बिहार में शराबबंदी पर विवाद तेज, बीजेपी और जेडीयू आमने-सामने


बिहार में जहरीली शराब पीने हो रही लगातार मौतों पर सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के दो घटक दल बीजेपी और जेडीयू में ठन गई है। गरीब तबके के लोगों की मौत के बाद जहां बीजेपी ने शराबबंदी के कानून की समीक्षा की डिमांड कर दी है वहीं जेडीयू ने किसी भी सूरत में इस कानून के लागू रहने की बात कही है। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों दलों के कद्दावर नेताओं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने संपूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर अलग-अलग बयान दिया है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायवाल ने शनिवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता है ही, हर हाल में रिव्यू करने की आवश्यकता है। यह एक बहुत अच्छे उद्देश्य से और महिलाओं के पक्ष में लाया हुआ एक बहुत ही बढ़िया प्रयास मुख्यमंत्री के द्वारा है। प्रशासन अपने स्तर पर मेहनत भी कर रहा है। जहां शराबबंदी नहीं है वहां भी अवैध शराब बनते हैं। वहां भी इस तरह की घटनाएं होती हैं। इसलिए इस घटना को केवल शराबबंदी से जोड़ना सही नहीं है। कई स्थानों पर प्रशासन की भूमिका संदेहास्पद है, उसके बारे में बिहार सरकार को जरूर चिंता करनी चाहिए।' जेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि शराबबंदी कानून को लागू हुए 5-6 साल हो चुके हैं, इसकी क्या सफलता और असफलता रही इसपर जरूर एक विचार और एक सोच होनी चाहिए।

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, 'शराबबंदी कानून लागू है और लागू रहेगा। जो डेथ हो रही है उसकी जांच हो रही है। गोपालगंज में जहरीली शराब कांड हुआ था, कितने लोगों की सजा हुई। उदाहरण सबके सामने है। हत्या के लिए कानून फांसी बना हुआ है। फिर भी लोग हत्या करते हैं ना। गिरफ्तार होते हैं तो फांसी होती है। कानून का उल्लंघन कीजिएगा फांसी होगी सजा होगी। जो कानून में प्रावधान है वह लागू होगा।'

वहीं जेडीयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने संजय जायसवाल के बयान पर कहा कि निश्चित तौर पर 16 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो समीक्षा बैठक करने जा रहे हैं, उसमें शराबबंदी कानून में और क्या बदलाव लाए जा सकते हैं, जागरूकता के लिए क्या कुछ किया जा सकता है इस पर विचार करेंगे।