जियो 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए मार्च में लगा सकती है 700 MHz स्पेक्ट्रम की बोली

उद्योगपति मुकेश अंबानी ने पिछले साल की दूसरी छमाही में जियो के देश में 5जी सेवाएं शुरू करने की उम्मीद जताई थी. अब जब हाल ही में दूरसंचार विभाग ने पहली मार्च से होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सा लेने के लिए आवेदन मंगाए हैं, तो इसकी सुगबुगाहट तेज हो गयी है कि जियो 700 MHz स्पेक्ट्रम के लिए बोलियां लगा सकती है.

किस-किस स्पेक्ट्रम की होनी है नीलामी

दूरसंचार विभाग ने हाल में 700 MHz (मेगाहटर्ज), 800 MHz, 900 MHz, 1800 MHz, 2100 MHz, 2300 MHz और 2500 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी का नोटिस जारी किया. हालांकि इस नीलामी में 5जी सेवा के लिए जरूरी माने जाने वाले 3300 MHz और 3600 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी नहीं की जानी है. दुनियाभर में 5जी सेवाओं के लिए 3300 MHz और 3600 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड को आदर्श माना जाता है. लेकिन यूरोप में 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर 700 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड का उपयोग किया जा रहा है. 

जियो को रिन्युअल पर करने होंगे 23,864 करोड़ रुपये

मूल तौर पर इस नीलामी में वो स्पेक्ट्रम बैंड शामिल किए गए हैं जो दूरसंचार कंपनियों के पास पहले से हैं। इसकी वजह अधिकतर कंपनियों के विभिन्न बैंड के स्पेक्ट्रम की लाइसेंस अवधि खत्म होना और उनका रिन्यूअल होना है. जियो के मामले में अगर उसे अपनी सेवाएं सुचारू रखनी है तो उसे अपना लाइसेंस नवीनीकरण कराना ही होगा क्योंकि उसका 98.8 MHz स्पेक्ट्रम का लाइसेंस इसी साल समाप्त हो रहा है. नीलामी के लिए रखे गए स्पेक्ट्रम की बेस कीमतों के हिसाब से देखें  तो इतने स्पेक्ट्रम के लिए उसे 23,864 करोड़ रुपये खर्चने होंगे.

जियो के लिए क्यों जरूरी है रिन्युअल

जियो के लिए स्पेक्ट्रम लाइसेंस रिन्यू कराना दो वजहों से जरूरी है. कंपनी अपनी सेवाओं के लिए  800 MHz, 1800 MHz और  2300 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड का उपयोग करती है. पहली वजह है कि उसके 800 MHz स्पेक्ट्रम बैंड के लाइसेंस का इसी साल रिन्यूअल होना है. कंपनी के नेटवर्क को पूरी स्ट्रेंथ  1800 MHz और 2300 MHz के बैंड से मिलती है, जबकि बेहतर इंडोर कवरेज के लिए  800 MHz स्पेक्ट्रम बैंड की जरूरत पड़ती है.

क्रेडिट सूजी की रिपोर्ट के अनुसार दूसरी वजह, सभी निजी दूरसंचार कंपनियों में जियो के पास सबसे कम 657.7 MHz स्पेक्ट्रम होना है. जबकि उसकी प्रतिद्वंदी एयरटेल के पास  859.3 MHz और वोडाफोन आइडिया के पास 924.8 MHz स्पेक्ट्रम है. लेकिन इतने कम स्पेक्ट्रम के बावजूद उसके मोबाइल सिम चलाने वालों की संख्या सबसे अधिक है. अक्टूबर 2020 में यह 40.64 करोड़ थी. ऐसे में उसे अपनी सेवाएं सही बनाए रखने के लिए अपने मौजूदा स्पेक्ट्रम को बनाए रखना होगा.

लगा सकती है  700 MHz के स्पेक्ट्रम के लिए बोली

पिछले साल रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा था कि जियो 2021 की दूसरी छमाही तक देश में 5जी सेवाएं शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभाएगी.  हालांकि अभी भी 5जी सेवा के लिए जरूरी माने जाने वाले 3300 MHz और 3600 MHz के स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. लेकिन संभावना है कि जियो 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए  700 MHz के स्पेक्ट्रम के लिए बोली भी लगा सकती है.

हालांकि इसके लिए 19 सर्किलों में आधार कीमत 800 MHz के स्पेक्ट्रम के मुकाबले 38 प्रतिशत अधिक है, जबकि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता सर्किल में 58 प्रतिशत तक अधिक है. मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जियो इस साल 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने पर विचार नहीं करती है तो 700 MHz स्पेक्ट्रम की नीलामी में ज्यादा उथल-पुथल होने की उम्मीद नहीं है.

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