कोलकाता में 'ककरोच जनता पार्टी' के विरोध मार्च पर भाजपा की आपत्ति


कोलकाता: कोलकाता में 'ककरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) द्वारा प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा ने इस आंदोलन पर आपत्ति जताई है, जबकि ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया है।

नीट प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी दिल्ली में आंदोलन कर रही है। इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है। कई दिनों से अनशन और विरोध प्रदर्शन जारी है। सरकार और सीजेपी के बीच वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। दिल्ली में इस आंदोलन के समर्थन में कई कलाकार और विपक्षी दल भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसी क्रम में सीजेपी ने कोलकाता में भी मार्च निकालने की योजना बनाई है। संगठन के सदस्य होने का दावा करने वाले देदीप्य गांगुली ने कोलकाता पुलिस को 24 जुलाई को रैली की अनुमति देने के लिए पत्र भेजा है। हालांकि, उनका कहना है कि अब तक पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

प्रस्तावित मार्च कॉलेज स्ट्रीट से रानी रासमणि एवेन्यू तक निकाला जाना है, जिसमें करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। देदीप्य गांगुली का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कई बार ई-मेल भेजा, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के बेलियाघाटा विधायक कुणाल घोष ने सीजेपी के समर्थन में कहा कि कोलकाता पुलिस को रैली की अनुमति देनी चाहिए। उनके अनुसार, यह छात्रों के हित से जुड़ा मुद्दा है और जब देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कोलकाता में अनुमति नहीं देने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार इसे नहीं छीन सकती।

वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और किसी प्रकार की अशांति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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