उम्मीदों का ड्रोन उड़ा आसमान में! लागत में आएगी कमी, बचाएगा समय, दवा और उर्वरकों की छिड़काव होगा आसान

बिहार का एक सुदूर गांव में खेतों के आसपास सैकड़ों की संख्या में किसान जुटे हुए थे।उनकी कौतूहल निगाहें एक मशीन पर टिकी हुई थी। दरअसल बिहार के बिक्रम प्रखंड में पहली बार धान के खेतों में ड्रोन का प्रयोग करके दवा का छिड़काव किया जा रहा था। शाम होने को था और किसान बेसब्री से ड्रोन का उड़ने का इंतजार कर रहे थे। अचानक  तेज आवाज के साथ ड्रोन ने उड़ान भरी और सबके चेहरों पर मुस्कान छा गया। महज 7 मिनट में ड्रोन ने एक एकड़ खेत में दवा छिड़काव का काम कर दिया।


अब तक जिस काम में किसान को घंटों बिताने पड़ते थे। सैकड़ों लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाता था। किसान किचन से भरे उबड़ खाबड़ सतहों पर से तमाम मुश्किलातों का सामना करते हुए इस कठिन काम को करते आए थे। ड्रोन ने पलक झपकते इस काम को अंजाम तक पहुंचा दिया।गांव के प्रगतिशील किसान लालबाबू शर्मा ने बताया कि  घने और लंबे फसल के बीच दवा छिड़काव का काम कठिनाइयों से भरा हुआ होता हैं। मसलन लंबे गन्ने के खेतों में और आम की ऊंची बागवानी में दवा छिड़काव तो लगभग असंभव ही हो जाता है। ड्रोन के उपयोग से चीजें बेहद आसान हो जायेगी।


आवाज एक पहल संस्था के तरफ किसानों को यह ड्रोन मुफ्त में उपलब्ध कराई गई । संस्था के संस्थापक सदस्य लवकुश शर्मा ने बताया की ड्रोन की मदद से कीटनाशक, उर्वरक समेत अन्य घुलनशील पदार्थों की छिड़काव किया जा सकता है।


एक एकड़ खेत में छिड़काव के लिए ड्रोन को महज 10 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, वही आमतौर पर किसान इतने ही जमीन के लिए 60 लीटर से अधिक पानी का इस्तेमाल करते हैं। ड्रोन की तकनीक दवा के इस्तेमाल में भी 30% कमी लाती है। इसके मदद से ऊंचे से ऊंचे और सघन फसलों में छिड़काव का काम आसान हो जाता हैं।

© लवकुश

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