कोरोना काल में सुरक्षा भी पढ़ाई भी दोनों जरूरी: डॉ मधुबाला असिस्टेंट प्रोफेसर

 


-5 से 7 घंटे की टारगेटेड स्टडी ले कर चलें 

सूरज कुमार

गया।इस साल कोरोना वायरस महामारी के कारण विद्यर्थियों में सुरक्षित परीक्षा देने को लेकर मन थोड़ा सशंकित है।इससे ना सिर्फ स्टूडेंट्स बल्कि पैरेंट्स की चिंता भी बढ़ गई है।फिर क्यों न अपने मन को हर प्रकार के भय से दूर रख, तैयारी पर फोकस करें। और यह विश्वास रखें कि जो होगा वो अच्छा होगा।इस उम्मीद में  प्रयासरत्न रहना चाहिए। हां, सतर्क रहने और सावधानी बरतने में कोई दिक्कत नहीं।उक्त बातें शहर के एकमात्र अल्पसंख्यक महाविद्यालय मिर्जा गालिब कॉलेज गया के पॉलिटिकल साइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मधुबाला ने कहीं। बुधवार को युवा शक्ति संवाददाता से खास बातचीत करते हुए विद्यार्थियों के लिए कोरोना काल में पढ़ाई पर फोकस कैसे करें को लेकर अपनी बातों को साझा कि।उन्होंने कहा कि मन में किसी प्रकार का डर रखने से अपनी तैयारी ही बाधित होगी।इसलिए विद्यार्थी बिना कुछ सोचे, सिर्फ अपनी पढ़ाई पर फोकस रखें।

 5 से 7 घंटे की टारगेटेड स्टडी ले कर चलें 

उन्होंने बताया कि 5 से 7 घंटे की टारगेटेड स्टडी ले कर चलें।जब दिमाग थोड़ा बोझिल होने लगे तो आस पास घूम लें सावधानी के साथ।अगर ऑनलाइन क्लासेज लेते हैं तो‘ऑनलाइन क्लासेज का एक फायदा यह होता है कि छात्र-छात्राएं नियमित रूप से टीचर्स से जुडे रहते हैं।कुछ दुविधा होती है, तो बेझिझक पूछ भी सकते हैं।टीचर्स भी काफी सहयोग करते हैं।उनकी माने तो बच्चों एवं अभिभावकों के साथ-साथ टीचर्स के लिए भी इस बार एक नया अनुभव रहा।और सभी शिक्षकों के द्वारा कोशिश की जा रही है कि स्टूडेंट्स को कॉलेज की कमी महसूस न हो।साथ ही  किसी विषय को समझाने एवं उसे दोहराने के लिए पर्याप्त समय मिला।

सफलता के लिए फोकस बहुत जरूरी 

उन्होंने आगे बताया कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए फोकस बहुत जरूरी होता है।पढ़ाई में हम जितने नियमित रहेंगे।एक समान पढ़ेंगे और अपनी कमजोरियों को दूर कर बेहतर करने की कोशिश करेंगे, उससे किसी और का नहीं, खुद का ही फायदा होगा।उन्होंने बताया कि कॉलेज सभी एहतियात बरत रहे हैं, लेकिन इस समय सबको साथ मिलकर चलने की आवश्यकता है।पैरेंट्स को भरोसा रखना होगा।उन्हें अपने बच्चों को कोविड-19 के एक्सपोजर से बचाना होगा।

बच्चों की सेहत का रखे ख्याल 

उन्होंने बताया कि बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखें।साथ ही बच्चों से यही कहना चाहती हूं कि इधर-उधर अधिक सोचने या दिमाग को भटकाने की बजाय तैयारी पर फोकस करें।याद करने के अलावा लिखने का भी भरपूर अभ्यास करें, सैंपल पेपर्स के साथ ही शिक्षकों द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे पेपर्स को सॉल्व करते रहें।दिमाग को कूल रखें।योग एवं प्राणायाम करें। पौष्टिक आहार लें औऱ रिलैक्स रहें।