Mukul Roy: अब मुकुल राय को छोड़ना होगा दिल्ली स्थित सरकारी आवास

अब मुकुल राय को दिल्ली स्थित सरकारी आवास छोड़ना होगा। तृणमूल कांग्रेस के आवेदन को राज्यसभा हाउस कमेटी ने खारिज कर दिया है। बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मुकुल राय भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लौट चुके हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए आधिकारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में शामिल हो गए। इसके बाद मुकुल को दिल्ली के 181 साउथ एवेन्यू स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया था। उन्हें सरकारी आवास खाली करने का पहला नोटिस राज्यसभा सचिवालय की ओर से 19 जुलाई को जारी किया था, उन्होंने नियत समय पर भी मकान खाली नहीं किया तो दूसरा नोटिस 28 जुलाई को जारी किया गया। इस नोटिस के बाद से तृणमूल कांग्रेस नेता सक्रिय हो गए। सूत्रों के मुताबिक, मुकुल आवास नहीं छोड़ना चाहते है, क्योंकि वह इस पते पर काफी समय से रह रहे हैं।

उन्होंने अपनी मौजूदा पार्टी के नेताओं को अपनी इच्छा के बारे में भी बताया। इसके बाद तृणमूल की राज्यसभा सदस्य डोला सेन ने सबसे पहले राज्यसभा हाउस कमेटी से आवेदन किया कि मुकुल को उनके अतिथि के रूप में उक्त आवास में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन उस आवेदन को राज्यसभा हाउस कमेटी ने खारिज कर दिया। तब यही अनुरोध तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा में मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर राय ने भी किया। उक्त आवेदन को भी हाल ही में खारिज कर दिया गया है। फिर तृणमूल कांग्रेस ने हार मान ली। अब मुकुल के पास घर छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है। राज्यसभा हाउस कमेटी के मुताबिक, मुकुल को अब दिल्ली स्थित अपना सरकारी आवास खाली करना पड़ेगा। खबर है कि इस आवास को भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता को अतिथि के तौर पर रहने के लिए आवंटित कर दिया गया है। 

इधर, बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने के कुछ दिन बाद ही तृणमूल कांग्रेस में वापसी करने वाले मुकुल राय ने शुक्रवार को भ्रम पैदा करते हुए कहा कि उनकी सीट पर अगर उपचुनाव होता है तो भगवा पार्टी की जीत होगी। एक हफ्ते में दूसरी बार राय ने ऐसा कहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में होने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तापस राय ने मुकुल के बयान पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया, जबकि भाजपा ने कहा कि जनता ऐसे बयानों पर फैसला करेगी।