए थे और उनका अंतिम गंतव्य ममता बनर्जी की सभा है। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न एक ही है, इसलिए वे दोनों सभाओं में शामिल होने के लिए कोलकाता आए हैं। कोलकाता में एक ही दिन तीन बड़े राजनीतिक आयोजनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि 2011 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर 2026 में राज्य की मुख्यमंत्री रहने के पहले तक ममता बनर्जी ने धर्मतल्ला के मुख्य चौराहे पर विशाल मंच बनाकर यह कार्यक्रम किया था, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल होते थे। हालांकि इस बार शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। उन्हें वैकल्पिक जगह उपलब्ध करवाई गई है।

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