चलली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार

 नमामि गंगे कार्यक्रम

लोक चेतना के लिए लोकगीत और लोककथाएं सशक्त माध्यम  : नीतू नवगीत


पटना   जन जागृति में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लोकगीतों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से हम आम लोगों तक अपनी बात सशक्त तरीके से पहुंचा सकते हैं। नेहरू युवा केंद्र संगठन राज्य निदेशालय द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम में युवाओं की सहभागिता पर आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय स्तर प्रशिक्षण सह कार्यशाला में विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका और पटना नगर निगम स्वच्छता अभियान की ब्रांड एंबेसडर डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि स्वच्छ,निर्मल, पावन गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति और विरासत का हिस्सा है। जनचेतना के लिए सूचना, शिक्षा और संवाद का सुंदर संयोजन जरूरी है । संवाद के विभिन्न माध्यमों की विस्तार से जानकारी देते हुए बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि किसी भी पवित्र उद्देश्य से लोगों को जोड़ने के लिए मीडिया के हर माध्यम का उपयोग जरूरी है । स्लोगन, शॉर्ट वीडियो फिल्म, जिंगल, सोशल मीडिया कंटेंट, पेंटिंग, कोलाज, लोक कथा, लोक गीत, भाषण वाद-विवाद इत्यादि संप्रेषण के ऐसे तरीके हैं जो काफी प्रभावशाली होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकमानस में गंगा की पूजा मां के रूप में की जाती है। हम मानते रहे हैं कि जैसे घर में मां हमारी देखरेख करती हैं, वैसे ही गंगा मैया करोड़ों लोगों  की जरूरतों और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए धरती पर अवतरित हुईं। गोमुख से गंगासागर तक की यात्रा के दौरान वह सब को एक मां के रूप में दुलारती हैं और उनका पोषण करती हैं। नमामि गंगे कार्यक्रम में लोक गायिका नीतू नवगीत ने गंगा मईया एवं स्वच्छता पर आधारित लोकगीत कैसे लिखे जाएं ,लोगों को अपने गीतों के माध्यम से कैसे जोड़ा जाए और किस तरह स्वच्छता को लेकर जागृति फैलायी जाए, इन सभी चीजों की सैद्धांतिक व लिखित जानकारी के साथ-साथ मां गंगा से जुड़े कई सारे लोकगीत जैसे हे गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाइबो, चलेली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार, भितरा से घहरेलू गंगा मैया ऊपरा बहे हो धार ,शिव के जटा से अईलू परल जटाशंकरी नईया,हे गंगा मैया हे गंगा मैया, दूध अइसन जलधार बा हो गंगा मैया धन तोर महिमा अपार बा, गंगा बहती हो क्यूँ, मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी जैसे गीतों का प्रयोग लोक संवाद में किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में हारमोनियम पर सुजीत कुमार, नाल पर भोला कुमार और पैड पर पिंटू कुमार ने संगत किया। कार्यक्रम में नेहरू युवा केंद्र के राज्य निवेशक अंशुमन प्रसाद दास ने कहा कि गंगा नदी की पत्रिका और स्वच्छता को बनाए रखना हम सब का दायित्व है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त निदेशक डॉ गोपाल शर्मा ने ने कार्यशाला को संबोधित किया। कार्यक्रम का संयोजन नमामि गंगे के राज्य परियोजना सहायक पवन कुमार सौरभ ने किया। समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया।