नई दिल्ली: भारत ने नेपाल में जारी विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों पर दुख व्यक्त किया है और आशा जताई है कि सभी पक्ष हर मुद्दे का शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालेंगे। साथ ही भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
भारत ने विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर मंगलवार को अपनी प्रतिक्रिया दी।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों के खिलाफ युवाओं ने नेपाल के कई शहरों में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। इसके चलते कई लोगों की मौत और कई अन्य के घायल हुए।
भारत ने कहा कि एक करीबी मित्र और पड़ोसी होने के नाते हम आशा करते हैं कि सभी पक्ष संयम बनाए रखेंगे और शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के माध्यम से किसी भी मुद्दे का समाधान करेंगे। मंत्रालय ने नेपाल के काठमांडू और अन्य शहरों में लगाए गए कर्फ्यू का भी संज्ञान लिया है और भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने तथा प्रशासन द्वारा बताए गए दिशा-निर्देओशों का पालन करने की सलाह दी है।
हिंसक घटना पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने नेपाल में प्रदर्शनकारियों की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए इस घटना की त्वरित और पारदर्शी जांच करने का आग्रह किया है।
ओएचसीएचआर प्रवक्ता रवीना शमदासानी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान मौतों की खबरों से वह "स्तब्ध" है। बयान में कहा गया है, "हम नेपाल में प्रदर्शनकारियों की मौत और हिंसक घटना की त्वरित और पारदर्शी जांच का आह्वान करते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार के प्रतिबंधों बाद युवाओं का यह विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए इसकी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार, रिपोर्ट से पता चलता है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन के दौरान अनावश्यक बल का उपयोग किया।
शमदासानी ने कहा कि "बल प्रयोग, विशेष रूप से आग्नेयास्त्रों के प्रयोग में मौलिक अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। हम अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का सम्मान करने और उन्हें सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।"
ओएचसीएचआर ने नेपाल सरकार को उसके अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों की भी याद दिलाई है और सुरक्षा कर्मियों द्वारा बल प्रयोग में जवाबदेही का आह्वान किया है।

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