कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने किया इस्तीफे का एलान, थोड़ी देर में राज्यपाल से करेंगे मुलाकात

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच चार बार के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस्तीफा देने का एलान किया है। पिछले कई हफ्तों से येदियुरप्पा के बाहर होने और किसी और को कमान सौंपने के कयास लगाए जा रहे थे। येदियुरप्पा ने अपनी सरकार के 2 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम में कहा कि मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैं दोपहर के भोजन के बाद राज्यपाल से मिलूंगा। गुरुवार को येदियुरप्पा ने कहा था कि वो पार्टी आलाकमान के हर फैसले का पालन करेंगे।

बीएम येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं, जो कर्नाटक का सबसे बड़ा समुदाय है जिसमें लगभग 17 प्रतिशत आबादी शामिल है। यह समुदाय 35 से 40 प्रतिशत विधानसभा सीटों का परिणाम निर्धारित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक लिंगायत समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा की जगह किसी अन्य समुदाय से सीएम बनाना भारतीय जनता पार्टी के लिए अनुकूल नहीं होगा। 

कर्नाटक के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'अगर लिंगायत समुदाय को छोड़कर किसी अन्य को भी मौका मिलता है, तो हर कोई इसे स्वीकार करेगा। लेकिन इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।' यह पूछे जाने पर कि क्या कर्नाटक सरकार में नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस को राजनीतिक आधार मिल सकता है, भाजपा नेता ने कहा, 'नहीं, कांग्रेस कई खेमों में बंटी हुई है। आज कांग्रेस के चार समूह हैं, चुनाव के समय तक 10 हो जाएंगे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि अगले चुनाव के बाद भाजपा फिर से सरकार बनाएगी।

रविवार को विभिन्न लिंगायत मठों के संतों ने बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में एक सम्मेलन आयोजित किया और येदियुरप्पा को अपना समर्थन दिया। बालेहोसुर मठ के डिंगलेश्वर स्वामी ने कहा कि येदियुरप्पा को नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'येदियुरप्पा जी के नेतृत्व में समाधान खोजा जाना चाहिए। उन्हें बदला नहीं जाना चाहिए। अगर उन्हें हटाया जाता है तो कर्नाटक को और समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।'