Kisan Andolan: AAP-अकाली दल आज मना रहे काला दिवस, बैरिकेडिंग से दिल्ली में जगह-जगह जाम

तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) शुक्रवार को 'काला दिवस' मना रहे हैं। इसको लेकर दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न मार्गों पर डायवर्जन करने के साथ सुरक्षा भी कड़ी गई है।  दिल्ली यातायात पुलिस ने झाड़ोदा कलां बार्डर को किसान आंदोलन की वजह से बैरिकेडिंग लगा कर बंद कर दिया है। इसके साथ ही लोगों को कहा है कि कृपया इस मार्ग के प्रयोग से बचें। 

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नई दिल्ली जिला के डीसीपी दीपक यादव ने बताया कि शिरोमणि अकाली दल द्वारा आयोजित किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के लिए यहां कुछ लोग जमा हुए हैं। हम उनके नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं और स्पष्ट रूप से सूचित किया है कि विरोध प्रदर्शन करने की कोई अनुमति नहीं है।

आइटीओ और मिंटो रोड पर जाम लगा हुआ है।

किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने बड़ा फैसला लिया है। इसके मुताबिक, पंडित श्री राम शर्मा और बहादुरगढ़ मेट्रो स्टेशन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। 

बैरिकेडिंग के चलते आइटीओ, प्रगति मैदान समेत कई इलाकों में जाम की स्थिति बन गई है।

वहीं, तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के एक साल पूरे होने पर शिरोमणि अकाली दल द्वारा घोषित 'ब्लैक फ्राइडे प्रोटेस्ट मार्च' को देखते हुए दिल्ली के शंकर रोड पर भी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। यहां पर प्रदर्शनकारियों के बीच बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात हैं। दरअसल, शिअद कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज से संसद भवन तक मार्च की योजना बनाई है।

उधर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व में गुरुद्वारा रकाब गंज से संसद तक शुक्रवार को होने वाले विरोध मार्च के कारण कोरोना वायरस फैल सकता है। ऐसे में नई दिल्ली जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है।

उधर, दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली-हरियाणा सीमा पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यूपी बार्डर पर भी सुरक्षा चाक चौबंद की गई है।

बैरिकेडिंग  और रूट डायवर्जन के चलते इन इलाकों में लगा जाम

यूपी गेट

आइटीओ

धौला कुआं

आश्रम

आनंद विहार

प्रगति मैदान

बता दें कि आम आदमी पार्टी कृषि कानूनों के खिलाफ़ चल रहे आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए समूचे पंजाब में शुक्रवार को कैंडल मार्च भी निकाल रही है। AAP नेताओं की मानें तो देशभर में तीनों काले केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों में गुस्सा है। AAP का कहना है कि 17 सितंबर, 2020 को संसद में तीनों काले केंद्रीय कृषि विधेयक पारित हुए थे, इसलिए 17 सितंबर को काला दिवस के रूप में मनाया जा रहा।