Lakhimpur Kheri violence: फिर गवाहों के बयान को लेकर फंसा पेंच, सुनवाई टली


सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुनवाई हुई। इस बार फिर से गवाहों के बयान दर्ज से संबंधित पेंच अड़ता नजर आया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यूपी सरकार की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे से पूछा, 'घटना के वक्त सैकड़ों लोग थे। उनमें सिर्फ 23 ही चश्मदीद हैं?' दरअसल,  यूपी के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में कहा, '30 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने हो चुके हैं। उनमें 23 प्रत्यक्षदर्शी हैं।' साल्वे ने आगे बताया कि हमने गवाही के लिए विज्ञापन जारी भी किया। वीडियो सबूत भी मिले हैं। जांच जारी है।
 
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में हुई हिंसक घटना में चार किसानों और एक पत्रकार सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी। अदालत ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है और पिछली सुनवाइयों में जांच में असंतोषजनक एक्शन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की खिंचाई भी की। इस मामले में केंद्रीय मंत्री का बेटा भी मुख्य आरोपियों में शामिल है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ पूछा कि वहां 4-5 हजार लोग थे। सब स्थानीय थे क्या? इसपर वकील साल्वे ने हां बोलते कहा कि बस कुछ ही लोग दूसरे राज्य के थे। कोर्ट ने कहा कि वह लोग जांच को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं। फिर उनकी पहचान में क्या दिक्कत हो रही है?

शीर्ष अदालत ने कहा, 'गंभीर गवाहों की पहचान जरूरी है। वीडियो का परीक्षण जल्दी करवाइए, नहीं तो हमें लैब को निर्देश देना होगा।' वहीं, गवाहों की सुरक्षा की भी बात कही गई। इसके अलावा इस बार अदालत ने कहा कि राज्य की तरफ से दाखिल हुई रिपोर्ट में जांच में प्रगति होती दिखी है। हम गवाहों की सुरक्षा का निर्देश देते हैं और सभी के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाए जाएं।

उधर सुनवाई के दौरान घटना में मारे गए श्याम सुंदर की पत्नी रूबी देवी और पत्रकार रमन कश्यप के परिवार ने जांच सही से न होने की शिकायत की है। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर यूपी सरकार से रिपोर्ट देने को कहा है। अगली सुनवाई 8 नवंबर के लिए टाल दी गई।

पिछले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की खिंचाई करते हुए जांच की धीमी रफ्तार और मंशा पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को अभियुक्तों की गिरफ्तारी, अभियुक्तों की पुलिस और न्यायिक हिरासत की स्थिति तथा गवाहों व पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवालों में घेरते हुए कहा, 'हमें लगता है कि आप देरी करने के लिए धीमी गति अख्तियार किए हैं। कृपया इस धारणा को दूर करें।'

वहीं, पिछली बार यूपी सरकार की ओर से पेश वकील से वार्तालाप करते हुए इस हिंसा के संबंध में दो मामले गिनाए थे। एक किसानों को गाड़ी से रौंदने का है और दूसरा तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या का है, जिसमें जांच थोड़ी मुश्किल है क्योंकि भीड़ से अभियुक्तों की शिनाख्त करानी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों मामलों को अलग कर देंगे। यहां सिर्फ किसानों को गाड़ी से रौंदने पर सुनवाई हो रही है।