एलजेपी में घमासान के बीच चिराग ने खोला रामविलास पासवान का राज, संघर्ष ने दिलाई जगन मोहन रेड्डी की भी याद

LJP Split लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में टूट के बाद संकट में फंसे चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने फिर मुंह खोला है। अब यह लड़ाई सड़क पर आने वाली है। पार्टी के संस्‍थापक रहे रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के बेटे चिराग पासवान ने विरोध का झंडा थामे अपने चाचा पशुपति पारस (Pashupati Paras) के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। चिराग पूरे बिहार में 'आशीर्वाद-संघर्ष यात्रा' (Ashirwad-Sangharsh Yatra) निकालने जा रहे हैं। एलजेपी के चाचा-भतीजा की जंग का परिणाम तो भविष्‍य बताएगा, लेकिन इसने आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) के सियासी जंग की भी याद दिला दी है। चिराग के निशाने पर चाचा पशुपति पारस के साथ-साथ मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) भी हैं। इस बीच चिराग ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बयान दिया है तो पिता रामविलास पासवान का नीतीश कुमार को लेकर एक राज भी खोला है।

चाचा पारस व सीएम नीतीश पर लगाए आरोप

चिराग ने कहा है कि उनके पिता के निधन के बाद चाचा (पशुपति पारस) और भाई (प्रिंस राज) ने पीठ में छुरा घोंपा। चिराग ने परिवार टूटने का दुख जताया, लेकिन इस लड़ाई को सियासी के साथ कानूनी रूप से भी लड़ने की घोषणा की। चिराग ने यह भी कहा कि सन् 2014 में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की बात पर एनडीए का साथ छोड़ दिया था, लेकिन सन् 2017 में फिर वापस आकर रातोंरात एनडीए का हिस्सा बन गए थे। इस घटना से पिता रामविलास पासवान विचलित हो गए थे। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर सन् 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में एलजेपी के छह प्रत्‍याशियों को हराने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

अब 'आशीर्वाद-संघर्ष यात्रा' शुरू करेंगे चिराग

अब चिराग ने बिहार में जनसमर्थन व पार्टी की मजबूती के लिए 'संघर्ष यात्रा' की घोषणा की है। बीते 20 जून को एलजेपी के अपने गुट की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के बाद चिराग पासवान ने मां रीना पासवान (Rina Paswan) के पैर छुकर आशीर्वाद लिया तथा पिता राम विलास पासवान की जयंती पांच जुलाई से शुरू होने वाली अपनी इस यात्रा को 'आशीर्वाद-संघर्ष यात्रा' शुरू करने की घोषणा की। एलजेपी के सांसदों के विरोधी हो जाने के बाद चिराग को अब कार्य‍कर्ताओं के बल पर पार्टी पर नियंत्रण का भरोसा है। उनकी इस यात्रा ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की 'प्रजा संकल्प यात्रा' (Praja Sankalp Yatra) की याद दिला दी है।

जगन मोहन रेड्डी व चिराग में कई समानताएं

दरअसल, जगन मोहन रेड्डी और चिराग पासवान की कहानी में कई समानताएं हैं। सन् 2009 में राजनीति में कदम रखने वाले रेड्डी का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। राजनीति में प्रवेश करने के साल ही उनके पिता व कांग्रेस नेता वाईएस राजशेखर रेड्डी की एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। उम्‍मीद थी कि कांग्रेस जगन मोहन रेड्डी को पिता की विरासत सौंपेगी, लेकिन रोसैया को आंध्र प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनाया गया। इसके बाद साल 2010 में जगन मोहन रेड्डी ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी) का गठन किया।

प्रजा संकल्‍प यात्रा से जीता जनता का भरोसा

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के तहत रेड्डी की राजनीति संघर्षों के कई दौर से गुजरी। फिर, सन् 2014 में विधानसभा चुनाव में उनकी हार हुई। ठीक उसी तरह, जैसे बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग हार गए। चंद्राबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। रेड्डी ने छह नवंबर 2017 को 40 दिनों की 'प्रजा संकल्प यात्रा' शुरू की। 3648 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा में वे रोज सैकड़ों लोगों से मिलते थे। इस 'हम जगन चाहते हैं, जगन को आना चाहिए' का नारा खूब गूंजा था। फिर, सन् 2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया। रेड्डी 30 मई, 2019 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

चिराग की संघर्ष यात्रा से याद आए जगन

अब बात चिराग पासवान की। चिराग सियासत में हैं, लेकिन उनकी एक पके हुए गंभीर राजनेता की छवि बननी शेष है। सन् 2014 तक जगन मोहन रेड्डी की छवि भी ऐसी ही की। रेड्डी ने अपनी संकल्प यात्रा के माध्‍यम से जनता का भरोसा जीता। अब चिराग पासवान भी संघर्ष यात्रा के माध्‍यम से न केवल पार्टी पर पकड़ मजबूत करने, बल्कि खुद को नीतीश कुमार के विकल्प के तौर पर भी स्थापित करने की कोशिश करेंगे। यह कोशिश कितना रंग लाएगी, कहा नहीं जा सकता, लेकिन राजनीति में स्‍थापित होने का उनका संघर्ष जगन मोहन रेड्डी की याद जरूर दिलाता है।

एलजेपी के दोनों गुट लड़ रहे पार्टी पर कब्‍जे की जंग

विदित हो कि एलजेपी के पांच सासंदों ने रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस के नेतृत्‍व में चिराग पासवान को पार्टी के अध्‍यक्ष व नेता संसदीय दल के पदों से हटा दिया है। दूसरी ओर चिराग ने उनके कदम को पार्टी संविधान के खिलाफ बताते हुए उन्‍हें पार्टी से निष्‍कासित कर दिया है। अब एलजेपी के दोनों नेताओं के अपने-अपने गुट पार्टी पर कब्‍जे की जंग लड़ रहे हैं।