बिहार आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पर तीखा हमला बोला है. हाजीपुर पहुंचे चिराग ने तेजस्वी की हालिया 'खामोशी' को उनकी कमजोरी बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद भी वे अपनी भूमिका से भाग रहे हैं, जो कतई शोभा नहीं देता.
चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव को 'जिम्मेदारियों से भागने वाला' नेता करार दिया. उन्होंने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्ष पूरी तरह हताश हो चुका है और मैदान से गायब है. चिराग के अनुसार, 'एक नेता का असली काम कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना होता है, लेकिन तेजस्वी उनसे संवाद तक नहीं कर रहे. सदन की कार्यवाही से दूरी बनाना और जनता के बीच न जाना यह दर्शाता है कि वे अपनी नेतृत्व क्षमता खो चुके हैं.'
राज्यसभा चुनाव के दौरान विपक्षी खेमे में मचे घमासान का जिक्र करते हुए चिराग ने दावा किया कि आरजेडी और कांग्रेस के भीतर बड़ा विद्रोह पनप रहा है. उन्होंने तंज कसा कि जो नेता अपनी ही पार्टी के विधायकों को सहेज कर नहीं रख सकता, वह प्रदेश की कमान क्या संभालेगा? चिराग ने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस के आधे विधायकों का गायब होना इस बात का सबूत है कि असंतोष पूरे महागठबंधन में फैल चुका है.
चिराग पासवान के इस बयान ने बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब प्रदेश परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा है, तब मुख्य विपक्षी दल के नेता का गायब होना उनकी गैर-जिम्मेदाराना राजनीति को दर्शाता है. अब गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या तेजस्वी की यह अनुपस्थिति किसी बड़ी टूट का संकेत है? क्या चिराग का यह दावा सच साबित होगा कि महागठबंधन जल्द ही पूरी तरह बिखरने वाला है?

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