राज्यों ने नहीं किया भुगतान तो दोबारा हो सकता है कोयला संकट: बिजली मंत्री आरके सिंह


पिछले कुछ महीनों से देश में जो कोयला संकट सामने आया था, वह काफी हद तक काबू में आ गया है। बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति लगातार बढ़ रही है और कोयले की कमी से किसी भी हिस्से में बिजली संकट की आशंका नहीं है। लेकिन अगर राज्यों ने समय पर कोयले की कीमत का भुगतान नहीं किया तो कोयला संकट फिर से पैदा हो सकता है। यह बात बिजली मंत्री आरके सिंह ने मौजूदा संकट को सामने रखते हुए कही। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) को भी बिजली संयंत्रों को बकाये राशि का भुगतान करना होगा क्योंकि देश में बिजली मुफ्त में नहीं दी जा सकती।

बिजली मंत्री ने कोयला संकट को जरूरत से ज्यादा तूल देने के लिए कुछ राज्यों को भी आडे़ हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने जान-बूझकर कोयला संकट को एक बड़े मुद्दे के तौर पर प्रचारित किया लेकिन वैसी स्थिति नहीं थी। कुछ राज्यों के पास अपना कोल ब्लाक है लेकिन उसके खनन को लेकर वह उनका खनन नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि कई राज्यों पर कोयला कंपनियों का 16,000 करोड़ रुपये बकाया है। दूसरी तरफ कोयला कंपनियों को कई तरह के खर्चे उठाने पड़ते हैं। ऐसे में राज्यों की तरफ से भुगतान नहीं किए जाने से कई समस्याएं खड़ी होती हैं। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) पर ही बिजली संयंत्रों का 75,000 करोड़ रुपये बकाया है। इसे बनाए नहीं रखा जा सकता है।

हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोयला संकट खत्म हो चुका है और अभी ताप बिजली घरों के पास 81 लाख टन कोयला है। सरकारी एजेंसी सीईए के अनुसार 135 ताप बिजली घरों के पास 81 लाख टन कोयला है जो उनके लिए चार दिनों का स्टाक है। पिछले शनिवार को 62 प्लांट के पास चार दिनों से कम का कोयले का स्टाक था। अब सिर्फ 49 प्लांट के पास चार दिनों से कम का कोयला है। दो हफ्ते पहले 72 प्लांट के पास चार दिनों से कम का कोयला था। लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान बिजली उत्पादन व खपत की स्थिति देखें तो स्पष्ट है कि देश में मांग से अधिक बिजली की आपूर्ति हो रही है। पावर एक्सचेंज में बिजली की कीमत जो कुछ हफ्ते पहले 20 रुपये प्रति यूनिट थी अब घट कर पांच रुपये से भी नीचे आ गई है।